भारत ने 36 देशों से वापस लाए 274 भगोड़े अपराधी, PMLA के तहत जब्त हुई 17,874 करोड़ की संपत्ति
नई दिल्ली (भारत)। गृह मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि 2019 से 2026 के बीच भारत ने 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को वापस लाया है। मंत्रालय के अनुसार, इन अपराधियों में आतंकवाद, संगठित अपराध, वित्तीय धोखाधड़ी, मादक पदार्थों की तस्करी, हत्या, बलात्कार और पॉक्सो जैसे गंभीर मामलों में वांछित आरोपी शामिल थे। इस अवधि में PMLA के तहत 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त की गई।
PMLA के तहत 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त
मंत्रालय के अनुसार, 2019 से 2026 के बीच PMLA के तहत भगोड़े अपराधियों से जुड़ी 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई, जबकि आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों में 18,762 करोड़ रुपये की राशि वापस प्राप्त की गई। इसी अवधि में इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने में भी तेजी आई। 2022 में 40, 2023 में 100, 2024 में 107, 2025 में 112 और 2026 में अब तक 182 नोटिस जारी किए गए, जबकि पिछले तीन वर्षों में कुल 501 रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुए।
भारत 36 देशों से 274 भगोड़े को वापस लाने में सफल
गृह मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2019 से जुलाई 2026 तक भारत 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को वापस लाने में सफल रहा। इनमें जुलाई 2026 तक 45, वर्ष 2025 में 70, 2024 में 43, 2023 में 37, 2022 में 40, 2021 में 23, 2020 में सात और 2019 में नौ भगोड़ों को भारत लाया गया। ये आरोपी आतंकवाद, वित्तीय अपराध, हत्या, बलात्कार, पॉक्सो, मादक पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध, साइबर अपराध, मानव तस्करी और अन्य गंभीर मामलों में वांछित थे।
भगोड़ों के खिलाफ पहले से कई संगीन मामले दर्ज
मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वापस लाए गए 274 भगोड़ों में 62 हत्या, डकैती और हिंसक अपराधों, 53 यौन अपराध, बलात्कार और पॉक्सो, 42 संगठित अपराध और जबरन वसूली, 18 मानव तस्करी व अपहरण, 17 आतंकवाद और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों, 16 मादक पदार्थों से जुड़े अपराध, 12 तस्करी, नकली मुद्रा और साइबर अपराध तथा नौ वित्तीय अपराधों के मामलों में वांछित थे।
भगोड़ों की वापसी में भारत की बढ़ी सफलता और नए कानूनों का योगदान
गृह मंत्रालय के अनुसार, 2019 से अब तक 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। मंत्रालय का कहना है कि 2018 में लागू भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, तकनीक आधारित निगरानी और एजेंसियों के बेहतर समन्वय से प्रत्यर्पण प्रक्रिया को गति मिली है।
2004-2013 के दौरान धीमी थी भगोड़ों के प्रत्यर्पण की रफ्तार
मंत्रालय के मुताबिक, 2004 से 2013 के बीच औसतन हर साल केवल चार भगोड़ों का प्रत्यर्पण हो सका और 110 मामले लंबित रहे। अधूरे दस्तावेज, कानूनी अड़चनें और एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी के कारण कई प्रत्यर्पण अनुरोध विदेशी अदालतों में खारिज हो जाते थे।
भगोड़ों के प्रत्यर्पण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाकर तेज किए गए प्रयास
गृह मंत्रालय ने कहा कि भगोड़ों के प्रत्यर्पण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाते हुए वैश्विक सहयोग, एजेंसियों के बेहतर समन्वय और कूटनीतिक प्रयासों को मजबूत किया गया है। मंत्रालय के अनुसार, 2019 से 2026 के बीच PMLA के तहत भगोड़ों से जुड़ी 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है।
CBI ने भगोड़ों की तलाश के लिए बनाया विशेष वैश्विक अभियान केंद्र
मंत्रालय ने बताया कि CBI ने भगोड़ों का पता लगाने और गिरफ्तारी के लिए एक विशेष वैश्विक अभियान केंद्र स्थापित किया है, जो इंटरपोल के माध्यम से विभिन्न देशों की पुलिस एजेंसियों के साथ रीयल-टाइम समन्वय कर उनकी ट्रैकिंग और प्रत्यर्पण प्रक्रिया को तेज करता है।
इंटरपोल संपर्क अधिकारियों से अंतरराष्ट्रीय जांच में बढ़ा समन्वय
सूचना के त्वरित आदान-प्रदान को सुगम बनाने के लिए, गृह मंत्रालय ने कहा कि सीबीआई ने प्रत्येक राज्य के साथ-साथ सभी केंद्रीय जांच एजेंसियों में इंटरपोल संपर्क अधिकारी नियुक्त किए हैं, जिससे भगोड़ों की जांच में समन्वय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि हाल के वर्षों में जारी किए गए इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिसों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
ऑपरेशन त्रिशूल से डिजिटल तकनीक के जरिए भगोड़ों की तलाश तेज
मंत्रालय के अनुसार, भगोड़े अपराधियों का पता लगाने के लिए ऑपरेशन त्रिशूल शुरू किया गया, जिसके तहत इंटरपोल के सहयोग से उपग्रह इनपुट, निगरानी और डिजिटल फुटप्रिंट विश्लेषण के जरिए फरार आरोपियों का पता लगाया गया। उन्नत तकनीक और प्रोफाइल मैपिंग से बदली हुई पहचान वाले भगोड़ों की भी पहचान की गई, जबकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी तकनीकों से प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया को तेज किया गया।
तहव्वुर राणा प्रत्यर्पण भारत के कड़े प्रयासों का उदाहरण
अमेरिका से तहव्वुर हुसैन राणा का प्रत्यर्पण जटिल आतंकी मामलों को सुलझाने में भारत के संकल्प और निरंतर कानूनी और राजनयिक प्रयासों का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। जम्मू और कश्मीर से जुड़े मामलों में, विदेशों से भागे हुए अपराधियों का इस्तेमाल आतंकवाद, नशीले पदार्थों से जुड़े आतंकवाद और सीमा पार सहायता नेटवर्क को बढ़ावा देने के लिए किया जाता रहा है।
भगोड़ों की वापसी में कानूनी तैयारी और कूटनीतिक प्रयासों की भूमिका
गृह मंत्रालय ने कहा कि भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाने में मिली सफलता संयोगवश नहीं, बल्कि विश्वसनीयता, गहन कानूनी तैयारी, निरंतर कूटनीतिक प्रयासों और लगातार निगरानी का परिणाम है।
कई केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के समन्वय से संभव हुई कार्रवाई
"घरेलू स्तर पर, यह प्रयास खुफिया ब्यूरो (आईबी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), अनुसंधान एवं विश्लेषण विंग (आर एंड एडब्ल्यू), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), विदेश मंत्रालय (एमईए), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), वस्तु एवं सेवा कर खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) और राज्य पुलिस बलों के बीच घनिष्ठ समन्वय से संभव हुआ है। यह एक सच्चे 'समग्र सरकारी' दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें केंद्र और राज्य एजेंसियां भगोड़े अपराधियों की वापसी सुनिश्चित करने और पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए घनिष्ठ समन्वय से काम करती हैं।"
मल्टी एजेंसी सेंटर के स्थायी फोकस समूह से मजबूत होगा भगोड़ा प्रबंधन ढांचा
जनवरी 2026 में इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के मल्टी एजेंसी सेंटर (एमएसी) के तहत एक स्थायी फोकस समूह का गठन भारत के भगोड़ा प्रबंधन ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संस्थागत कदम है। इसमें आगे कहा गया है, "यह समूह भगोड़ा मामलों को प्राथमिकता देने, फाइलों को मानकीकृत करने, सूचनाओं की कमी को दूर करने, विदेशी भागीदारों के साथ निरंतर अनुवर्ती कार्रवाई सुनिश्चित करने और राज्य एजेंसियों द्वारा शुरू किए गए मामलों को राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन प्रदान करने के लिए जिम्मेदार है।"
विदेश में सक्रिय भगोड़े अपराधियों को बताया गया सक्रिय खतरा
इसमें आगे कहा गया है, "विदेश से सक्रिय होकर अपराध करने वाले भगोड़े निष्क्रिय मामले नहीं हैं - वे सक्रिय खतरे हैं जिनके लिए निरंतर, समन्वित और सक्रिय कार्रवाई की आवश्यकता है।" (Source: ANI)
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