भारत की UN में मांग: आतंकवादी कृत्यों को मानवता के खिलाफ अपराध के रूप में मिले मान्यता
नई दिल्ली: भारत ने संयुक्त राष्ट्र में आतंकवादी कृत्यों को मानवता के विरुद्ध अपराधों के दायरे में उचित रूप से शामिल करने की मांग उठाई है। भारत ने कहा कि ऐसे अपराधों की रोकथाम, जांच और दोषियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की प्राथमिक जिम्मेदारी राष्ट्रीय कानूनी और न्यायिक तंत्रों की होनी चाहिए। साथ ही, किसी भी नए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देशों की संप्रभुता और मौजूदा कानूनी व्यवस्थाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने रखी बात
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की काउंसलर आर. मिथिलि ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति के 81वें सत्र में भारत का पक्ष रखा। यह चर्चा मानवता के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम और दंड से जुड़े प्रस्तावित संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन को लेकर थी। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की ओर से सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा बयान के मुताबिक, भारत ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवादी कृत्यों को मानवता के विरुद्ध अपराधों के दायरे में उचित मान्यता मिलनी चाहिए।
राष्ट्रीय कानूनों और न्यायिक व्यवस्था को प्राथमिकता
भारत ने अपने बयान में कहा कि मानवता के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम, जांच और अभियोजन की प्राथमिक जिम्मेदारी देशों की राष्ट्रीय कानूनी और न्यायिक व्यवस्थाओं की होनी चाहिए। भारत ने राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार की प्रधानता पर जोर देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में देशों की संप्रभुता और उनके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने के सिद्धांत का सम्मान किया जाना चाहिए। भारत ने प्रस्तावित सम्मेलन को लेकर यह भी कहा कि उसे मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्थाओं का पूरक होना चाहिए, न कि उनकी नकल करना चाहिए। बयान में मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कानूनी तंत्रों को सीधे नए सम्मेलन में शामिल करने के बजाय उनके साथ तालमेल बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया गया। भारत के मुताबिक, इस दिशा में अंतरराष्ट्रीय कानून के व्यापक रूप से स्वीकार किए गए सिद्धांतों, राष्ट्रीय क्षमताओं को मजबूत करने और पारदर्शी एवं समावेशी बातचीत की अहम भूमिका है।
आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति का उल्लेख
भारत का यह रुख आतंकवाद के प्रति उसकी शून्य-सहिष्णुता नीति को दर्शाता है। देश में आतंकवाद से निपटने के लिए कानूनी ढांचे को मजबूत करने, सुरक्षा संस्थानों में सुधार और खुफिया जानकारी साझा करने की व्यवस्था बेहतर बनाने जैसे कदम उठाए गए हैं। इसके अलावा, सीमा पार आतंकवाद से निपटने, आतंकी वित्तपोषण नेटवर्क पर कार्रवाई करने और पुलिस एवं सुरक्षा बलों के आधुनिकीकरण पर भी जोर दिया गया है। साइबर सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करना भी भारत की सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है।
आतंकवाद से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर
भारत के बयान में मानवता के विरुद्ध अपराधों से निपटने के लिए ऐसा अंतरराष्ट्रीय ढांचा विकसित करने की जरूरत दोहराई गई, जो राष्ट्रीय क्षेत्राधिकारों का सम्मान करे और मौजूदा कानूनी व्यवस्थाओं के अनावश्यक दोहराव से बचे। भारत ने पारदर्शी और समावेशी वार्ताओं के जरिए इस सम्मेलन को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसका उद्देश्य मानवता के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम और दोषियों को दंडित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना है।
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