कॉपरनिकस में जलवायु रणनीति प्रमुख सामंथा बर्गेस के

जुलाई की गर्मी-सूखे ने बढ़ाई चिंता, बाढ़ और पिघलती बर्फ ने दिए खतरे के संकेत

Heat, Drought and Floods Raise Climate Concerns

नई दिल्ली: कॉपरनिकस में जलवायु रणनीति प्रमुख सामंथा बर्गेस के मुताबिक, पश्चिमी यूरोप में लगातार तीसरे महीने असाधारण गर्मी रही और जून-जुलाई में पड़ी गर्मी ने संयुक्त रूप से नया रिकॉर्ड बना दिया। लंबे समय तक बने उच्च वायुदाब ने गर्मी को क्षेत्र में फंसा दिया और सूखे ने हालात को कहीं ज्यादा गंभीर बना दिया। उनके अनुसार, जैसे-जैसे मिट्टी सूखती है, उसकी प्राकृतिक ठंडक देने की क्षमता घटती जाती है, जिससे गर्मी और आसानी से जमा होती है। यही इस बदलती जलवायु की सबसे चिंताजनक तस्वीर है, गर्मी सूखे को बढ़ा रही है और सूखी जमीन गर्मी को और तेज कर रही है। इसी चक्र के बीच जंगलों में आग का खतरा बढ़ रहा है और जल स्रोत दबाव में आ रहे हैं।

कहीं बारिश तो कहीं बाढ़ बनी आफत

इसके विपरीत बाल्टिक देशों, फिनलैंड, तुर्की के कुछ हिस्सों, ग्रीस, पूर्वी यूक्रेन और पश्चिमी रूस के बड़े इलाकों में सामान्य से अधिक बारिश हुई। कुछ क्षेत्रों में बाढ़ और उससे जुड़ी त्रासदी की खबरें सामने आई हैं। ऐसा नहीं है कि चरम मौसम सिर्फ यूरोप तक सीमित है, यूरोप के बाहर भी मौसमी घटनाओं ने अपना रौद्र रूप दिखाया है। उत्तरी कनाडा, मध्य अमेरिका, हॉर्न ऑफ अफ्रीका, साइबेरिया, दक्षिण-मध्य एशिया, चीन के कुछ हिस्सों और अर्जेंटीना, उरुग्वे व बोलीविया के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश हुई। वहीं इसके उलट अमेरिका के पूर्वी हिस्से, उत्तरी मेक्सिको, अलास्का, कनाडा, पूर्वी रूस, अफगानिस्तान, उत्तरी भारतीय उपमहाद्वीप, पूर्वी चीन और जापान समेत कई इलाकों में सामान्य से अधिक बारिश हुई। अमेरिका, चिली, ब्राजील, अफगानिस्तान, भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, चीन और ताइवान में बाढ़ की विनाशकारी घटनाएं सामने आई हैं।

ध्रुवों की घटती बर्फ दे रही बड़े खतरे का संकेत

इस जलवायु संकट के संकेत समुद्र और जमीन के साथ ध्रुवों से भी मिले हैं। जुलाई के दौरान आर्कटिक समुद्री बर्फ का विस्तार इस महीने के रिकॉर्ड में छठा सबसे कम रहा। खासतौर पर स्वालबार्ड और फ्रांज जोसेफ लैंड के आसपास उत्तरी बारेंट्स सागर में बर्फ काफी कम रही। वहीं, अंटार्कटिका में समुद्री बर्फ का विस्तार जुलाई के लिए पांचवां सबसे कम रहा। अमुंडसेन सागर को छोड़कर अधिकांश समुद्री क्षेत्रों में बर्फ सामान्य से कम रही।

आने वाली पीढ़ियों के लिए चेतावनी

ऐसे में जुलाई 2026 का रिकॉर्ड हमें सिर्फ यह नहीं बताता कि धरती गर्म हो रही है, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि अगर हमने अब भी कदम नहीं उठाए, तो आने वाली पीढ़ियां हमें इस सवाल के साथ देखेंगी कि जब खतरा साफ दिखाई दे रहा था, तब हमने क्या किया?

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