उच्च वृद्धि वाले राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक वाहन (NEV) प

भारत में EV बाजार 2032 तक 12 गुना बढ़कर 3.04 करोड़ यूनिट पहुंचने का अनुमान: रिपोर्ट

India EV Market to Grow 12X by 2032

नई दिल्ली [भारत]: उच्च वृद्धि वाले राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक वाहन (NEV) परिदृश्य के तहत भारत का इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बाजार 2032 तक 12 गुना बढ़कर 3.04 करोड़ (30.4 मिलियन) यूनिट तक पहुंचने का अनुमान है। कस्टमाइज्ड एनर्जी सॉल्यूशंस द्वारा तैयार की गई इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस (IESA) की रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया है।

2025 में EV बिक्री में 26 फीसदी की बढ़ोतरी

रिपोर्ट के अनुसार, भारत के EV बाजार में मजबूत वृद्धि दर्ज की जा रही है। वार्षिक बिक्री 2024 में 20 लाख यूनिट से बढ़कर 2025 में 26 लाख यूनिट हो गई, जो करीब 26 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों से इलेक्ट्रिक वाहनों की लागत प्रतिस्पर्धी बन रही है। वहीं, लंबी रेंज वाले स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (SUV) और नए मॉडलों की लॉन्चिंग से उपभोक्ताओं का आकर्षण बढ़ रहा है।

कुल वाहन बिक्री में बढ़ी EV की हिस्सेदारी

रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत में कुल वाहन बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी लगभग 9.5 प्रतिशत रही, जबकि 2024 में यह 8.1 प्रतिशत थी। यह बाजार के तेजी से विद्युतीकरण की दिशा में बढ़ते बदलाव को दर्शाता है। 2025 में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों (E2W) की बिक्री में 60.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि इलेक्ट्रिक तीनपहिया वाहनों (E3W) की हिस्सेदारी 31.6 प्रतिशत रही। दोनों श्रेणियों ने मिलकर कुल EV बिक्री में 91 प्रतिशत से अधिक योगदान दिया।

चारपहिया EV और इलेक्ट्रिक बसों की मांग भी बढ़ी

रिपोर्ट के मुताबिक, इलेक्ट्रिक चारपहिया वाहनों (E4W) की हिस्सेदारी बढ़कर 7.7 प्रतिशत हो गई, जो यात्री वाहनों में EV अपनाने की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाती है। वहीं, सार्वजनिक खरीद कार्यक्रमों और फ्लीट ऑपरेटरों के सहयोग से इलेक्ट्रिक बसों की हिस्सेदारी 0.2 प्रतिशत और ट्रकों की हिस्सेदारी 0.4 प्रतिशत रही।

बैटरी की मांग 19 GWh से बढ़कर 362 GWh होने का अनुमान

रिपोर्ट में कहा गया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने और बैटरी पैक के औसत आकार में वृद्धि के कारण बैटरी की मांग भी तेजी से बढ़ेगी। इसके 2025 के लगभग 19 गीगावाट-घंटे (GWh) से बढ़कर 2032 तक 362 GWh तक पहुंचने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, 2029 के बाद सामान्य उपयोग (BAU) और राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक वाहन (NEV) परिदृश्यों के बीच बढ़ता अंतर इस बात को दर्शाता है कि भारत की EV प्रगति काफी हद तक सरकारी नीतियों, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और स्थानीय विनिर्माण की गति पर निर्भर करेगी।

चारपहिया वाहन बैटरी खपत में सबसे आगे

2025 में कुल बैटरी मांग लगभग 19 GWh रही, जो 2024 के 13 GWh से काफी अधिक है। बैटरी खपत में चारपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत रही, जबकि तीनपहिया वाहनों की 27 प्रतिशत और दोपहिया वाहनों की 23 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। बसों की बैटरी मांग में 7.8 प्रतिशत और ट्रकों की 1.9 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की गई।

EV कंपोनेंट बाजार 2032 तक 3.02 लाख करोड़ रुपये का हो सकता है

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का इलेक्ट्रिक वाहन कंपोनेंट बाजार 2025 में 41,000 करोड़ रुपये का था। बिजनेस-एज़-यूज़ुअल (BAU) परिदृश्य के तहत इसके 2032 तक बढ़कर 3.02 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जो लगभग 38 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) को दर्शाता है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 तक बैटरी पैक का बाजार में 52 प्रतिशत, मोटर्स का 22 प्रतिशत, इनवर्टर का 12 प्रतिशत, बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) का 11 प्रतिशत और DC-DC कन्वर्टर्स का 3 प्रतिशत हिस्सा रहेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में मोटर और कंट्रोलर का स्थानीयकरण अभी 30-40 प्रतिशत के बीच है, जबकि इनवर्टर की आपूर्ति श्रृंखला अब भी आयात पर काफी निर्भर है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 से 2032 के बीच बनने वाले 2.61 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त बाजार का सबसे अधिक लाभ उन कंपनियों को मिलेगा, जो समय रहते पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और ड्राइवट्रेन के घरेलू विनिर्माण में निवेश करेंगी।

(एएनआई)

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