FY27 में राजकोषीय घाटा 1.2 लाख करोड़ बढ़ने का अनुमान, GDP का 4.7% रह सकता है: SBI रिसर्च
नई दिल्ली: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा बजट में तय अनुमान से करीब 1.2 लाख करोड़ रुपये अधिक हो सकता है। सब्सिडी पर बढ़ते खर्च और टैक्स से होने वाली कम कमाई के कारण सरकारी वित्त पर दबाव बढ़ने की आशंका है। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 4.7 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जबकि बजट में इसके 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। SBI रिसर्च ने इस अंतर के पीछे संरचनात्मक कारणों और संशोधित GDP आधार के प्रभाव को भी जिम्मेदार बताया है। संशोधित अनुमान में 2022-23 के GDP आधार का इस्तेमाल किया गया है, जबकि बजट अनुमान 2011-12 के आधार पर तैयार किया गया था।
सब्सिडी और एक्साइज ड्यूटी में कटौती से बढ़ेगा दबाव
SBI रिसर्च के अनुसार, राजकोषीय घाटे पर पड़ने वाले संभावित अतिरिक्त दबाव में एक्साइज ड्यूटी में कटौती से होने वाला करीब 1.1 लाख करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान शामिल है। इसके अलावा, उर्वरक सब्सिडी पर लगभग 90 हजार करोड़ रुपये और पेट्रोलियम व LPG सब्सिडी पर करीब 48 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च होने का अनुमान है।
खर्च में कटौती से घाटे को संभाल सकती है सरकार
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार अतिरिक्त उधारी बढ़ाए बिना मजबूत नकदी भंडार और खर्च में कटौती के जरिए बढ़ते राजकोषीय घाटे को संभाल सकती है। SBI रिसर्च ने कहा, "सरकार के पास बजट अनुमान के भीतर राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने का एकमात्र व्यावहारिक विकल्प खर्च में कटौती करना है।" रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में खर्च में औसतन करीब 45 हजार करोड़ रुपये की कटौती की गई है। रिपोर्ट के अनुमान के मुताबिक, अक्टूबर 2026 के अंत में सरकार का नकदी भंडार, मुख्य तरलता के लिए समायोजन के बाद, करीब 8.5 लाख करोड़ रुपये रह सकता है। एक साल पहले यह लगभग 2.2 लाख करोड़ रुपये था। हालांकि, मार्च 2027 के अंत तक इसके घटकर करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
स्विच और बायबैक से उधारी में 1.23 लाख करोड़ की कमी
रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी प्रतिभूतियों की अदला-बदली (स्विच) और बायबैक के कारण सरकार की उधारी पहले ही 1.23 लाख करोड़ रुपये कम हो चुकी है। इससे चालू वित्त वर्ष के लिए उधारी का अनुमान बजट में तय 17.2 लाख करोड़ रुपये से घटकर 15.97 लाख करोड़ रुपये रह गया है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही के आंकड़ों में भी सरकारी वित्त पर दबाव दिखाई दिया है। इस दौरान राजकोषीय घाटा सालाना आधार पर 24.7 प्रतिशत बढ़कर 7.14 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं, कुल सरकारी खर्च में 10.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि राजस्व प्राप्तियां केवल 3.6 प्रतिशत बढ़ीं।
GST और विनिवेश से राहत की उम्मीद
SBI रिसर्च को उम्मीद है कि वस्तु एवं सेवा कर (GST) से होने वाली कमाई में मजबूत वृद्धि, विनिवेश से ज्यादा राजस्व और पूंजीगत खर्च में थोड़ी कटौती से अतिरिक्त वित्तीय दबाव को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में रखने के लिए खर्च में उचित कटौती करना सरकार के लिए एक अहम विकल्प बना रहेगा।
(ANI)
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