यूके और यूरोप के बाजारों पर भारतीय चावल कंपनियों की नजर, BIRC 2026 में बनी निर्यात बढ़ाने की रणनीति
नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने के इरादे से भारतीय चावल कंपनियां अब यूनाइटेड किंगडम (UK) और यूरोप के नए बाजारों का रुख कर रही हैं। नई दिल्ली में आयोजित 'भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस (BIRC) 2026' के दौरान दिग्गज कारोबारियों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारत का प्रभुत्व और बढ़ाने का खाका पेश किया।
मिडिल ईस्ट के बाद अब यूरोप पर फोकस
हरी भोग आगरा फूड (HBAF) एलएलपी के बिजनेस हेड शशि श्रीवास्तव ने सम्मेलन में कंपनी के नए रोडमैप की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खाड़ी देशों में सफलता के बाद अब यूरोपीय बाजार उनकी प्राथमिकता है।
श्रीवास्तव ने कहा, "फिलहाल हम सऊदी अरब, मध्य पूर्व, ईरान और इराक के बाजारों को कवर कर रहे हैं। अब हमारा अगला लक्ष्य यूके और यूरोप में नेटवर्क फैलाना है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रतिस्पर्धी दाम, बेहतर गुणवत्ता और ग्राहकों की मांग को प्राथमिकता देकर ही घरेलू व विदेशी बाजारों में यह जगह बनी है।
गैर-बासमती चावल की अंतरराष्ट्रीय मांग में उछाल
गोयनका ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के इंटरनेशनल सेल्स डायरेक्टर आशीष नैनानी ने भारतीय चावल उद्योग के भविष्य पर गहरा भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि विदेश में रह रहे भारतीय समुदाय की वजह से चावल की मांग लगातार बनी रहती है।
नैनानी के मुताबिक, उनका समूह यूरोप, अमेरिका, खाड़ी देशों, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख बाजारों में गैर-बासमती चावल का बड़े पैमाने पर निर्यात कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की यह दिलचस्पी भारतीय निर्यातकों के लिए नए दरवाजे खोल रही है।
वैश्विक खरीदारों से सीधी बातचीत और सौदे
घरेलू बाजार में मजबूत पकड़ बना चुकी दिल्ली पसंद एग्रो (पी) लिमिटेड भी अब विदेशी बाजारों की ओर कदम बढ़ा रही है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर वीरेंद्र कुमार ने बताया कि वे अब घरेलू सीमा से बाहर निकलकर निर्यात विस्तार पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
सम्मेलन के दौरान कंपनी दुबई और जेद्दा जैसे प्रमुख व्यापारिक केंद्रों से आए अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ सीधी बातचीत कर रही है।
नई दिल्ली में जुटा दुनिया भर का राइस ट्रेड
23 से 25 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय 'भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस 2026' में दुनिया भर के आयातक और भारतीय निर्यातक एक मंच पर जुटे हैं। यह सम्मेलन भारतीय चावल उद्योग को विविधता देने और नए वैश्विक व्यापारिक संबंध स्थापित करने में अहम भूमिका निभा रहा है। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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