भारत जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की चौथी सबसे

देश में अमीर - गरीब के बीच खाई और चौड़ी हुई

India wealth gap widens

दो-तिहाई संपत्ति सिर्फ 10% के पास

भारत जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन रहा है। लेकिन भारत की कुल संपत्ति का बड़ा हिस्सा मुट्ठीभर लोगों के पास है। भारत में अमीर और गरीब के बीच की खाई (असमानता) कम होने के बजाय बढ़ रही है। देश की कुल संपत्ति का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा शीर्ष 10 प्रतिशत लोगों के पास है। जबकि नीचे के 50 प्रतिशत लोगों के हिस्से में केवल 6.4 प्रतिशत संपत्ति ही है।

वर्ल्ड इनइक्वलिटी रिपोर्ट में खुलासा

भारत में संपत्ति के असमान बटवारे को लेकर बुधवार को जारी "वर्ल्ड इनइक्वलिटी रिपोर्ट" में आय असमानता पर चौंकाने वाला खुलासा किया गया है। भारत की संपत्ति पर गहरी असमानता साफ नजर आती है। भारत में बेशुमार दौलत है, लेकिन इसका बंटवारा इतना असमान है कि अब यह दुनिया के सबसे असमान देशों में गिना जाने लगा है।

सिर्फ 1% के पास 40% दौलत

वर्ल्ड इनइक्वलिटी रिपोर्ट 2026 के अनुसार, भारत में सिर्फ़ 1 फीसदी लोगों के पास देश की कुल संपत्ति का लगभग 40 फीसदी हिस्सा है, जिससे भारत में आय असमानता दुनिया में सबसे ज़्यादा में से एक है और इसमें "बहुत कम सुधार" के आसार दिख रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत संपत्ति के असमान बंटवारे के मामले में भी दुनिया में शीर्ष पर है।

टॉप 10% कमाने वाले राष्ट्रीय आय का 58% हिस्सा रखते हैं

अर्थशास्त्रियों लुकस चांसल, रिकाडों गोमेज कारेरा, रोर्वदा मोशरिफ और थॉमस पिकेटी द्वारा संपादित रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि देश की 40% दौलत सिर्फ 1% अत्यधिक धनाढ्य लोगों के पास है। आय असमानता के मामले में रिपोर्ट कहती है कि देश में शीर्ष 10 प्रतिशत कमाने वाले राष्ट्रीय आय का 58 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं, जबकि नीचे के 50 प्रतिशत को केवल 15 प्रतिशत मिलता है। इस मामले में बीते 10 साल से कोई सुधार नहीं हुआ है।

10 साल में फर्क और बढ़ा

रिपोर्ट के मुताबिक, 2014 से 2024 के बीच देश के टॉप 10% अमीरों और धन-दौलत के मामले में निचले पायदान के 50% लोगों के बीच आय का फर्क 38% से बढ़कर 38.2% हो गया।

औसत भारतीय की आय और संपत्ति

रिपोर्ट कहती है कि औसत भारतीय (इसमें मुकेश अंबानी और गौतम अदाणी जैसे बेहिसाब दौलत वाले लोग भी शामिल हैं) की सालाना आय 6.5 लाख रुपए है। इनके पास औसतन 29.3 लाख रुपए की संपत्ति है। लेकिन नौकरी में महिलाओं की हिस्सेदारी सिर्फ 15.7% है। बीते 10 साल में इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं हुई।

अमीर और कार्बन उत्सर्जन

दुनिया में लगातार प्रदूषित होती जलवायु के लिए अमीर ही जिम्मेदार हैं। सबसे गरीब आधी आबादी कार्बन उत्सर्जन का सिर्फ 3% हिस्सा छोड़ती है, जबकि ऊपर के 10% लोग 77% उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है।

वैश्विक स्थिति भी चिंताजनक

अमीरी-गरीबी के मामले में वैश्विक स्थिति ज्यादा खराब है। दुनिया के सिर्फ 60 हजार लोग यानी कुल आबादी का 0.001% के पास उतनी दौलत है, जितनी पूरी दुनिया की आधी आबादी के पास भी नहीं है। 1995 में इन सुपर-अमीरों के पास कुल वैश्विक दौलत का 3.8% था, जो 2025 में बढ़कर 6.1% हो गया। वहीं कुल दौलत में सबसे कम आय वाली आधी आबादी की हिस्सेदारी साल 2000 के बाद से 2% के आसपास ही अटका हुआ है।

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