भारत-स्विट्जरलैंड ने 5 साल के वीजा-मोबिलिटी समझौते पर किए हस्ताक्षर, 100 अरब डॉलर निवेश का लक्ष्य
नई दिल्ली (भारत)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन के बीच हुई उच्चस्तरीय बातचीत के बाद भारत और स्विट्जरलैंड ने माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप (MMP) समेत छह अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौते के तहत पांच साल तक के मल्टीपल-एंट्री वीज़ा, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर और दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही को आसान बनाने का प्रावधान किया गया है। वहीं, भारत और स्विट्जरलैंड ने द्विपक्षीय निवेश को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी रखा है।
MMP में स्टूडेंट परमिट और रोजगार के अवसर शामिल
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी नतीजों की सूची के अनुसार, MMP लंबे समय के लिए मोबिलिटी का ढांचा तैयार करता है। इसमें पांच साल तक के मल्टीपल-एंट्री वीज़ा, एक साल के लिए रिन्यू होने वाले स्टूडेंट परमिट और युवाओं के लिए बेहतर रोजगार के अवसर तैयार करने वाले सिस्टम शामिल हैं।
हर साल 300 युवा प्रोफेशनल्स का होगा आदान-प्रदान
ह्यूमन कैपिटल मोबिलिटी को मजबूत करने के लिए दोनों सरकारों ने 'यंग प्रोफेशनल्स के आदान-प्रदान' (YPS) पर भी समझौता किया है। इसके तहत हर देश से हर साल 300 युवा प्रोफेशनल्स के आदान-प्रदान की सुविधा होगी, जिसे बाद में 500 तक बढ़ाया जा सकता है। नागरिकता और रेजिडेंसी स्टेटस के वेरिफिकेशन की समयसीमा को 90 दिन से घटाकर 30 दिन किया गया है।
ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर में सहयोग पर MoU
ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भारत और स्विट्जरलैंड ने ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी, मोबिलिटी सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए एक MoU पर हस्ताक्षर किए। साझेदारी में इलेक्ट्रिक वाहन, रोपवे, सर्कुलर इकोनॉमी और टनलिंग जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इसके साथ इंडस्ट्री-एकेडेमिया लिंकेज, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को बढ़ावा देने पर भी जोर है।
रिसर्च और टेक्नोलॉजी में तीन समझौते
वैज्ञानिक सहयोग और स्टार्टअप इनक्यूबेशन को आगे बढ़ाने के लिए रिसर्च और टेक्नोलॉजी सेक्टर में तीन खास समझौते किए गए। DST और स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन (SNSF) के बीच 'लेटर ऑफ इंटेंट' (LoI) पर हस्ताक्षर हुए। इसका उद्देश्य लंबे समय तक संयुक्त रिसर्च, शुरुआती वैज्ञानिक सहयोग और संस्थागत साझेदारी की नींव रखना है।
स्टार्टअप्स के लिए इंडो-स्विस ट्रेनिंग प्रोग्राम
एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने के लिए DST और ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज के बीच 'इम्प्लीमेंटेशन अरेंजमेंट' के तहत 'इंडो-स्विस एकेडेमिया-इंडस्ट्री ट्रेनिंग प्रोग्राम' शुरू किया जा रहा है। यह शुरुआती दौर के स्टार्टअप्स की क्षमता बढ़ाने और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
इंडो-स्विस रिसर्च फ्लैगशिप कार्यक्रम शुरू
दोनों देशों ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से 'इंडो-स्विस रिसर्च फ्लैगशिप' कार्यक्रम के पहले सत्र की भी शुरुआत की। इसका उद्देश्य युवा शोधकर्ताओं की क्षमता बढ़ाना, ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और टेक्नोलॉजी व कार्य-पद्धति के ट्रांसफर में तेजी लाना है। (Source: ANI)
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