भारत-लिकटेंस्टीन ने की पहलगाम आतंकी हमले की निंदा, UNSC में भारत की दावेदारी का समर्थन करेगा यूरोपीय देश
नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय देश लिकटेंस्टीन ने सीमा पार आतंकवाद और अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की सख्त लहजे में निंदा की है। इसके साथ ही, लिकटेंस्टीन ने वर्ष 2028-29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अस्थायी सदस्यता के लिए भारत के दावे का समर्थन करने का फैसला किया है।
लिकटेंस्टीन के कार्यवाहक राष्ट्राध्यक्ष हेरेडिटरी प्रिंस (उत्तराधिकारी राजकुमार) एलॉइस की भारत की राजकीय यात्रा के दौरान दोनों देशों ने मंगलवार को एक संयुक्त बयान जारी कर इन अहम फैसलों की घोषणा की।
पहलगाम हमले पर सख्त रुख और आतंकी फंडिंग पर प्रहार
संयुक्त बयान के मुताबिक, दोनों देशों ने हर तरह के आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ की कड़े शब्दों में निंदा की। बयान में कहा गया, "दोनों पक्षों ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की निंदा की और पीड़ितों व उनके परिवारों के प्रति एकजुटता व्यक्त की। इसके साथ ही दोषियों को न्याय के कठघरे में लाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।" दोनों सरकारों ने वैश्विक स्तर पर टेरर फंडिंग (आतंकी वित्तपोषण) पर लगाम लगाने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया।
UNSC सदस्यता पर समर्थन और यूएन सुधारों पर सहमति
द्विपक्षीय वार्ता के दौरान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने को लेकर भी बातचीत हुई। संयुक्त बयान में कहा गया, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2028-29 के कार्यकाल के लिए UNSC में भारत की अस्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन करने के लिकटेंस्टीन के फैसले पर प्रिंस एलॉइस का आभार व्यक्त किया।"
दोनों नेताओं ने माना कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को अधिक समावेशी, पारदर्शी, लोकतांत्रिक और प्रभावी बनाने के लिए इसमें सुधार की सख्त जरूरत है। इस दिशा में 'UN80' जैसी पहलों के माध्यम से बहुपक्षीय संस्थानों को मजबूत करने के लिए दोनों देश मिलकर काम करेंगे।
AI गवर्नेंस, पीएम मोदी को न्योता और टैक्स समझौता
बयान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के नियमन पर भी चर्चा का उल्लेख है। दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि AI गवर्नेंस का आधार मानवाधिकारों सहित अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचा होना चाहिए, ताकि नागरिकों का सशक्तिकरण और सतत विकास सुनिश्चित किया जा सके।
वार्ता के अंत में प्रिंस एलॉइस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिकटेंस्टीन आने का औपचारिक निमंत्रण दिया।
वहीं, दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को मजबूती देने के लिए लिकटेंस्टीन ने 'डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट' (दोहरे कराधान से बचाव समझौता) का एक ड्राफ्ट भारत को सौंपा है। दोनों देश निवेशकों और कारोबारियों को कानूनी स्थिरता देने के उद्देश्य से इस समझौते की समीक्षा करने पर सहमत हुए हैं। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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