भारतीय तटरक्षक बल और MoES ने 25,079 वालंटियर्स के

इंटरनेशनल कोस्टल क्लीनअप डे-2026: देश के तटों से हटाया गया 30 हजार किलो से अधिक कचरा

Volunteers clean coastlines under marine conservation drive

भारतीय तटरक्षक बल (ICG) और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) ने मिलकर 19 सितंबर 2026 को देशभर के सभी तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इंटरनेशनल कोस्टल क्लीनअप डे-2026 का सफल आयोजन किया। यह अभियान 'स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर 5.0' मुहिम की समाप्ति के साथ जुड़ा, जिसमें 25,079 वॉलंटियर्स ने 100 से अधिक स्थानों पर समुद्री कचरे के खिलाफ जमीनी मोर्चा संभाला।

अभियान की शुरुआत और मकसद

केंद्र सरकार के 'स्वच्छ भारत अभियान' और 'स्वच्छता ही सेवा' कैंपेन की दिशा में यह आयोजन एक बड़ा कदम साबित हुआ। भारतीय तटरक्षक बल ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के साथ मिलकर इस साल इंटरनेशनल कोस्टल क्लीनअप डे-2026 को देश के सभी तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ लागू किया।

यह वैश्विक अभियान हर साल सितंबर के तीसरे शनिवार को मनाया जाता है और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) तथा दक्षिण एशिया सहकारी पर्यावरण कार्यक्रम (SACEP) के तत्वावधान में संचालित होता है। भारत में भारतीय तटरक्षक बल 2006 से इस मुहिम का समन्वय कर रहा है।

'स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर 5.0' का समापन

इस साल का आयोजन खास इसलिए भी अहम रहा क्योंकि यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की अगुवाई वाले फ्लैगशिप अभियान 'स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर 5.0' के समापन के साथ जुड़ा था। यह अभियान 12 से 19 सितंबर तक चला और इसका मुख्य लक्ष्य नागरिकों की सीधी भागीदारी के माध्यम से समुद्री कचरे से निपटना था। एक हफ्ते तक चली इस मुहिम ने आम नागरिकों को समुद्री पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का काम किया, जिससे यह सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि जनआंदोलन का रूप ले सका।

आंकड़ों में दिखी जनभागीदारी की ताकत

इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि रही व्यापक जनभागीदारी। कुल 25,079 वालंटियर्स ने भारतीय तटरक्षक बल और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के साथ हाथ मिलाया। यह भागीदारी देश के 100 से अधिक स्थानों पर, सभी तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज की गई। इस सामूहिक प्रयास से 30,554 किलोग्राम प्लास्टिक और अन्य समुद्री कचरा तटों से हटाया गया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि नागरिक भागीदारी सही दिशा में प्रयास मिलने पर कितना बड़ा असर पैदा कर सकती है।

किन-किन समूहों ने निभाई भूमिका

अभियान में एनसीसी (NCC) कैडेट्स, एनएसएस (NSS) वालंटियर्स, स्कूल-कॉलेज के छात्रों, वैज्ञानिक समुदायों और स्थानीय नागरिकों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। इन सभी वर्गों की सक्रिय मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि स्वच्छ और सुरक्षित तटों के प्रति देश में एक मजबूत सामूहिक प्रतिबद्धता बन रही है, जिसके जरिए एक स्वच्छ, स्वस्थ और कचरा-मुक्त तटों के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।

बहु-स्तरीय समन्वय बना सफलता की कुंजी

ICC-2026 की सफलता के पीछे एक बड़ी वजह रही अलग-अलग एजेंसियों के बीच बना तालमेल। भारतीय तटरक्षक बल, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, नागरिक प्रशासन, केंद्र और राज्य सरकार के संगठनों, नगर निगमों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), मछुआरा संघों, पोर्ट प्राधिकरणों, तेल कंपनियों और निजी उद्यमों ने मिलकर इस आयोजन को अंजाम दिया।

इतने बड़े स्तर के प्रशासनिक और सामाजिक समन्वय ने इस अभियान को सिर्फ एक दिन के कार्यक्रम से आगे बढ़ाकर एक व्यवस्थित राष्ट्रीय मुहिम का रूप दिया। साथ ही इस आयोजन को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के जरिए स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक कवरेज मिली, जिससे समुद्री संरक्षण का संदेश और भी असरदार तरीके से जनता तक पहुंचा। ​(Published By: Ravi Pandey)

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