केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार देश में विदेशी निवेश

बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 75 से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने का प्रस्ताव

बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 75 से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने का प्रस्ताव

केंद्र सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में पेश करेगी महत्वपूर्ण विधेयक

नई दिल्ली। 

केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार देश में विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा को 75 फीसदी से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करेगी। केन्द्रीय वित्त मंत्रालय आर्थिक सुधारों को लेकर संसद के आगामी सत्र में कई महत्वपूर्ण बिल पेश करेगी। इनमें बीमा क्षेत्र में एफडीआई बढ़ाने का बिल भी शामिल है। 

वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार बीमा क्षेत्र में बड़े बदलाव की योजना पर काम कर रही है। इसी क्रम में सरकार बीमा क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) की सीमा 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने जा रही है। इसे लेकर मंत्रालय संसद के शीतकालीन सत्र में विधेयक पेश करेगी। इस दौरान एफडीआई के अलावा परमाणु ऊर्जा समेत 10 से अधिक विधेयक पेश करने की तैयारी है। संसद का सत्र एक दिसंबर से शुरू हो रहा है जो 19 दिसंबर तक चलेगा। सत्र के दौरान 15 कार्य दिवस में महत्वपूर्ण बिलों पर चर्चा होगी। वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि एफडीआई सीमा बढ़ाने से बीमा कवरेज का विस्तार होगा और प्रतिस्पर्धा एवं कारोबार की गति बढ़ेगी। इसका लाभ बीमा देश के सामान्य वर्ग को होगा। 

याद रहे कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस वर्ष बजट भाषण में बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश बढ़ाने का इरादा जताते हुए कहा था कि यह कदम वित्तीय क्षेत्र के अगली पीढ़ी के सुधारों का हिस्सा होगा। अब तक बीमा उद्योग में 82,000 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश आ चुका है। सरकार का मानना है कि 100 प्रतिशत एफडीआई होने से इस क्षेत्र में नई वैश्विक कंपनियों के आने की राह खुलेगी।

वित्त मंत्रालय का बीमा अधिनियम, 1938 में कई बड़े संशोधन की भी तैयारी है। इनमें एफडीआई की सीमा बढ़ाने के साथ-साथ बीमा कंपनियों की न्यूनतम चुकता पूंजी में कमी और कंपोजिट लाइसेंस की व्यवस्था शामिल है। इससे एक ही कंपनी जीवन और गैर-जीवन बीमा कारोबार एक साथ चला सकेगी। यह बदलाव उन कंपनियों को व्यापक बाजार में उतरने का अवसर देगा, जो अब तक सीमित दायरे में काम कर रही थीं।

वित्त मंत्रालय एफडीआई बढ़ाने के साथ ही जीवन बीमा अधिनियम में भी संशोधन करेगी। सरकार एलआईसी अधिनियम, 1956 और बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडाई) अधिनियम, 1999 में भी संशोधन की तैयारी में है। जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को संचालन संबंधी फैसलों जैसे शाखाओं का विस्तार और भर्ती में अधिक स्वायत्तता देने का प्रस्ताव है। सरकार का कहना है कि इससे पॉलिसीधारकों के हितों की सुरक्षा मजबूत होगी। बीमा सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा।

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