EV खरीदने में बैटरी और चार्जिंग बनी सबसे बड़ी रुकावट, 52 फीसदी भारतीय ग्राहक चिंतित: रिपोर्ट
नई दिल्ली। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के प्रति क्रेज़ तेजी से बढ़ा है, लेकिन खरीदारी के मोर्चे पर ग्राहक अब भी हिचकिचा रहे हैं। बेन एंड कंपनी (Bain & Company) के ग्लोबल ऑटोमोटिव कंज्यूमर सर्वे में खुलासा हुआ है कि बैटरी की विश्वसनीयता और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का ढुलमुल होना ईवी अपनाने में सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है।
बैटरी और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बड़ी चुनौती
सर्वे के अनुसार, बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल (BEV) को लेकर संशय में रहने वाले 52 फीसदी भारतीय ग्राहकों ने माना कि बैटरी की खराबी का डर उन्हें गाड़ी खरीदने से रोकता है। वहीं, 44 फीसदी लोगों ने चार्जिंग स्टेशनों की कमी और 43 फीसदी ने चार्जिंग में लगने वाले लंबे वक्त को प्रमुख वजह बताया।
ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल लोगों की दिलचस्पी बढ़ना ही काफी नहीं है, बल्कि कंपनियों को इस दिलचस्पी को वास्तविक डिलीवरी में बदलना होगा।
कीमत और ड्राइविंग रेंज पर भी संशय
रिपोर्ट कहती है कि ईवी को लेकर झिझक रहे 32 फीसदी ग्राहकों के लिए महंगी गाड़ियां एक बड़ी बाधा हैं। इसके अलावा, 31 फीसदी लोग एक बार फुल चार्ज करने पर गाड़ी की रेंज (माइलेज) को लेकर परेशान दिखे। स्पष्ट है कि ईवी बाज़ार को बढ़ाने के लिए गाड़ियों को किफायती बनाने के साथ-साथ चार्जिंग और बैटरी परफॉरमेंस की चिंताएं दूर करनी होंगी।
युवाओं में ईवी खरीदने का सबसे ज़्यादा क्रेज़
तमाम चिंताओं के बावजूद राहत की बात यह है कि 57 फीसदी भारतीय उपभोक्ता बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के विचार से सहमत दिखे। इनमें भी जनरेशन-वाई (Gen Y) यानी युवाओं में सबसे ज़्यादा 61 फीसदी ख़रीदारी की इच्छा दर्ज की गई।
हालांकि, रिपोर्ट तैयार करने वाली संस्था बेन (Bain) ने आगाह किया है कि "खरीदने पर विचार करने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि ग्राहक शोरूम जाकर गाड़ी खरीद ही लेगा।"
घर पर चार्जिंग और टेस्ट ड्राइव का असर
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि भारत में घर पर चार्जिंग की सुविधा बेहद अहम है। मौजूदा ईवी मालिकों में से लगभग 71 फीसदी लोग अपनी गाड़ियाँ अक्सर या हमेशा घर पर ही चार्ज करते हैं।
इसके साथ ही, जिन लोगों ने खुद ईवी चलाकर देखी है, उनमें गाड़ी खरीदने का भरोसा काफी ज्यादा दिखा। भारत में टेस्ट ड्राइव लेने वाले 82 फीसदी लोग ईवी खरीदने के लिए तैयार दिखे, जबकि बिना टेस्ट ड्राइव वाले ग्राहकों में यह आंकड़ा महज़ 66 फीसदी था।
2026 की पहली तिमाही का वैश्विक सर्वे
यह सर्वे 2026 की पहली तिमाही के दौरान आयोजित किया गया था। इसमें भारत, चीन, अमेरिका और कई यूरोपीय देशों सहित दुनिया के 11 प्रमुख बाज़ारों के 12,000 से अधिक उपभोक्ताओं की राय शामिल की गई थी। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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