सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना लोकतंत्र की नींव: पूर्व सीजेआई डी.वाई. चंद्रचूड़
नई दिल्ली। भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने रविवार को राष्ट्रीय प्रगति में सार्वजनिक संस्थानों की अहम भूमिका पर जोर देते हुए समाज के वंचित वर्गों के लिए स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने की पुरजोर वकालत की है।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान पूर्व सीजेआई ने कहा कि मजबूत स्वास्थ्य संस्थान एक जीवंत लोकतंत्र की आधारशिला हैं। सरकारी अस्पताल उन लाखों लोगों के लिए जीवन रेखा साबित होते हैं जो किफायती इलाज के लिए दूर-दूर से आते हैं।
मरीजों का कल्याण सर्वोपरि
संस्थागत मजबूती और जन कल्याण पर बात रखते हुए उन्होंने कहा, "चाहे संस्थान सार्वजनिक हों या निजी, देश की प्रगति के लिए उनका मजबूत होना आवश्यक है। सरकारी अस्पताल गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा करते हैं, इसलिए यह अनिवार्य है कि हम अपने पब्लिक हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर को और अधिक सुदृढ़ बनाएं।"
यूसीएमएस के कार्यक्रम में की शिरकत
इससे पहले, उन्होंने दिल्ली के यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज (UCMS) की 55वीं वर्षगांठ के समारोह को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने चिकित्सा पेशे में करुणा, मानवता और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित किया।
डॉक्टरों और छात्रों से मुखातिब होते हुए उन्होंने कहा, "यहाँ से गुजरने वाले हर डॉक्टर ने अनजाने में एक छाप छोड़ी है। अब आपकी बारी है; आपको यह समझना चाहिए कि आपके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण काम वह होगा, जिसे कोई देख नहीं पाता।"
महात्मा गांधी की सर्जरी का किया जिक्र
अपने संबोधन में पूर्व सीजेआई ने जनवरी 1924 की एक ऐतिहासिक घटना का हवाला दिया, जब पुणे की यरवदा जेल में कैद के दौरान महात्मा गांधी का अपेंडिसाइटिस का ऑपरेशन एक ब्रिटिश सर्जन ने किया था।
इस वाकये का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ संघर्ष करने वाले नेता एक ब्रिटिश सर्जन के ऑपरेशन टेबल पर लेटे थे। उस कमरे में किसी की राष्ट्रीयता मायने नहीं रखती थी। गांधीजी ने सहमति दी, डॉक्टर को धन्यवाद दिया और बाद में अपनी जान बचाने वाले उस चिकित्सक को आत्मीयता से याद किया।"
ऑपरेशन थिएटर में इंसानियत ही एकमात्र पहचान
घटना से सीख साझा करते हुए उन्होंने डॉक्टरों को नसीहत दी कि उन्हें बिना किसी पूर्वाग्रह के मरीजों का इलाज करना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया, "सामने मौजूद मरीज कोई कैदी हो सकता है या मंत्री, संत या पापी। लेकिन ऑपरेशन थिएटर में केवल एक ही पहचान मायने रखती है- एक इंसान जिसे आपकी मदद की दरकार है। चिकित्सा अपने बेहतरीन रूप में वह जगह है जहाँ सारे भेदभाव दरवाजे के बाहर छूट जाते हैं।" (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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