दिल्ली पुलिस का दावा: शांति भंग करने और सोशल मीडिया से उकसाने की साजिश में CJP कार्यकर्ता हुए गिरफ्तार
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने बुधवार को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के तीन कार्यकर्ताओं को सार्वजनिक शांति भंग करने, कानून की अवहेलना करने और सोशल मीडिया के जरिए गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 13 अक्टूबर की सुबह जंतर-मंतर के गैर-अधिसूचित विरोध स्थल पर निजी परिसर के रास्ते कथित तौर पर जबरन घुसने और पुलिस ड्यूटी में बाधा डालने की घटना के बाद की गई है, जो वर्तमान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।
जंतर-मंतर पर निषेध के बावजूद प्रवेश और टकराव
दिल्ली पुलिस के आधिकारिक बयान के मुताबिक, यह पूरी कार्रवाई 13 अक्टूबर की सुबह हुई एक घटना के बाद अमल में लाई गई। CJP के तीनों आरोपी कार्यकर्ता और 11 अन्य सदस्य कथित तौर पर उस जंतर-मंतर विरोध स्थल पर निजी परिसरों के माध्यम से घुस गए थे, जिसे अब विरोध प्रदर्शन के लिए अधिकृत या नोटिफाइड नहीं माना जाता है। मौके पर मुस्तैद पुलिसकर्मियों ने जब उन्हें रोकने का प्रयास किया, तो प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर सरकारी ड्यूटी निभा रहे पुलिसकर्मियों के काम में बाधा उत्पन्न की।
दो थानों में FIR दर्ज, BNSS के तहत कार्रवाई
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने मौके से सभी 14 लोगों को हिरासत में ले लिया और इस घटना के संबंध में दो अलग-अलग FIR दर्ज कीं। कनॉट प्लेस पुलिस थाना में FIR संख्या 289/26 धारा 223(a), 332 और 61(2) के तहत दर्ज की गई, जबकि संसद मार्ग पुलिस थाना में FIR संख्या 128/26 धारा 221, 115(2), 132, 121(1) और 3(5) के तहत दर्ज की गई। ये दोनों मामले 13 अक्टूबर को ही दर्ज किए गए थे।
पुलिस ने बताया कि सार्वजनिक शांति और कानून व्यवस्था बार-बार भंग करने की कोशिशों के मद्देनजर इन तीनों कार्यकर्ताओं को निवारक प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया। पुलिस बयान में कहा गया, "सार्वजनिक शांति भंग करने और कानून तोड़ने की उनकी बार-बार की गई कथित कोशिशों को देखते हुए, आशुतोष रंका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे को कानून के संबंधित निवारक प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया। सोशल मीडिया के जरिए दूसरों को ऐसी ही गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल होने के लिए उकसाने की उनकी कथित कोशिशों को भी ध्यान में रखा गया।"
इसके बाद इन तीनों को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहाँ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के अंतर्गत कानूनी कार्यवाही शुरू की गई। मजिस्ट्रेट ने पुलिस की रिपोर्ट और इस आशंका पर कि रिहा होने पर आरोपी दोबारा उल्लंघन कर सकते हैं, सौरव दास और आशुतोष रंका को पाँच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वहीं, अजिंक्य शिंदे को 5,000 रुपये के व्यक्तिगत मुचलके और जमानत पर छह महीने तक शांति तथा अच्छा आचरण बनाए रखने के लिए पाबंद किया गया।
गिरफ्तारी पर राजनीतिक घमासान और वकीलों के सवाल
इन गिरफ्तारियों के बाद विपक्षी दलों और CJP के भीतर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। CJP के अन्य सदस्य अभिजीत दिपके ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए सवाल उठाया। दिपके ने कहा, "इस देश में तिरंगा फहराना कब से इतना बड़ा गुनाह हो गया कि इसके लिए लोगों को पाँच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया जाए?" उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए इसे "अघोषित इमरजेंसी" करार दिया।
आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के जरिए दास और रंका के खिलाफ की गई कार्रवाई की आलोचना की और उनके रिमांड को "तानाशाही" बताया।
दूसरी ओर, तीनों कार्यकर्ताओं की पैरवी कर रहे एडवोकेट अभिष्ट हेला ने इस एहतियाती कार्रवाई के कानूनी आधार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई का इस्तेमाल केवल असहमति की आवाजों को दबाने के लिए किया जा रहा है। (इनपुट: ANI)
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