जंग से भारत को हर साल 14.15 लाख करोड़ का नुकसान, रोकथाम से बड़ी बचत संभव
नई दिल्ली: जंग लगने से भारत को सालाना लगभग 14.15 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होता है, जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.3 प्रतिशत है। अकेले बुनियादी ढांचे पर ही इसका असर 1.42 लाख करोड़ रुपये है। हालांकि, सीआईआई-एनआरआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रभावी रोकथाम उपायों से अर्थव्यवस्था को संभावित रूप से 4.95 लाख करोड़ रुपये तक की बचत हो सकती है। सीआईआई वार्षिक इंफ्रास्ट्रक्चर समिट 2026 में प्रस्तुत की गई इस रिपोर्ट में बुनियादी ढांचे को उन क्षेत्रों में सबसे अधिक जंग लगने की लागत वाला क्षेत्र बताया गया है।
जंग रोकने से 4.95 लाख करोड़ की बचत संभव
रिपोर्ट में कहा गया है कि 1.42 लाख करोड़ रुपये की वार्षिक लागत इस क्षेत्र के जीडीपी का लगभग 2.9% है, जबकि अधिकतम संभावित बचत 49,580 करोड़ रुपये है, जो बुनियादी ढांचा क्षेत्र के जीडीपी का लगभग 1.02% है। रिपोर्ट के अनुसार, बुनियादी ढांचा भारत के जीडीपी में लगभग 14.5 प्रतिशत का योगदान देता है, इसलिए इस क्षेत्र में निवेश की सुरक्षा के लिए परिसंपत्तियों की मजबूती और स्थायित्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। व्यापक आर्थिक स्तर पर प्रभावी संक्षारण-निवारण उपायों से अर्थव्यवस्था में 4.95 लाख करोड़ रुपये तक की बचत हो सकती है, जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 1.5 प्रतिशत है।
निर्माण स्तर पर जंग रोकने पर जोर
रिपोर्ट में इस समस्या के समाधान हेतु भारतीय अवसंरचना में संक्षारण-सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ करने की सिफारिश की गई है, जिसमें जोखिम-आधारित आवश्यकताएं, इस्पात के लिए सेवा-जीवन रूपरेखा, आधुनिक परीक्षण विधियां और सख्त निरीक्षण एवं प्रवर्तन शामिल हैं। रिपोर्ट में आगे तर्क दिया गया है कि बार-बार रख-रखाव और मरम्मत पर निर्भर रहने के बजाय बेहतर विशिष्टताओं, सामग्री चयन और सुरक्षा प्रणालियों के माध्यम से किसी संपत्ति के निर्माण से पहले ही संक्षारण की समस्या के एक बड़े हिस्से का समाधान किया जा सकता है।
तटीय क्षेत्रों में जंग से बचाव के सख्त मानक सुझाए
इसकी प्रमुख सिफारिशों में से एक है पर्यावरणीय जोखिम पर आधारित संक्षारण-सुरक्षा आवश्यकताओं को लागू करना, विशेष रूप से तटीय, उच्च आर्द्रता और अन्य आक्रामक वातावरण में स्थित अवसंरचना के लिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां अमेरिका और जापान जैसे देश अत्यधिक संक्षारक परिस्थितियों में संक्षारण सुरक्षा को अनिवार्य बनाते हैं, वहीं भारतीय नियम अक्सर ऐसे उपायों को मान्यता तो देते हैं, लेकिन उन्हें अपनाना वैकल्पिक छोड़ देते हैं। रिपोर्ट में सड़कों और पुलों के लिए तटीय और उच्च आर्द्रता वाले क्षेत्रों में जंग से बचाव के लिए कड़े उपायों की सिफारिश की गई है, साथ ही साथ विशिष्ट वातावरण और उपयोग के अनुसार सुरक्षा प्रणालियों के चयन की अनुमति भी दी गई है।
(इनपुट: ANI)
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