भारत और दक्षिण कोरिया रक्षा और साइबर क्षेत्र में बढ़ाएंगे सहयोग
सियोल (दक्षिण कोरिया)। द्विपक्षीय सुरक्षा संबंधों को मजबूती प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत और दक्षिण कोरिया ने मंगलवार को रक्षा, साइबर और रक्षा सूचना जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
साइबर और रक्षा सूचना साझेदारी पर फोकस
यह समझौता रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की सियोल की आधिकारिक यात्रा के दौरान दक्षिण कोरियाई रक्षामंत्री आन ग्यू-बैक की उपस्थिति में हुआ। यह समझौता ज्ञापन आधुनिक युद्ध और खुफिया चुनौतियों को विशेष रूप से ध्यान ध्यान में करते हुए नई दिल्ली और सियोल के बीच रणनीतिक जुड़ाव को और गहरा बनाता है। समझौते में उल्लेखित सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में उभरते साइबर खतरों का मुकाबला करना, महत्वपूर्ण सैन्य बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करना, डिजिटल रक्षा में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना और स्थितिजन्य जागरूकता और क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए सूचना साझाकरण के उद्देश्य से संस्थागत तंत्रों को मजबूत करना शामिल है।
राजनाथ सिंह ने सैनिकों को दी श्रद्धांजलि
हस्ताक्षर समारोह से पहले, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने उन दक्षिण कोरियाई सैनिकों और महिलाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने देश के लिए, विशेष रूप से कोरियाई युद्ध के दौरान, अपने प्राणों की आहुति दी। सिंह ने राष्ट्रीय स्मारक स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित की और मौन धारण किया, जो दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक और भावनात्मक संबंधों को दर्शाता है।
दो देशों की यात्रा का दूसरा चरण सियोल में
दक्षिण कोरिया का यह दौरा भारतीय रक्षामंत्री की 18 से 21 मई तक चलने वाली दो देशों की उच्चस्तरीय यात्रा का दूसरा चरण है। पहला चरण 18-19 मई को दक्षिण पूर्व एशियाई सुरक्षा समीकरणों को मजबूत करने के लिए वियतनाम की आधिकारिक यात्रा थी। दूसरा चरण 19-21 मई को दक्षिण कोरिया की यात्रा थी, जिसकी शुरुआत मंगलवार को सियोल पहुंचने पर हुई, जहां दक्षिण कोरिया में भारत के राजदूत गौरांगलाल दास और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और सहयोग पर जोर
राजनयिख प्रयासों के पीछे व्यापक दृष्टिकोण का विस्तार से उल्लेख किया। राजनाथ सिंह ने कहा, 'मैं रणनीतिक सैन्य सहयोग को गहरा करने, रक्षा औद्योगिक साझेदारी को मजबूत करने और समुद्री सहयोग को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करूंगा, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।'
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