राजकोषीय घाटे पर सरकार का भरोसा, 4.3% लक्ष्य हासिल करने की उम्मीद
नई दिल्ली: गोल्डमैन सैक्स रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार FY27 के लिए GDP के 4.3 परसेंट के अपने फिस्कल डेफिसिट टारगेट को पूरा कर सकती है। भले ही पहले छह महीनों में डेफिसिट पूरे साल के अनुमान का 42.6 परसेंट तक पहुंच गया हो, क्योंकि मजबूत कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन रेवेन्यू के दबाव को कम करने में मदद कर रहे हैं। फर्म ने कहा कि सरकार खर्च को फिर से प्राथमिकता देकर टारगेट हासिल कर सकती है, भले ही ज़्यादा ब्याज पेमेंट और कैपिटल खर्च से उसके फाइनेंस पर दबाव पड़े। इसने फर्टिलाइजर सब्सिडी में संभावित बढ़ोतरी और अगर ग्लोबल कमोडिटी की कीमतें ऊंची रहती हैं तो फ्यूल एक्साइज ड्यूटी में अतिरिक्त राहत के जोखिमों को भी बताया।
सरकार 4.3% घाटे का लक्ष्य रखेगी बरकरार
रिपोर्ट में कहा गया है, हमें उम्मीद है कि केंद्र सरकार GDP के 4.3% फिस्कल डेफिसिट टारगेट पर टिकी रहेगी। ऐसा शायद खर्च को फिर से प्राथमिकता देकर किया जाएगा। गोल्डमैन सैक्स ने अनुमान लगाया कि अप्रैल-सितंबर के दौरान फिस्कल डेफिसिट GDP का 3.9 परसेंट और पूरे साल के बजट अमाउंट का 42.6 परसेंट रहा, जो हाल के सालों के मुकाबले ज़्यादा है, हालांकि यह पैंडेमिक से पहले देखे गए लेवल से नीचे है। रिपोर्ट में सितंबर में हुए सुधार पर ज़ोर दिया गया, जब सरकार की फिस्कल पोजीशन बैलेंस्ड थी, जबकि अगस्त में यह 2.6 लाख करोड़ रुपये का डेफिसिट था। ज़्यादा डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन ने महीने के दौरान बढ़े हुए इंटरेस्ट पेमेंट और कैपिटल खर्च की भरपाई की। सितंबर में डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन साल-दर-साल 13 परसेंट बढ़ा, जिसकी वजह कॉर्पोरेट टैक्स रिसीट में 27 परसेंट की बढ़ोतरी थी, जबकि महीने के दौरान इनकम टैक्स कलेक्शन में 8 परसेंट की कमी आई।
मजबूत कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन से सरकार को राहत
फाइनेंशियल ईयर के दौरान अब तक कॉर्पोरेट टैक्स रिसीट खास तौर पर मज़बूत रही हैं, जो साल-दर-साल लगभग 22 परसेंट बढ़ी हैं, जबकि बजट में 12 परसेंट की ग्रोथ का अनुमान लगाया गया था। इनकम टैक्स रिसीट लगभग 9 परसेंट बढ़ीं, जो बजट में बताए गए 18 परसेंट के ग्रोथ अनुमान से कम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मज़बूत कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन पेट्रोल और डीज़ल ड्यूटी में कमी के बाद कम एक्साइज़ रिसीट के रेवेन्यू असर को कम करने में मदद कर रहे हैं। फाइनेंस मिनिस्ट्री के एक नोटिफिकेशन के मुताबिक, लेटेस्ट बदलाव में केंद्र ने पेट्रोल पर 2.5 रुपये प्रति लीटर एक्सपोर्ट ड्यूटी खत्म कर दी है, जबकि डीज़ल पर लेवी 8.5 रुपये से बढ़ाकर 11.5 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर 10.5 रुपये से बढ़ाकर 11 रुपये प्रति लीटर कर दी है।
महंगी ऊर्जा से बढ़ सकता है राजकोषीय घाटा
सितंबर में सीज़नली एडजस्टेड बेसिस पर कैपिटल एक्सपेंडिचर महीने-दर-महीने 17 परसेंट बढ़ा, लेकिन एक साल पहले की तुलना में 3 परसेंट कम रहा, जिसका मुख्य कारण सड़कों और हाईवे पर कम खर्च था। फाइनेंशियल ईयर-टू-डेट बेसिस पर कैपिटल एक्सपेंडिचर ग्रोथ 12.7 परसेंट पर मज़बूत रही। सितंबर में कुल सरकारी खर्च साल-दर-साल 12 परसेंट बढ़ा, जबकि सब्सिडी खर्च 31 परसेंट गिरा, जो कम फूड और फर्टिलाइज़र सब्सिडी को दिखाता है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि एनर्जी की ज़्यादा कीमतें, बढ़े हुए फर्टिलाइज़र सपोर्ट और फ्यूल टैक्स में और राहत के ज़रिए फिस्कल आउटलुक पर दबाव डाल सकती हैं, जिससे सालाना घाटे के टारगेट को पूरा करने की कोशिशें मुश्किल हो सकती हैं।
(इनपुट: ANI)
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