एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तेजी से बदलते भू-राजनीति

India-Japan Summit:PM मोदी और जापानी पीएम साने ताकाइची की मुलाकात, रणनीतिक और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर

Modi, Takaichi Deepen India-Japan Strategic Partnership

नई दिल्ली। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तेजी से बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत और जापान ने अपने 'विशेष रणनीतिक और वैश्विक गठबंधन' को नया विस्तार देना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी जापानी समकक्ष साने ताकाइची (Sanae Takaichi) ने गुरुवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्तर की द्विपक्षीय वार्ता की। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना है, जो हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र की स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

वैश्विक और रणनीतिक प्रभाव:

16वां भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन: जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची की यह तीन दिवसीय (1 से 3 जुलाई) भारत यात्रा द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा का एक बड़ा मंच है।

रणनीतिक और रक्षा तकनीक पर ध्यान: इस बैठक में समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) और रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है।

इंडस्ट्रियल वैल्यू चेन का निर्माण: बंगाल की खाड़ी और भारत के पूर्वोत्तर (Northeast) राज्यों को जोड़ने वाली एक महत्वाकांक्षी 'औद्योगिक मूल्य श्रृंखला' विकसित करने पर सहमति बनने के आसार हैं।

उच्च स्तरीय उपस्थिति: भारतीय प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और विदेश सचिव विक्रम मिस्री जैसी शीर्ष राजनयिक हस्तियां शामिल रहीं।

हैदराबाद हाउस में कूटनीतिक मंथन और सैन्य सम्मान

जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची की इस यात्रा की शुरुआत बेहद गरिमापूर्ण रही। हैदराबाद हाउस में मुख्य वार्ता से पहले, राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में जापानी प्रधानमंत्री का औपचारिक और सैन्य सम्मान के साथ स्वागत किया गया, जहाँ प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कैबिनेट सहयोगियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों से उनका परिचय कराया। यह शिखर सम्मेलन अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की टोक्यो (Tokyo) यात्रा के बाद हो रहा है, जो यह दर्शाता है कि दोनों देश वैश्विक मंच पर अपनी साझा प्राथमिकताओं को लेकर कितने गंभीर हैं। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में हुई बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और इंडो-पैसिफिक में मुक्त आवाजाही सुनिश्चित करने जैसे गंभीर वैश्विक मुद्दों पर गहन चर्चा हुई है।

विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस ऐतिहासिक स्वागत की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, "हमारी विशेष साझेदारी को और मजबूती मिल रही है। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची का राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में औपचारिक स्वागत किया गया। भविष्य के लिए यह साझेदारी विश्वास पर टिकी है और साझा मूल्यों पर आधारित है।"

आर्थिक और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी का नया रोडमैप

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, इस 16वें वार्षिक शिखर सम्मेलन के जरिए दोनों देशों को रणनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग की नई रूपरेखा तैयार करने का अवसर मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और बंगाल की खाड़ी के देशों को जोड़ने वाली 'इंडस्ट्रियल वैल्यू चेन' (Industrial Value Chain) परियोजना न केवल व्यापार को बढ़ावा देगी, बल्कि इस पूरे क्षेत्र में चीन के बढ़ते आर्थिक प्रभाव का एक मजबूत लोकतांत्रिक विकल्प भी पेश करेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: भारत और जापान के बीच हो रहे 16वें वार्षिक शिखर सम्मेलन का मुख्य एजेंडा क्या है? उत्तर: इस सम्मेलन का मुख्य एजेंडा भारत और जापान के बीच रणनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा सहयोग की समीक्षा करना है। इसमें विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा, रक्षा तकनीक और भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को बंगाल की खाड़ी से जोड़ने वाली इंडस्ट्रियल वैल्यू चेन के विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

प्रश्न 2: जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची की इस भारत यात्रा का वैश्विक महत्व क्या है? उत्तर: वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर बदलते सुरक्षा परिदृश्यों के बीच दोनों देशों का एक साथ आना इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच गहरे आपसी विश्वास और रणनीतिक कूटनीति की निरंतरता को दर्शाती है। (Source: ANI)

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