इसका वजन करीब चार किलोग्राम होता है। इसी वजह से यह

डायनासोर के वंशज का कुनबा बढ़ा, 50 से 325 हुई संख्या

विजय नारायण सिंह

आकलैंड (न्यूजीलैंड)। यहां के जंगलों से एक बेहद साकारात्मक और उम्मीद भरी खबर सामने आई है। 6.5 करोड़ साल पहले विलुप्त हो चुके विशालकाय डायनासोरों का सीधा वंशज काकापो तोता अपना कुनबा बढ़ा  रहा है। अपनी अनूठी पहचान के लिए दुनिया भर में मशहूर यह अकेला तोता है जो उड़ नहीं सकता। लंबे समय से चल रहे संरक्षण के प्रयासों से इसके कुनबे में बढ़ोतरी देखी जा रही है। इस वृद्धि ने दुनिया के प्रकृति प्रेमियों और जीव विज्ञानियों के चेहरे पर खुशी ला दी है। इसका वजन करीब चार किलोग्राम होता है। इसी वजह से यह उड़ नहीं सकता। इसके पंख चलने में संतुलन बनाने का काम करता है। डायनासोर से तोता बनने में इसे करोड़ों साल लग गए।

पक्षियों में सबसे लंबी उम्र

यह पूरी तरह निशाचर प्राणी है जो रात में ही निकलता है। पूरी तरह शाकाहारी है। इसका रंग काई की तरह गहरे हरे रंग का होता है, जो इसे झाडि़यों में छिपने में मदद करता है।इसके पंख बेहद नरम होते हैं। पक्षियों में सबसे लंबी उम्र तक जीने वाला यह अकेला पक्षी है। अपने अनुकूल वातावरण में  यह 80 से 100 साल पहले तक जिवित रहता है। उस समयइस द्वीप पर किसी मांसहारी स्तनापाई शिकारी के नहीं होने के कारण इसका जीवन निर्भीक था। इसी वजह से इसने विकास की प्रक्रिया में -धीरे उड़ने की क्षमता खो दी और पूरी तरह जमीन का प्राणी बन कर रह गया। इसका वजन भी बढ़ता गया। 1990 के इसकी आबादी करीब 50 थी, लेकिन सरंक्षण कार्यक्रमों के परिणामस्वरूप 2026 में इनकी संख्या बढ़कर 325 हो गई है। यह अद्भुत संयोग रहा कि इसने इस साल कुल 90 चूजों को जन्म दिया। 

आठ करोड़ साल पहले हुआ शुरू हुआ विकासक्रम

आठ करोड़ साल पहले जीलैंडिया या न्यूजीलैंड का यह भूभाग मुख्य लैंड गोंडवाना से टूटकर अलग हो रहा था। धीरे-धीरे टूटकर यह समुद्र में पूरी तरह से एक अलग द्वीप बन गया। 6 से 8 करोड़ साल पहले इसके पूर्वज जब यहां पहुंचे तब इनके पास उड़ने की क्षमता थी। वे समुद्र पार करके इस द्वीप पर पहुंचे और यहीं बस गए। गोंडवाना महाद्वीप से अलग होने के बाद यहां की पारिस्थितिकी (Ecosystem) बिल्कुल अनोखी थी। यहां उसका कोई अन्य जानवर मौजूद नहीं था। जैसे बिल्लियां, कुत्ते, सिायार या अन्य कोई स्तनपाई शिकारी मौजूद नहीं था। ऐसे में जान बचाने के लिए उनको उड़ने की जरूरत नहीं पड़ी। जमीन पर कोई बड़ा खतरा नहीं होने के कारण वे बिना किसी डर भय के विकसित होते रहे। जंगल होने के कारण भोजन की भी कोई नहीं थी। इस स्थिति में लगातार रहने के कारण लाखों वर्ष के विकासक्रम में उनकी मांसपेशियां कमजोर होती गईं और वजन बढ़ता गया। इस तरह यह तोता पूरी तरह से जमीन पर रहने वाला निशाचर बन गया। 

क्यों पहुंचा विलुप्ति के कगार पर 

न्यूजीलैंड में मनुष्यों के पहुंचने के बाद आबादी बढ़ती गई। इनके साथ ही कुत्ते, बिल्ली और सियार जैसे जानवर भी वहां पहुंच गए। इसके अलावा जंगलों की भी कटाई शुरू हो गई। जंगलों में शिकारी जानवरों की पहुंच से उनकी आबादी धीरे-धीरे कम होने लगी। स्थिति यह हो गई कि उनकी आबादी पूरी तरह से लुप्त होने के कगार पर पहुंच गई। 1990 में इनकी संख्या घटकर 50 रह गई। यह तोता न्यूजीलैंड के अलावा दुनिया में कहीं और नहीं पाया जाता, इसलिए दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने गहरी चिंता जताई। इसके बाद न्यूजीलैंड सरकार ने इसके संरक्षण का कार्यक्रम चलाया, जिसके सार्थक परिणाम सामने आने लगे हैं। 

डायनासोर का वंशज 

15 से 17 करोड़ साल पहले मांसाहारी दो पैरों पर चलने वाले छोटे थेरोपोड डायनासोर के शरीर पर पंख विकसित होने लगे। इसका शुरूआती उदाहरण आर्कियोपटेरिक्स है। यह उड़ने वाला डायनासोर था। इसके जीवाश्म से ही पता चला कि उड़ने वाले डायनासोर भी इस पृथ्वी पर रहते थे। 6.6 करोड़ साल पहले जब उल्कापिंड के कारण पृथ्वी से डायानासोरों का विनाश हो गया तो यह उड़ने वाले डायनासोर ही बचे। 5-6 करोड़ साल पहले पेलियोसीन और ईओसीन युग में इसी परिवार तोते की विशिष्ट विशेषताओं वाले पक्षियों का वकास शुरू हो गया। थोड़ी मुड़ी हुई चोंच ,दो आगे और दो पीछे उंगलियोें वाले पैर विकसित हुए। 

तोता परिवार ( Strigopidae)   

करीब 3 से 4 करोड़ साल पहले तोतों की मुख्य प्रजाति सेस काकापो अलग हो गया। यह आज दुनिया में सबसे प्राचीन जीवित तोता प्रजातियों में एक माना जाता है। इसकी विशेषताएं ही पक्षियों में इसे अलग बनाती हैं। यही वजह है कि डिस्कवरी से लेकर तमाम लोगों ने इसको लेकर वीडियों और डाक्यूमेंट्री बनाई हैं।

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