चेन्नई में हुई ब्रिक्स एसटीआई बैठक में भारत ने 'वि

एआई और क्वांटम तकनीक में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग पर फोकस

ब्रिक्स STI बैठक में 'विश्व बंधु भारत' पर जोर (File Photo)

चेन्नई: केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कहा कि चेन्नई में आयोजित ब्रिक्स विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (एसटीआई) मंत्रिस्तरीय बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दोहराए गए "विश्व बंधु भारत" के दृष्टिकोण से प्रेरित थी, जिसमें एक मजबूत और टिकाऊ नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण पर चर्चा केंद्रित रही।

ब्रिक्स बैठक में 'विश्व बंधु भारत' के विजन पर जोर

14वीं ब्रिक्स एसटीआई मंत्रिस्तरीय बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा, ब्रिक्स के विभिन्न सदस्य देशों के विज्ञान मंत्रियों द्वारा प्रतिनिधित्व की गई ब्रिक्स विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार बैठक अत्यंत फलदायी, रचनात्मक और उपयोगी रही। उन्होंने आगे कहा, हमने एक ऐसी नवाचार प्रणाली के निर्माण के विषय का अनुसरण किया जो मजबूत, टिकाऊ हो और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बार-बार दोहराए जाने वाले 'विश्व बंधु भारत' के विचार से प्रेरित हो।

चेन्नई घोषणा पत्र से सामूहिक प्रयासों को मिलेगी नई मजबूती

जितेंद्र सिंह ने चेन्नई घोषणा पत्र को अपनाने की घोषणा करते हुए कहा कि यह ब्रिक्स देशों के बीच सामूहिक प्रयासों को मजबूत करेगा और वैश्विक दक्षिण के कल्याण में योगदान देगा। हमने आज चेन्नई घोषणा पत्र जारी किया है, जिसे शिक्षा और विज्ञान के केंद्र के रूप में भी जाना जाता है। चेन्नई से जारी किया गया 

ग्लोबल साउथ के लिए ब्रिक्स सहयोग बढ़ाने पर जोर

यह घोषणापत्र ब्रिक्स देशों के साथ-साथ पूरी दुनिया में गूंजेगा, क्योंकि हम वैश्विक दक्षिण के कल्याण के लिए सामूहिक रूप से सहयोग और समन्वय करने के अपने प्रयासों को एकजुट कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने सुलभ, किफायती और टिकाऊ नवाचार पर केंद्रित भविष्य के लिए तैयार विज्ञान और प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए ब्रिक्स देशों के बीच अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों, नवाचार वित्तपोषण और प्रतिभा गतिशीलता में गहन सहयोग का आह्वान किया।

उभरती तकनीकों में ब्रिक्स सहयोग बढ़ाने पर जोर

चेन्नई में बैठक को संबोधित करते हुए, जितेंद्र सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां अर्थव्यवस्थाओं और समाजों को नया आकार दे रही हैं, इसलिए मजबूत सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स, अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा और अनुसंधान क्षमताओं के साथ एक सहयोगात्मक नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए अच्छी स्थिति में है। 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान विषय है "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण"।

क्वांटम मिशन और डिजिटल पहल से ब्रिक्स सहयोग मजबूत करने पर जोर

जितेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन, बायोई3 नीति और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पारिस्थितिकी तंत्र सहित भारत की पहलों पर प्रकाश डाला और ब्रिक्स साझेदारों को अग्रणी अनुसंधान, अनुसंधान अवसंरचना साझाकरण, स्टार्टअप साझेदारी और क्षमता निर्माण में सहयोग बढ़ाने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि चेन्नई में हुई चर्चा ब्रिक्स सहयोग को मजबूत करेगी और अधिक नवोन्मेषी, लचीले और टिकाऊ भविष्य में योगदान देगी। 

(इनपुट: ANI)

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