GST में बड़े बदलाव की तैयारी: गिरफ्तारी के प्रावधान होंगे खत्म, 90% रिफंड स्वतः मिलेगा
नई दिल्ली। आगामी 7 अक्टूबर को होने वाली 57वीं जीएसटी (GST) काउंसिल की बैठक में कर अनुपालन (Tax Compliance) को आसान बनाने के लिए कई बड़े और ऐतिहासिक बदलावों पर विचार किया जा सकता है। इन प्रस्तावों में जीएसटी कानून के तहत गिरफ्तारी के प्रावधानों को पूरी तरह समाप्त करना और जोखिम जांच (Risk Check) के बाद पात्र रिफंड दावों का 90 प्रतिशत हिस्सा अपने-आप जारी करना शामिल है, जिससे देश के हजारों कारोबारियों और निर्यातकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
गिरफ्तारी के प्रावधानों में बड़ी ढील
सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित अहम बदलावों में से एक जीएसटी के तहत गिरफ्तारी के प्रावधानों को पूरी तरह खत्म करना है। नए प्रस्तावित ढांचे के तहत, कर प्रवर्तन की कार्रवाई मुख्य रूप से दीवानी (सिविल) परिणामों जैसे कि कर वसूली, ब्याज और जुर्माने पर आधारित होगी, जबकि गंभीर मामलों में ही अभियोजन (प्रॉसिक्यूशन) की कार्रवाई जारी रहेगी। प्रस्तावों में अभियोजन शुरू करने की सीमा (थ्रेशोल्ड) को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने का भी प्रावधान है।
जीएसटी से जुड़े अपराधों की समीक्षा करने वाली एक विशेषज्ञ समिति ने 9 अपराधों को पूरी तरह से हटाने और एक अन्य को आंशिक रूप से हटाने का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा, 24 अपराधों को कम गंभीर बनाया जाएगा और 11 अपराधों को बरकरार रखा जाएगा। साथ ही, न्यूनतम सजा के प्रावधान को खत्म कर हर मामले में जुर्माने का विकल्प देने तथा मध्यम श्रेणी के अपराधों में अधिकतम सजा को 3 साल से घटाकर 2 साल करने का सुझाव दिया गया है।
निर्यातकों के लिए स्वचालित रिफंड प्रक्रिया
रिफंड प्रणाली में बड़ा सुधार करते हुए यह प्रस्ताव है कि जोखिम जांच के बाद 90 प्रतिशत पात्र रिफंड दावों को स्वचालित रूप से (ऑटोमैटिक) जारी कर दिया जाए, जबकि शेष राशि सत्यापन के बाद दी जाएगी। सूत्रों ने बताया कि रिफंड आवेदन मिलने की सूचना 10 दिनों के भीतर दी जाएगी। यदि संबंधित अधिकारी इस अवधि के भीतर कोई कार्रवाई नहीं करता है, तो आवेदन को स्वतः स्वीकृत मान लिया जाएगा।
इस उन्नत प्रणाली में सीमा शुल्क (कस्टम्स), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और अन्य स्रोतों से प्राप्त डेटा का उपयोग किया जाएगा, जिससे व्यवसायों को अलग से स्कैन किए गए दस्तावेज अपलोड करने की आवश्यकता नहीं होगी। रिफंड के दायरे को सेवाओं के साथ-साथ प्लांट और मशीनरी तक बढ़ाया जाएगा। प्लांट और मशीनरी पर रिफंड 5 साल की अवधि में मिलेगा। ड्यूटी ड्रॉबैक का लाभ लेने वाले निर्यातक भी रिफंड के पात्र होंगे और घरेलू कीमतों के खिलाफ मौजूदा सीमा (कैप) को हटा दिया जाएगा। इन प्रस्तावों से करीब 38,700 करदाताओं को सीधा लाभ मिलने की संभावना है।
छोटे कारोबारियों और नोटिसों पर राहत
व्यापक अनुपालन पैकेज के तहत यह भी प्रस्ताव रखा गया है कि विशिष्ट जीएसटी प्रावधानों के तहत 10,000 रुपये से कम की राशि के लिए कोई 'कारण बताओ नोटिस' (Show-cause Notice) जारी नहीं किया जाएगा। यह नियम पेंडिंग मामलों, अपीलों और ट्रिब्यूनल के स्तर पर लंबित मामलों पर भी लागू होगा। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2017 से इस सीमा या उससे कम राशि के लगभग 11.3 लाख नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जिनमें से 1.23 लाख मामलों में फैसले का इंतजार है और लगभग 11,800 मामले पहली अपील के चरण में हैं।
छोटे करदाताओं के लिए देर से रिटर्न दाखिल करने पर लगने वाली लेट फीस माफ करने और सामान्य पेनल्टी को तर्कसंगत बनाने के प्रस्ताव भी शामिल हैं। योग्य आवेदकों का जीएसटी रजिस्ट्रेशन तीन कार्यदिवसों के भीतर स्वतः पूरा हो सकता है।
दरों में बदलाव नहीं, अनुपालन पर जोर
काउंसिल व्यवसायों पर अनुपालन के बोझ को कम करने और प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए कई अन्य सुधारों पर भी विचार कर सकती है। सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान उपायों का मुख्य केंद्र जीएसटी दरों में फेरबदल करने के बजाय मौजूदा प्रावधानों को स्पष्ट करना और कर अनुपालन को अधिक पारदर्शी व सुगम बनाना है। हालांकि, ये सभी प्रस्ताव अंतिम निर्णय के लिए जीएसटी काउंसिल के विचाराधीन हैं। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)