काशी के सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र नहीं रहे, 89 साल की उम्र में मिर्जापुर में ली अंतिम सांस
Chhannu Lal Mishra : सुमधुर आवाज में "खेलें मसाने में होली" गाकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर देने वाली मखमली आवाज आज शांत हो गयी. भजन, सोहर, ठुमरी, कजरी और चैती की गायकी को नया आयाम देने वाले बनारस घराने के सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र का गुरुवार तड़के निधन हो गया. पं छन्नूलाल ने 89 साल की उम्र में गुरुवार को सुबह 4.15 बजे बेटी नम्रता मिश्रा के मिर्जापुर स्थित घर पर अंतिम सांस ली. पंडित छन्नूलाल मिश्र 2014 लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रस्तावक रहे थे.
पं छन्नूलाल की पुत्री नम्रता ने बताया उनके पिता का अंतिम संस्कार आज शाम काशी के मणिकर्णिका घाट पर किया जाएगा. पंडित छन्नूलाल मिश्र की तबीयत 7 महीने से खराब थी. हाल ही में वो 17 दिन हॉस्पिटल में एडमिट रहे थे. 11 सितंबर को मिर्जापुर में बेटी के घर तबीयत बिगड़ी. सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें रामकृष्ण सेवाश्रम हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था.
पं छन्नूलाल द्वारा गाए गए भजन "खेलें मसाने में होली दिगंबर खेलें मसाने में होली" उनका "सिग्नेचर सांग" माना जा सकता है. भगवान शंकर को समर्पित ये भजन अविनाशी काशी के श्मशान में होली उत्सव के रंग और परंपरा का चित्रण करता है. इस भजन की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि होली पर हर गली मोहल्ले और टीवी पर ये ही भजन सुनाई देता है. पंडित छन्नूलाल की गायकी में इस गीत का लोक और धार्मिक रंग स्पष्ट दिखाई देता है. उनके स्वर और लय ने इसे संगीत इतिहास में एक अमूल्य धरोहर बना दिया. इसके अलावा उन्होंने राधाकृष्ण, भगवान राम, उनके बनवास और फिर अयोध्या वापसी को लेकर गाए गाये भजन और सोहर भी काफी लोकप्रिय हैं। यही नहीं उन्होंने सुंदरकांड और रामचरित मानस की भी अपनी गायकी से अलग पहचान दी है।
अपने शास्त्रीय गायन से लाखों दिलों में खास जगह बनाने वाले छन्नूलाल मिश्र ने बॉलीवुड में भी अपना योगदान दिया था। साल 2011 में आई प्रकाश झा की फिल्म आरक्षण में 'सांस अलबेली' और 'कौन सी डोर' जैसे गानों को अपनी आवाज दी थी. ये दो गाने काफी मशहूर हुए थे और लोग इसे आज भी गुनगुनाते हैं. इसके अलावा इन्होंने साल 2020 में 'वैष्णव जन तो तेहि कहिए' एल्बम के लिए अपनी आवाज दी थी.
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