UN में भारत का दोटूक संदेश, जम्मू-कश्मीर को बताया आंतरिक मामला; पुराने मध्यस्थता ढांचों की समीक्षा की मांग
न्यूयॉर्क (अमेरिका): संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश परवथानेनी ने मंगलवार (स्थानीय समय) को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की अरिया-फॉर्मूला बैठक में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VI के तहत बने पुराने मध्यस्थता ढांचों की समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने जम्मू-कश्मीर को भारत का आंतरिक मामला बताते हुए पाकिस्तान की टिप्पणियों को खारिज कर दिया।
अध्याय VI और VII के बीच अंतर किया स्पष्ट
बैठक के दौरान परवथानेनी ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VI और अध्याय VII की प्रकृति और उनके अलग-अलग उद्देश्यों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दोनों अध्यायों की भूमिका और प्रयोज्यता अलग-अलग है। उन्होंने बताया कि अध्याय VII उन परिस्थितियों से जुड़ा है, जहां शांति को खतरा हो, शांति भंग हुई हो या आक्रामकता की स्थिति पैदा हुई हो। ऐसे मामलों में ठोस कार्रवाई की आवश्यकता होती है और इसमें देरी या विफलता गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।
बदलते हालात के साथ बदलने चाहिए ढांचे
अध्याय VI का जिक्र करते हुए भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि यह विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए वार्ता, जांच, मध्यस्थता और सुलह जैसे कई विकल्प प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मध्यस्थता ढांचे किसी विशेष समय और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किए जाते हैं, इसलिए बदलते वैश्विक हालात के अनुरूप उनकी समीक्षा भी जरूरी है। उनके अनुसार, इन व्यवस्थाओं को स्थायी या हमेशा के लिए लागू मानना उचित नहीं है।
फिलिस्तीन मुद्दे का दिया उदाहरण
परवथानेनी ने कहा कि फिलिस्तीन का मुद्दा इसका एक प्रमुख उदाहरण है, जहां बदलती परिस्थितियों के अनुसार मध्यस्थता के तौर-तरीकों में लगातार बदलाव किए जाते रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पुराने मध्यस्थता ढांचों की समीक्षा करने के लिए पर्याप्त और मजबूत कारण मौजूद हैं।
UN80 ढांचे का भी किया उल्लेख
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि जब सदस्य देश संयुक्त राष्ट्र महासभा के विभिन्न आदेशों और कार्यक्रमों की समीक्षा UN80 ढांचे के तहत कर रहे हैं, तो सुरक्षा परिषद के आदेशों को इस प्रक्रिया से बाहर रखने का कोई औचित्य नहीं है।
पाकिस्तान की टिप्पणी पर भारत का जवाब
बैठक के दौरान पाकिस्तान के प्रतिनिधि की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए परवथानेनी ने कहा कि जिस मंच पर निष्पक्षता और तटस्थता की अपेक्षा की जाती है, वहां राजनीतिक एजेंडा चलाने का प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश भारत का आंतरिक मामला है। यह हमेशा से भारत का हिस्सा था, है और रहेगा।"
शांतिपूर्ण समाधान और सुरक्षा पर केंद्रित रही चर्चा
गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अध्याय VI विवादों के शांतिपूर्ण समाधान से संबंधित है, जबकि अध्याय VII शांति के लिए खतरे, शांति भंग और आक्रामकता जैसी स्थितियों में कार्रवाई का प्रावधान करता है। बैठक में इन दोनों अध्यायों की भूमिका और वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में उनकी प्रासंगिकता पर चर्चा हुई।
एएनआई
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