पर्यावरण संबंधी मुद्दों की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत
नई दिल्ली (भारत)। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा है कि पर्यावरणीय मुद्दों की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती, इसलिए जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद और सहयोग जरूरी है। उन्होंने यह बात नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित “पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य” विषयक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कही। सम्मेलन में 17 देशों के न्यायिक प्रतिनिधि, वैज्ञानिक, पर्यावरण विशेषज्ञ और नीति निर्माता हिस्सा ले रहे हैं।
पर्यावरण सम्मेलन में CJI सूर्यकांत का संबोधन
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को नई दिल्ली में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। यह सम्मेलन पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य विषय पर आयोजित किया जा रहा है। CJI सूर्यकांत ने सम्मेलन के आयोजन को सराहनीय कदम बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और अन्य महत्वपूर्ण लोग एक साथ आते हैं। यहां वे अपने विचारों और अलग-अलग क्षेत्रों में पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के तरीकों और अच्छी प्रथाओं को साझा कर सकते हैं।
पर्यावरणीय मुद्दों की कोई भौगोलिक सीमा नहीं
मुख्य न्यायाधीश ने पर्यावरणीय चुनौतियों की वैश्विक प्रकृति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण से जुड़े मुद्दे किसी एक देश या क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, इसलिए इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के बीच लगातार बातचीत और सहयोग जरूरी है। उन्होंने कहा, पर्यावरणीय मुद्दों की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती। इसलिए, यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि इन मुद्दों से संबंधित सभी लोग नियमित रूप से मिलें और इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श करें।
17 देशों के न्यायाधीश और प्रतिनिधि शामिल
नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 19 और 20 सितंबर को आयोजित हो रहे इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 17 देशों के न्यायाधीश और न्यायिक प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा पर्यावरण विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, नीति निर्माता और अन्य संबंधित लोग भी सम्मेलन में शामिल हैं।
जलवायु और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा
सम्मेलन का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और शासन से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा करना है। इसमें अलग-अलग न्यायक्षेत्रों के न्यायिक दृष्टिकोण, वैज्ञानिक जानकारी और पर्यावरण से जुड़े शासन के तरीकों को साझा करने पर भी चर्चा हो रही है। सम्मेलन में जलवायु न्याय, समानता और समावेशन, पर्यावरण कानून और शासन का भविष्य, वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियां और सहयोग तथा वन संरक्षण और पुनर्स्थापन जैसे विषयों पर अलग-अलग सत्र रखे गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर
CJI सूर्यकांत के संबोधन में पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय और न्यायिक सहयोग के महत्व पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण को होने वाले नुकसान का असर राष्ट्रीय और प्रशासनिक सीमाओं से आगे तक फैल सकता है। (Source: ANI)
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