विशेषज्ञों के अनुसार मधुमेह से उच्च रक्त शर्करा, इ

मधुमेह हृदय रोग और दिल के दौरे का मूक कारण बन सकता है: विशेषज्ञ

Diabetes Can Be a Silent Cause of Heart Disease and Heart Attacks: Experts

नई दिल्ली (भारत)। मधुमेह को अक्सर सिर्फ ब्लड शुगर बढ़ने से जुड़ी बीमारी माना जाता है, लेकिन इसका असर दिल और रक्त वाहिकाओं पर भी गंभीर हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक बढ़ी हुई ब्लड शुगर, इंसुलिन प्रतिरोध और शरीर में सूजन रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे हृदय रोग और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। खास बात यह है कि मधुमेह से जुड़ी हृदय संबंधी समस्याएं कई बार बिना स्पष्ट लक्षणों के भी विकसित हो सकती हैं।

उच्च शर्करा और रक्त वाहिकाओं पर असर

डॉ. मेहता के अनुसार, ग्लूकोटॉक्सिसिटी और नाइट्रिक ऑक्साइड की कमी एंडोथेलियल डिसफंक्शन में योगदान कर सकती है। उन्होंने कहा कि मधुमेह अक्सर बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर के साथ भी होता है। उन्होंने बताया कि इससे रक्त वाहिकाएं प्लाक जमाव के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकती हैं। डॉ. मेहता ने कहा कि मधुमेह के साथ उच्च रक्तचाप और कई अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं, जिससे दिल के दौरे का खतरा बढ़ता है।

लंबे समय तक मधुमेह से बढ़ सकता है हृदय जोखिम

डॉ. मेहता ने कहा कि कई अध्ययनों में लंबे समय तक मधुमेह रहने से हृदय संबंधी जटिलताओं का संबंध सामने आया है। उनके अनुसार, मधुमेह से पीड़ित लोगों में सामान्य लोगों की तुलना में हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम काफी अधिक होता है। उन्होंने इसे समझाते हुए कहा कि मधुमेह होने पर मरीज के हृदय संबंधी जोखिम को उस व्यक्ति के समान माना जाता है जिसे पहले से कोरोनरी धमनी रोग या मायोकार्डियल इन्फार्क्शन हो चुका हो। उन्होंने इसे “मायोकार्डियल जोखिम समतुल्य” बताया।

45 वर्षीय मरीज में तीनों कोरोनरी धमनियां अवरुद्ध

डॉ. मेहता ने 45 वर्षीय एक मधुमेह रोगी का मामला साझा किया, जो पेट के ऊपरी हिस्से में तेज दर्द की शिकायत लेकर आपातकालीन विभाग पहुंचा था। मरीज को लगा कि अधिक वसायुक्त और मसालेदार भोजन खाने के कारण गैस की समस्या हुई है। ईसीजी में बदलाव मिलने के बाद जांच की गई। मरीज को पहले कभी दिल का दौरा नहीं पड़ा था और उसे उच्च रक्तचाप का भी इतिहास नहीं था। हालांकि, वह करीब 10 वर्षों से मधुमेह से पीड़ित था और अनियमित रूप से दवाइयां ले रहा था।

एंजियोग्राफी में सामने आई गंभीर स्थिति

बाद में एंजियोग्राफी में पता चला कि मरीज की तीनों कोरोनरी धमनियां पूरी तरह अवरुद्ध थीं। एक धमनी में एक बहुत छोटे चैनल के माध्यम से रक्त प्रवाह बना हुआ था। डॉ. मेहता के अनुसार, मरीज को बाईपास सर्जरी की आवश्यकता थी। उन्होंने कहा कि मरीज इस बात को लेकर चिंतित था कि जब उसे कोई लक्षण नहीं थे, तो अचानक इतनी गंभीर समस्या कैसे सामने आ गई। डॉ. मेहता ने कहा कि यह स्थिति अचानक नहीं बनती और मधुमेह से पीड़ित लोगों में ऐसी समस्या अधिक आम है।

मधुमेह में चेतावनी संकेत कम हो सकते हैं: डॉ. त्रेहान

मेदांता के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. नरेश त्रेहान ने मधुमेह रोगियों में हृदय संबंधी जटिलताओं की पहचान में आने वाली कठिनाई पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मधुमेह के कारण तंत्रिका क्षति होने पर हृदय रोग से जुड़े चेतावनी संकेत कम हो सकते हैं। डॉ. त्रेहान ने कहा कि मधुमेह से पीड़ित लोगों में हृदय से दर्द का संकेत देने वाले तंत्रिका सिरे क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। ऐसे में सीने में दर्द चेतावनी के रूप में सामने नहीं आ सकता और व्यक्ति को हृदय को हो रहे नुकसान का पता नहीं चलता।

नियमित हृदय जांच पर जोर

डॉ. त्रेहान ने मधुमेह रोगियों के लिए नियमित हृदय जांच के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मधुमेह का इलाज करने वाले डॉक्टरों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मरीज समय पर हृदय की जांच कराएं। उन्होंने कहा कि स्थिर स्थिति में हर दो साल में एक बार जांच की जा सकती है, जबकि उन्होंने हर साल इकोकार्डियोग्राम या हृदय परीक्षण कराने की बात भी कही। उनके अनुसार, जांच जरूरी है क्योंकि मरीजों को पता नहीं होता कि उनका हृदय अंदर से कितना कमजोर हो चुका है।

कुछ मरीजों में हृदय की कार्यक्षमता 20% तक घटी

डॉ. त्रेहान ने कहा कि उन्होंने ऐसे कई मरीज देखे हैं जिनके हृदय की कार्यक्षमता 20% तक गिर चुकी थी और उन्हें इसका पता भी नहीं था। बाद में सांस लेने में तकलीफ होने पर इकोकार्डियोग्राम कराया गया, तब उन्हें हृदय की कम कार्यक्षमता का पता चला। उन्होंने कहा कि मधुमेह का इलाज करने वाले डॉक्टरों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे मरीजों को बीमारी से जुड़े संभावित खतरों के बारे में समझाएं। साथ ही, नियमित स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करना भी जरूरी है, क्योंकि ये जीवन की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। (Source: ANI)

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