'किसी भी कालखंड में नई चुनौतियां आती हैं तो..', अंतर्राष्ट्रीय आर्यन शिखर सम्मेलन 2025 में बोले पीएम मोदी
International Aryan Summit 2025 : पीएम मोदी ने शुक्रवार को कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती जी जानते थे कि अगर भारत को आगे बढ़ना है तो भारत को सिर्फ गुलामी की जंजीरें ही नहीं तोड़नी हैं. जिन जंजीरों ने हमारे समाज को जकड़ा हुआ था. उनको भी तोड़ना जरूरी था, इसलिए स्वामी दयानंद सरस्वती ने ऊंच-नीच, छुआछूत और भेदभाव का खंडन किया. पीएम मोदी दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय आर्यन शिखर सम्मेलन 2025 को संबोधित कर रहे थे.
'हमारा भारत कई मायनों में विशेष'
पीएम मोदी ने कहा कि हमारा भारत कई मायनों में विशेष है. ये धरती, इसकी सभ्यता, इसकी वैदिक परंपरा, ये युगों-युगों से अमर है, क्योंकि किसी भी कालखंड में जब नई चुनौतियां आती हैं, समय नए सवाल पूछता है तो कोई न कोई महान विभूति उनके उत्तर लेकर अवतरित हो जाती है. कोई न कोई ऋषि, महर्षि और मनीषी हमारे समाज को नई दिशा दिखाते हैं. दयानन्द सरस्वती भी इसी विराट परंपरा के महर्षि थे.
आर्य समाज अपनी स्थापना से लेकर आज तक प्रबल राष्ट्रभक्तों की संस्था
आर्य समाज अपनी स्थापना से लेकर आज तक प्रबल राष्ट्रभक्तों की संस्था रही है. आर्य समाज निर्भीक होकर भारतीयता की बात करने वाली संस्था रही है. भारत विरोधी कोई भी सोच हो, विदेशी विचारधाराओं को थोपने वाले लोग हों, विभाजनकारी मानसिकता हो, सांस्कृतिक प्रदूषण के दुष्प्रयास हो, आर्य समाज ने हमेशा इनको चुनौती दी है. मुझे संतोष है कि आज जब आर्य समाज और उसकी स्थापना के 150 वर्ष हो रहे हैं तो समाज और देश दयानन्द सरस्वती जी के महान विचारों को इस विराट स्वरूप में नमन कर रहा है.
पीएम मोदी ने कहा कि गत वर्ष गुजरात में दयानन्द सरस्वती जी के जन्मस्थान पर विशेष कार्यक्रम हुआ था. इसके पहले यहां दिल्ली में ही मुझे महर्षि दयानन्द सरस्वती जी की 200वीं जयंती समारोह के शुभारंभ का सौभाग्य मिला था. तब उस आयोजन में हम सबने 200वीं जयंती के समारोह को एक विचार यज्ञ के रूप में 2 वर्ष तक जारी रखने का फैसला किया था. मुझे खुशी है कि वो अखंड विचार यज्ञ अनवरत दो वर्ष तक चला है. मैं स्वामी दयानन्द सरस्वती के चरणों में प्रणाम करता हूं और उन्हें आदरपूर्वक श्रद्धांजलि देता हूं.
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