दिल्ली में सोमवार से शुरू होगा ट्राई-सर्विसेज फ्यूचर वॉरफेयर कोर्स, AI और क्वांटम टेक्नोलॉजी पर बनेगी नई रणनीति
नई दिल्ली। नई दिल्ली के मानेक शॉ सेंटर में सोमवार से 'ट्राइसिविसेज फ्यूचर वारफेयर कोर्स' (Tri-Services Future Warfare Course) के चौथे संस्करण की शुरुआत होने जा रही है।" रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) के आधिकारिक ब्यौरे के मुताबिक, चार सप्ताह तक चलने वाले इस विशेष पाठ्यक्रम का संचालन एकीकृत रक्षा स्टाफ मुख्यालय (HQ IDS) के संरक्षण में किया जा रहा है, जबकि इसके समन्वय की जिम्मेदारी युद्ध अध्ययन केंद्र (CENJOWS) को सौंपी गई है।
पाठ्यक्रम की मुख्य बातें और कार्यप्रणाली
विस्तृत सहभागिता: इस प्रतिष्ठित कोर्स में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। इसके साथ ही सरकारी संगठनों, अकादमिक जगत, रक्षा उद्योग (Industry) और प्रमुख सामरिक थिंक-तंक के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल हो रहे हैं।
भविष्य की तकनीक पर फोकस: पाठ्यक्रम के चार हफ्तों के दौरान उभरती हुई आधुनिक तकनीकों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्वायत्त प्रणालियों (Autonomous Systems) और तकनीक-आधारित युद्ध कौशल पर विशेष मंथन किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मार्गदर्शन: प्रतिभागियों को देश के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, नीति निर्माताओं, प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, उद्योग जगत के दिग्गजों और विषय विशेषज्ञों के व्याख्यानों (Lectures) के जरिए सीधे तौर पर सीखने का अवसर मिलेगा।
अत्याधुनिक युद्ध तकनीकों से लैस होने की रणनीति
बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और हाइब्रिड वारफेयर के इस दौर में पारंपरिक युद्ध के तरीके पीछे छूट रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए इस चार सप्ताह के पाठ्यक्रम (Curriculum) के तहत कई बेहद अहम और संवेदनशील विषयों को शामिल किया गया है।
पाठ्यक्रम में शामिल प्रमुख विषयों में भू-राजनीतिक विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), क्वांटम टेक्नोलॉजी , साइबर और कॉग्निटिव वारफेयर, सूचना युद्ध (Information Warfare), स्वायत्त प्रणालियां (Autonomous Systems), थल, समुद्र, वायु और अंतरिक्ष डोमेन में भविष्य के सैन्य अभियान (Future Operations in the land, maritime, air and space domains), ग्रे-जोन ऑपरेशंस (Grey-zone operations), मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस (Multi-domain operations) और तकनीक-आधारित युद्ध कौशल (Technology-enabled warfare) शामिल हैं। इन सभी जटिल सामरिक चुनौतियों से निपटने के तरीकों पर गहराई से विचार-विमर्श किया जाएगा।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस कोर्स का मुख्य उद्देश्य उभरती हुई ऑपरेशनेबल चुनौतियों के प्रति तीनों सेनाओं में एक साझा समझ (Joint Understanding) विकसित करना है। साथ ही, ऐसे मुद्दों पर गंभीर और सूझबूझ भरी चर्चाओं को बढ़ावा देना है जो आने वाले समय में भविष्य के रणक्षेत्र और युद्ध की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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