सरकार बताए, लाड़ली लक्ष्मियों की पढ़ाई क्यों रुकी : हाईकोर्ट....
लाड़ली लक्ष्मियों की पढ़ाई क्यों रुकी : हाईकोर्ट
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सरकार से सवाल किया है कि लाड़ली लक्ष्मी योजना के शुरुआती बैच की हजारों लड़कियाँ स्कूल से कॉलेज पहुँचने से पहले ही शिक्षा से बाहर क्यों हो गईं। कोर्ट ने इसे गंभीर स्थिति बताते हुए राज्य योजनाओं की विफलता का संकेत माना है। साथ ही इस मामले को जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने के आदेश दिए हैं। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस विनोद कुमार की बेंच ने कहा कि शिक्षा का संवैधानिक अधिकार (अनुच्छेद 21-ए) सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
लक्ष्य पूरे नहीं हुए, सरकार को जवाबदेह बताया
कोर्ट ने कहा कि बड़ी राशि खर्च करने के बावजूद लक्ष्य हासिल नहीं हुआ। मुख्य सचिव सहित स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य, गृह, विधि और वित्त विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
फंड की कमी से कई योजनाएँ प्रभावित
कोर्ट ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस व न्यायालय से जुड़े कई प्रोजेक्ट फंड की कमी से प्रभावित हुए हैं, जो अत्यंत चिंताजनक है। अगली सुनवाई 12 जनवरी को होगी। इससे पहले सरकार को बताना होगा कि लाड़ली क्यों पढ़ाई छोड़ रही हैं और इसके समाधान क्या होंगे।
निजी स्कूल फीस विवाद पर हाईकोर्ट की टिप्पणी
इधर, जबलपुर हाईकोर्ट में निजी स्कूलों में फीस वृद्धि विवाद पर मंगलवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि यदि बच्चों को कम फीस में पढ़ाना है तो सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाया जा सकता है।
अभिभावकों का जवाब—बच्चों को कहाँ पढ़ाना है, यह हमारा अधिकार
अपीलकर्ता और हस्तक्षेपकर्ताओं ने कहा कि यह अभिभावकों का मौलिक अधिकार है कि वे अधिक फीस देकर भी बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ा सकें।
फीस वृद्धि की मनमानी पर आपत्ति
मध्यप्रदेश अभिभावक संघ की ओर से कहा गया कि हाईकोर्ट के 10% फीस वृद्धि के आदेश की गलत व्याख्या कर निजी स्कूल मनमानी बढ़ोतरी करते हैं। अभिभावक जरूरत के मुताबिक वैध फीस देने को तैयार हैं, लेकिन अनियंत्रित वृद्धि के विरोध में हैं।
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