पूर्व राजनयिक वीना सिकरी ने कहा है कि भारत और अमेर

तरजीही व्यवहार के बिना अमेरिका से व्यापार समझौता नहीं करेगा भारत: वीना सिकरी

India Won’t Accept Preferential Terms in US Trade Deal: Veena Sikri

नई दिल्ली: पूर्व राजनयिक वीना सिकरी ने कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर भारत का रुख स्पष्ट है। जब तक भारत को तरजीही व्यवहार नहीं मिलता, तब तक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए जाएंगे। उन्होंने यह बात अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की आगामी भारत यात्रा और दोनों देशों के बीच जारी व्यापारिक वार्ताओं के संदर्भ में कही। बातचीत में वीना सिकरी ने भारत-अमेरिका संबंधों से जुड़े मौजूदा राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रमों का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि रुबियो की यात्रा के दौरान किन मुद्दों पर चर्चा होती है, इस पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो जामनगर जा रहे हैं, क्योंकि रिलायंस अमेरिका में एक रिफाइनरी बनाने में निवेश कर रहा है। यह 50 वर्षों में अमेरिका में बनने वाली पहली रिफाइनरी होगी। रिलायंस अमेरिका में बहुत बड़ा निवेश कर रहा है। इसीलिए रुबियो को जामनगर ले जाया जा रहा है, ताकि वे वहां की रिफाइनरी देख सकें।” मार्च 2026 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टेक्सास के ब्राउनस्विले बंदरगाह पर प्रस्तावित 'अमेरिका फर्स्ट रिफाइनिंग' परियोजना के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ 300 अरब अमेरिकी डॉलर की साझेदारी की घोषणा की थी।

रूस से तेल खरीद पर टैरिफ का मुद्दा

व्यापार और शुल्क संबंधी वार्ताओं पर चर्चा करते हुए सिकरी ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप अब लिंडसे ग्राहम विधेयक के तहत रूस से भारत द्वारा खरीदे जाने वाले तेल और पेट्रोलियम उत्पादों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप का रूस के साथ भी एक अलग समझौता है, जिसके तहत रूस पर लगे कुछ प्रतिबंध हटाए जा रहे हैं। उनके मुताबिक, रूस अमेरिका को बड़ी मात्रा में डीजल की आपूर्ति करने पर सहमत हुआ है। सिकरी ने कहा कि ट्रंप को उम्मीद है कि इससे अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले देश में कीमतें कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने इन घटनाक्रमों को वैश्विक स्तर पर जारी वार्ताओं का हिस्सा बताया।

तरजीही व्यवहार पर भारत का स्पष्ट रुख

भारत की व्यापार नीति पर जोर देते हुए सिकरी ने कहा कि भारत सभी मुद्दों पर बारीकी से नजर रख रहा है और व्यापार समझौते में अपने हितों को प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने कहा, “भारत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जब तक उसे तरजीही व्यवहार नहीं मिलता, तब तक वह व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा। इसलिए, हमें इस बात पर अधिक ध्यान देना चाहिए कि किस तरह का व्यापार समझौता तैयार किया जाएगा और क्या भारत को वास्तव में वह तरजीही व्यवहार मिलेगा, जिसकी वह मांग कर रहा है। चर्चा का यह पहलू भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।” विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर 19 और 20 अक्टूबर को मुंबई में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान की मेजबानी करेंगे। इसके अलावा, 20 अक्टूबर को वह अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ बातचीत करेंगे और अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि यूएई के विदेश मंत्री की यात्रा भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा करने का अवसर प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि दोनों देश ऊर्जा, व्यापार, निवेश, वित्तीय प्रौद्योगिकी, रक्षा और संपर्क सुविधाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा करेंगे। इसके साथ ही पश्चिम एशिया की स्थिति तथा वैश्विक और बहुपक्षीय मुद्दों पर भी चर्चा होगी। अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान की यह यात्रा जयशंकर की 14 से 16 अक्टूबर तक हुई यूएई की आधिकारिक यात्रा के बाद हो रही है। उस दौरान जयशंकर ने यूएई के नेतृत्व के साथ बातचीत की और रायसीना मिडिल ईस्ट कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।

भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने पर जोर

रुबियो की आगामी यात्रा को लेकर जायसवाल ने कहा कि इससे दोनों देशों को द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करने और व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने बताया कि बातचीत में ऊर्जा, व्यापार, निवेश, रक्षा, महत्वपूर्ण उभरती प्रौद्योगिकियों और आपसी हित के अन्य क्षेत्रों को शामिल किए जाने की उम्मीद है। दोनों पक्ष क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार-विमर्श करेंगे। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, रुबियो अपनी भारत यात्रा के दौरान मुंबई और जामनगर जाएंगे। इस दौरान वह वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मुलाकात कर अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने, क्षेत्रीय और वैश्विक परिस्थितियों पर चर्चा करने तथा ऊर्जा सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार करेंगे। इसके अलावा, वह कारोबारी नेताओं के साथ भी बैठक करेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक निवेश और आर्थिक सहयोग के नए अवसरों को बढ़ावा देना होगा।

दिल्ली के बाहर बैठकें आयोजित करने की परंपरा

विदेश मंत्री जयशंकर की द्विपक्षीय बैठकों के लिए मुंबई को चुने जाने के सवाल पर जायसवाल ने कहा कि भारत पिछले लगभग एक दशक से विदेशी गणमान्य व्यक्तियों की मेजबानी दिल्ली के बाहर भी करता रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री ने वडोदरा में स्पेन के प्रधानमंत्री, अहमदाबाद में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और वाराणसी में मॉरीशस के प्रधानमंत्री की मेजबानी की थी। इसके अलावा, विदेश मंत्री ने गोवा में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक, गुजरात के केवड़िया में बोत्सवाना के विदेश मंत्री की मेजबानी और अमृतसर में हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन आयोजित किया था।

(एएनआई)

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