भारत और ओमान ने गुरुवार को एक व्यापक आर्थिक साझेदा

भारत–ओमान के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर, व्यापार, सेवाओं और रोजगार के खुलेंगे नए अवसर

India-Oman sign free trade agreement, opening up new opportunities for trade and services

नई दिल्ली। भारत और ओमान ने गुरुवार को एक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) पर हस्ताक्षर किए। भारत की तरफ से वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ओमान के वाणिज्य, उद्योग और निवेश प्रोत्साहन मंत्री कैस बिन मोहम्मद अल यूसुफ ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मजबूत हुआ भारत–ओमान आर्थिक सहयोग

इस मौके पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि, "भारत-ओमान सीईपीए भारत के ओमान के साथ ऐतिहासिक मजबूत संबंधों को और मजबूत करता है और यह एक महत्वाकांक्षी और संतुलित आर्थिक फ्रेमवर्क है जो भारतीय निर्यातकों और पेशेवरों के लिए अवसरों को काफी बढ़ाता है। यह ओमान के बाजार में भारतीय वस्तुओं के लिए लगभग पूरी तरह से शुल्क मुक्त पहुंच देता है, प्रमुख उच्च विकास वाले क्षेत्रों में सेवाओं की प्रतिबद्धताओं का विस्तार करता है, और भारतीय पेशेवरों के लिए अधिक गतिशीलता सुनिश्चित करता है। यह समझौता किसानों, कारीगरों, श्रमिकों, एमएसएमई को लाभ पहुंचाते हुए समावेशी विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है, साथ ही मुख्य राष्ट्रीय हितों की रक्षा भी करता है।"

ओमान ने भारत को अपनी 98.08% टैरिफ लाइनों पर दिया जीरो-ड्यूटी एक्सेस

ओमान के साथ हुए सीईपीए समझौते के बाद ओमान ने भारत को अपनी 98.08% टैरिफ लाइनों पर जीरो-ड्यूटी एक्सेस दिया है। इसमें ओमान को किए जाने वाले भारत के 99.38% निर्यात शामिल हैं। इस समझौते के बाद रत्न और आभूषण, कपड़ा, लेदर, फुटवियर, खेल वस्तुएं, प्लास्टिक, फर्नीचर, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल उपकरण और ऑटोमोबाइल सहित सभी प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों को सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा। ऊपर बताए गए क्षेत्रों में 97.96% टैरिफ लाइनों पर टैरिफ तत्काल प्रभाव से खत्म किया जा रहा है।

भारत ने अपने हितों की रक्षा के लिए निषेध श्रेणी में रखे संवेदनशील उत्पाद

भारत ने अपने हितों की रक्षा के लिए, बिना किसी छूट के संवेदनशील उत्पाद को निषेध श्रेणी में रखा है, खासकर कृषि उत्पाद, जिसमें डेयरी, चाय, कॉफी, रबर और तंबाकू उत्पाद; सोना और चांदी के बिस्किट, गहने; जूते, खेल के सामान जैसे अन्य लेबर-इंटेंसिव प्रोडक्ट्स और कई बेस मेटल्स का स्क्रैप शामिल हैं।

सेवा क्षेत्र में भारतीय कंपनियों के लिए बड़ी संभावनाएं

ओमान का कुल वैश्विक सेवा आयात 12.52 अरब अमेरिकी डॉलर का है, जिसमें भारत का हिस्सा केवल 5.31% है। यानी भारतीय सेवा प्रदाताओं के लिए अभी बहुत बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। ओमान ने कंप्यूटर सेवाएं, व्यापार और पेशेवर सेवाएं, ऑडियो-विजुअल सेवाएं, अनुसंधान एवं विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताएं की हैं। इससे भारतीय सेवा प्रदाताओं को नए अवसर मिलेंगे, हाई वैल्यू जॉब्स में बढ़ोतरी होगी और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे।

ओमान में भारतीय समुदाय और निवेश की मजबूत मौजूदगी

ओमान में लगभग 7 लाख भारतीय नागरिक रहते हैं। इनमें कई ऐसे भारतीय व्यापारी परिवार भी शामिल हैं जो 200–300 सालों से अधिक समय से वहां बसे हुए हैं और ओमान की अर्थव्यवस्था व समाज में बड़ा योगदान दे रहे हैं। ओमान में 6,000 से अधिक भारतीय कंपनियां अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही हैं। हर साल करीब 2 अरब अमेरिकी डॉलर का रेमिटेंस (भारत भेजी जाने वाली राशि) दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और मजबूत करता है। भारत और ओमान के बीच कुल व्यापार 10 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का है, जिसे सीईपीए के तहत और बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं हैं।

भारतीय पेशेवरों के लिए बेहतर मोबिलिटी और काम के अवसर

सीईपीए की एक सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पहली बार ओमान ने मोड-4 के तहत कई अहम प्रतिबद्धताएं की हैं। इसमें कंपनी के भीतर ट्रांसफर होने वाले कर्मचारियों का कोटा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करना शामिल है। साथ ही, वहां काम करने वाले भारतीय लोगों के लिए रहने की अनुमति की अवधि को 90 दिनों से बढ़ाकर दो साल कर दी गई है, जिसे आगे दो साल और बढ़ाया जा सकता है। इस समझौते से अकाउंटिंग, टैक्सेशन, आर्किटेक्चर, मेडिकल और संबंधित सेवाओं जैसे क्षेत्रों के कुशल पेशेवरों के लिए प्रवेश और रहने की शर्तें आसान होंगी।

नॉन-टैरिफ बाधाओं पर नियंत्रण और भारत की व्यापक व्यापार रणनीति

इस समझौते में ऐसे नॉन-टैरिफ बाधाओं से निपटने के प्रावधान भी हैं, जो शुल्क में छूट के बावजूद बाजार तक वास्तविक पहुंच को सीमित करती हैं। यह पिछले 6 महीनों में यूनाइटेड किंगडम के बाद दूसरा मुक्त व्यापार समझौता है। यह भारत की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत उन विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ व्यापार समझौते किए जा रहे हैं जो भारत के घरेलू उत्पादन से सीधी प्रतिस्पर्धा नहीं करतीं और भारतीय व्यापार के लिए नए अवसर खोलती हैं।

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