भारतीय नौसेना में 12 अक्टूबर को शामिल होगा स्वदेशी युद्धपोत मंगरोल, 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री से हुआ है तैयार
मुंबई (महाराष्ट्र)। भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए 12 अक्टूबर को स्वदेशी एंटी-सबमरीन युद्धपोत मंगरोल को नौसेना में कमीशन किया जाएगा। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में निर्मित इस युद्धपोत को मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में शामिल किया जाएगा। 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से तैयार यह जहाज उथले और तटीय समुद्री इलाकों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उनसे निपटने में सक्षम है। आधुनिक सोनार, हल्के टॉरपीडो और स्वदेशी हथियार प्रणालियों से लैस मंगरोल भारतीय नौसेना की पनडुब्बी-रोधी क्षमताओं को मजबूत करेगा।
पुराने INS मंगल्रोल की विरासत को आगे बढ़ाएगा नया युद्धपोत
इस युद्धपोत का नाम गुजरात के जूनागढ़ जिले के तटीय शहर और प्रमुख मछली पकड़ने वाले बंदरगाह मंगल्रोल के नाम पर रखा गया है। यह नाम पुराने INS मंगल्रोल (M85) की विरासत को आगे बढ़ाता है। पुराना INS मंगल्रोल एक माइनस्वीपर था, जिसने 7 अप्रैल 2004 तक भारतीय नौसेना में सेवा दी थी।
नए जहाज का नामकरण नौसेना की अपने पुराने युद्धपोतों की विरासत को संजोने की परंपरा को दर्शाता है। इसके साथ ही मंगरोल भारत की स्वदेशी युद्धपोत डिजाइन और निर्माण क्षमताओं को भी प्रदर्शित करता है।
80% से अधिक स्वदेशी सामग्री से बना है युद्धपोत
कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित मंगरोल में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। यह जहाज युद्धपोत के डिजाइन, निर्माण और आधुनिक हथियारों एवं सेंसर के एकीकरण में भारत की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है।
सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत तैयार किया गया यह युद्धपोत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी जहाज निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसका निर्माण देश में रक्षा उपकरणों और समुद्री सुरक्षा से जुड़े संसाधनों के विकास की क्षमता को भी रेखांकित करता है।
आधुनिक सोनार, टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर से लैस
मंगरोल को तटीय और उथले पानी में पानी के नीचे मौजूद खतरों का पता लगाने तथा उनका मुकाबला करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें आधुनिक हथियार और सेंसर लगाए गए हैं, जिनमें अभय हल-माउंटेड सोनार, हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर और मारीच एडवांस्ड टॉरपीडो डिकॉय सिस्टम शामिल हैं।
इन प्रणालियों के जरिए जहाज को पनडुब्बी से जुड़े खतरों का पता लगाने और उनसे निपटने के लिए तैयार किया गया है। इसकी क्षमताएं विशेष रूप से तटीय क्षेत्रों और उथले समुद्री इलाकों में नौसेना के अभियानों के लिए उपयोगी होंगी।
तीन डीजल इंजनों और वॉटरजेट प्रोपल्शन से मिलेगी संचालन क्षमता
यह युद्धपोत वॉटरजेट प्रोपल्शन प्रणाली से जुड़े तीन डीजल इंजनों से संचालित होता है। इसकी बनावट और प्रणोदन प्रणाली इसे उथले पानी में बेहतर तरीके से मुड़ने और दिशा बदलने की क्षमता देती है।
मंगरोल पानी के नीचे निगरानी करने, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों और माइन वॉरफेयर से संबंधित कार्यों को अंजाम देने में भी सक्षम है। इन विशेषताओं के कारण यह तटीय क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के समुद्री सुरक्षा अभियानों में भूमिका निभा सकता है।
तटीय क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी क्षमता होगी मजबूत
मंगरोल के भारतीय नौसेना में शामिल होने से विशेष रूप से तटीय क्षेत्रों में एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमताओं को मजबूती मिलेगी। इन क्षेत्रों में बड़े युद्धपोतों के संचालन में आने वाली कठिनाइयों को देखते हुए यह जहाज उथले पानी में पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
यह युद्धपोत समुद्री गश्ती विमानों, हेलीकॉप्टरों और अन्य युद्धपोतों के साथ मिलकर पानी के नीचे मौजूद खतरों का पता लगाने और उनसे निपटने में सहयोग कर सकता है। इसके शामिल होने से बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा करने तथा बड़े नौसैनिक बेड़े के अभियानों में सहायता मिलने की उम्मीद है।
<blockquote lang="en" dir="ltr">PREDATORS OF THE LITTORALS Mangrol, the third Anti Submarine Warfare Shallow Water Craft #ASWSWC, indigenously designed & constructed by @cslcochin was delivered to the #IndianNavy on 21 Aug 26.
Equipped with state-of-the-art sonars & radars, advanced torpedoes, ASW rockets, and mines, the vessel is a potent platform designed for underwater surveillance, ASW operations, mine warfare, and Low Intensity Maritime Operations (LIMO).
Named after the historic port city in Gujarat, she inherits the proud mantle of the erstwhile minesweeper #INSMangrol (decommissioned in 2004).
With over 80% indigenous content, the ship reinforces the Nation’s commitment to #AatmanirbharBharat, showcasing the growing prowess of India’s indigenous warship-building industry.
@SpokespersonMoD @makeinindia</p>— SpokespersonNavy (@indiannavy) <a href="https://x.com/indiannavy/status/2091059121856598210?ref_src=twsrc%5Etfw">August 22, 2026</a></blockquote> <script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
स्वदेशी जहाज निर्माण और नौसेना की तैयारी को मिलेगा बढ़ावा
समुद्री सुरक्षा के बदलते माहौल में पानी के नीचे मौजूद खतरों से निपटने की क्षमता महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में मंगरोल को नौसेना में शामिल करना तटीय क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है।
यह युद्धपोत भारत की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमताओं में बढ़ोतरी को भी दर्शाता है। इसके कमीशन होने से भारतीय नौसेना की परिचालन तैयारियों और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को मजबूती मिलेगी। (Source: ANI)
यह भी पढ़ें: जेवर एयरपोर्ट का नाम बदलने पर अखिलेश यादव का BJP पर हमला, कहा- PM के नाम पर इसलिए नामकरण क्योंकि कुर्सी छिनने वाली है