भारत में नॉर्वे की राजदूत मेय-एलिन स्टेनर ने मंगलव

समुद्री सहयोग में भारत के लिए सेतु बन सकता है नॉर्वे, स्कैंडिनेवियाई और नॉर्डिक देशों से रिश्ते होंगे मजबूत: राजदूत

India-Norway Maritime Ties Set to Strengthen

नई दिल्ली: भारत में नॉर्वे की राजदूत मेय-एलिन स्टेनर ने मंगलवार को कहा कि नॉर्वे समुद्री मुद्दों पर स्कैंडिनेवियाई और नॉर्डिक देशों के साथ भारत के जुड़ाव को मजबूत करने के लिए एक सेतु के रूप में कार्य कर सकता है। उन्होंने महासागर अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और समुद्री मामलों में सहयोग के अवसरों पर भी प्रकाश डाला। दिल्ली में इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग 2026 से इतर ANI से बातचीत में स्टेनर ने कहा कि नॉर्वे, जो हाल ही में इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव (IPOI) में शामिल हुआ है, महासागरों के हित में अनुसंधान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर काम कर रहा है।

समुद्री क्षेत्र में नॉर्वे की विशेषज्ञता भारत के लिए अहम

नॉर्वे की समुद्री ताकतों पर प्रकाश डालते हुए राजदूत ने कहा कि नॉर्वे स्कैंडिनेवियाई देशों में सबसे बड़ा समुद्री राष्ट्र है, जिसका अनन्य आर्थिक क्षेत्र भारत से थोड़ा बड़ा है। उन्होंने कहा कि हमारे व्यापक तट ने हमें जहाज निर्माण, अनुसंधान और महासागर-जलवायु अध्ययन में एक समुद्री नेता बना दिया है। उन्होंने आगे कहा कि नॉर्वे की समुद्री विशेषज्ञता भारत को अन्य नॉर्डिक देशों के साथ अपनी साझेदारी गहरी करने में मदद कर सकती है। स्टेनर के मुताबिक, नॉर्वे समुद्री मुद्दों पर स्कैंडिनेवियाई और नॉर्डिक देशों के साथ जुड़ने के लिए भारत के वास्ते एक सेतु के रूप में भी काम कर सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल मई में नॉर्वे का दौरा किया था और भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था, जहां समुद्री मुद्दे चर्चा के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल थे।

भारत-श्रीलंका के बीच समुद्री और सुरक्षा सहयोग पर जोर

इस संवाद को संबोधित करते हुए भारत में श्रीलंका की उच्चायुक्त महिशिनी कोलोंने ने भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री और सुरक्षा सहयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने जोर दिया कि दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र में साझा जिम्मेदारियां निभाते हैं। कोलोंने ने कहा कि हमारे राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आश्वासन दिया है कि श्रीलंका के क्षेत्र का इस्तेमाल किसी भी ऐसे तरीके से नहीं होने दिया जाएगा, जो भारत की सुरक्षा के प्रतिकूल हो। यह प्रतिबद्धता वैज्ञानिक सहयोग की नींव बनाती है।

भारतीय नौसेना की भूमिका की श्रीलंका ने की सराहना

इस बीच, श्रीलंकाई नौसेना के पूर्व कमांडर जयंत परेरा ने भारत और श्रीलंका के बीच मजबूत समुद्री साझेदारी पर प्रकाश डाला। उन्होंने आपात स्थितियों में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करने और तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए भारतीय नौसेना की सराहना की। बातचीत में परेरा ने कहा कि भारत और श्रीलंका की नौसेनाओं के बीच साझेदारी बहुत अच्छी है। भारतीय नौसेना ने उनकी काफी मदद की है और दोनों देश कई संयुक्त अभ्यास करते हैं। उन्होंने कहा कि जब भी कोई स्थिति या खतरा पैदा होता है, तो भारतीय नौसेना प्रतिक्रिया देने वाली सबसे पहली नौसेनाओं में से एक होती है। परेरा ने कहा कि यह सहयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी' को भी दर्शाता है। दोनों देशों के बीच मजबूत आपसी संबंध और मित्रता भी समुद्री सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

समुद्री सुरक्षा के लिए तकनीक और विज्ञान जरूरी

समुद्री सुरक्षा में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के महत्व पर परेरा ने तेजी से बदलते भू-राजनीतिक और तकनीकी घटनाक्रम के अनुरूप नौसैनिक बलों को तैयार करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भू-राजनीति और प्रौद्योगिकी दोनों तेजी से विकसित हो रही हैं। ऐसे में इन बदलावों के अनुकूल होना जरूरी है। भविष्य की समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीकी ज्ञान और विशेषज्ञता की आवश्यकता होगी। साथ ही युवा पीढ़ी को इन क्षमताओं से लैस करना भी महत्वपूर्ण है। समुद्री सुरक्षा की बदलती प्रकृति पर उन्होंने कहा कि पारंपरिक नौसेनाएं अब पर्याप्त नहीं हैं। आधुनिक नौसैनिक बलों को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम और उन्नत होना चाहिए।

इंडो-पैसिफिक डायलॉग में शैक्षणिक सहयोग पर विशेष ध्यान

इस बीच, बातचीत में नौसेना के पूर्व उप प्रमुख संजय महिंदु ने कहा कि इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग, इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव (IPOI) पर आधारित एक वार्षिक पहल है। इस साल के संस्करण में शैक्षणिक सहयोग को प्रमुखता दी गई है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य इंडो-पैसिफिक देशों के शैक्षणिक संस्थानों को एक मंच पर लाना है, ताकि वे भविष्य की क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग कर सकें, अपनी क्षमताओं और योग्यताओं को साझा कर सकें तथा सामूहिक ताकत विकसित कर सकें।

पनडुब्बी सहयोग और समुद्र के भीतर के क्षेत्र पर भी चर्चा

पनडुब्बियों और पानी के नीचे के क्षेत्र में सहयोग पर महिंदु ने कहा कि पनडुब्बियां आमतौर पर हर नौसेना का बेहद गोपनीय हिस्सा होती हैं। हालांकि, पानी के नीचे के क्षेत्र को समझने में विभिन्न देशों के बीच सहयोग की गुंजाइश मौजूद है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय जल विज्ञान और समुद्र की गहराई से जुड़े आंकड़ों को साझा करने से अलग-अलग समुद्री क्षेत्रों की विशेषताओं और चुनौतियों को समझने में मदद मिल सकती है। इससे पानी के नीचे संचालित होने वाली पनडुब्बियों के लिए जरूरी क्षेत्रीय जानकारी को बेहतर बनाया जा सकता है।

तीन दिवसीय संवाद में समुद्री सुरक्षा पर मंथन

ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब नई दिल्ली 'इंडो-पैसिफिक में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अकादमिक सहयोग' थीम के तहत इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग के 2026 संस्करण की मेजबानी कर रही है। तीन दिवसीय इस संवाद का उद्देश्य क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा की नींव मजबूत करने के लिए विभिन्न देशों के विचारों और दृष्टिकोणों को एक मंच पर लाना है।

ANI

ये भी पढ़ें: ISSF विश्व चैंपियनशिप में भारत ने जीते 3 पदक, लेकिन 10 मीटर एयर राइफल में ओलंपिक कोटा से चूका