होर्मुज में रुकावट भारत पर सीधा असर डाल रहा: राजनाथ
बर्लिन (जर्मनी)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की रुकावट भारत की आर्थिक स्थिति और स्थायित्व पर सीधा असर डालने वाली वास्तविक स्थिति है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में 50 दिनों से ज्यादा समय से संघर्ष जारी है और इसका वैश्विक स्तर पर प्रभाव भी पड़ रहा है।
जर्मन संसद में नई सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा
राजनाथ सिंह ने जर्मन संसद की रक्षा और सुरक्षा समिति को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया नए सुरक्षा खतरों का सामना कर रही है और तकनीक में बदलाव से स्थिति और जटिल हो गई है। उन्होंने कहा कि बदलते हालात के अनुरूप होने के साथ नया दृष्टिकोण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
भारत-जर्मनी रक्षा सहयोग को नई दिशा
रक्षा मंत्री ने भारत और जर्मनी के रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रक्षा उद्योग एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विकासशील देश के लिए ऊर्जा का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया पर निर्भर है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई भी बाधा सीधे असर डालती है। उन्होंने बताया कि भारत ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए सक्रिय रणनीति अपनाई है और समन्वित दृष्टिकोण पर काम कर रहा है।
रणनीतिक साझेदारी और आत्मनिर्भर भारत पर जोर
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर ने रणनीतिक साझेदारी पर जोर दिया है और यूरोपीय संघ के स्तर पर भी भारत के साथ सहयोग बढ़ रहा है। सिंह ने कहा कि आत्मनिर्मभर भारत केवल खरीद कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह सह-निर्माण, सह-विकास और सह-नवाचार का अवसर है।
एक-दूसरे के स्वाभाविक साझेदार हैं भारत और जर्मनी
उन्होंने कहा कि जर्मनी की बड़ी और मध्यम उद्योग कंपनियों की ताकत सराहनीय है और भारत के स्टार्टअप भी तेजी से रक्षा क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत और जर्मनी एक-दूसरे के स्वाभाविक साझेदार हैं और यह साझेदारी आगे और मजबूत हो सकती है।
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