ISRO ने गगनयान मॉड्यूल सेपरेशन सिस्टम को किया प्रमाणित, 2026 में G1 मिशन लॉन्च करने का लक्ष्य
बेंगलुरु (कर्नाटक)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गगनयान कार्यक्रम के तहत क्रू मॉड्यूल (CM) और सर्विस मॉड्यूल (SM) को अलग करने वाली प्रणाली के परीक्षणों की श्रृंखला सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। इन परीक्षणों से सेपरेशन सिस्टम के डिजाइन की उपयुक्तता प्रमाणित हुई है। यह उपलब्धि गगनयान के पहले बिना चालक दल वाले मिशन G1 के लिए महत्वपूर्ण है, जिसे 2026 में लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है।
गगनयान ऑर्बिटल मॉड्यूल में होते हैं दो प्रमुख हिस्से
गगनयान के ऑर्बिटल मॉड्यूल में क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल शामिल होते हैं। दोनों मॉड्यूल एक सेपरेशन सिस्टम के जरिए आपस में जुड़े रहते हैं। इनके बीच बिजली और तरल पदार्थों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अम्बिलिकल कनेक्शन का इस्तेमाल किया जाता है। लॉन्च से पहले दोनों मॉड्यूल को एक साथ जोड़ा जाता है और मिशन के विभिन्न चरणों में ये एक इकाई के रूप में काम करते हैं।
पृथ्वी पर वापसी से पहले अलग होता है क्रू मॉड्यूल
मिशन के दौरान क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल एक साथ जुड़े रहते हैं। पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करने से पहले क्रू मॉड्यूल को सर्विस मॉड्यूल से अलग किया जाता है। यह प्रक्रिया कई सटीक चरणों में पूरी होती है, जिसमें पाइरोटेक्निक उपकरणों और जेटिसनिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में दोनों मॉड्यूल को सुरक्षित और निर्धारित तरीके से अलग करना सेपरेशन सिस्टम की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
VSSC तिरुवनंतपुरम में किए गए परीक्षण
ISRO ने सेपरेशन सिस्टम के पूरे डिजाइन को प्रमाणित करने के लिए तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) में परीक्षण किए। इसके लिए क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल की संयुक्त संरचना तैयार की गई थी। अलग होने की प्रक्रिया का आकलन करने के लिए परीक्षण व्यवस्था में व्यापक उपकरण लगाए गए। इनकी मदद से मॉड्यूल के अलग होने की प्रक्रिया और उससे जुड़े तकनीकी पहलुओं का परीक्षण किया गया।
मॉड्यूल के अलग होने और अम्बिलिकल कनेक्शन काटने की प्रक्रिया दोहराई
परीक्षणों के दौरान दोनों मॉड्यूल के अलग होने की प्रक्रिया को दोहराया गया। इसमें उनके बीच मौजूद कई अम्बिलिकल कनेक्शनों को काटने की प्रक्रिया भी शामिल थी। इन परीक्षणों के जरिए सेपरेशन सिस्टम के डिजाइन की उपयुक्तता का आकलन किया गया। ISRO के अनुसार, परीक्षणों ने प्रणाली की कार्यप्रणाली के साथ-साथ क्रू मॉड्यूल के कई महत्वपूर्ण सब-सिस्टम की मजबूती और झटके सहने की क्षमता का भी आकलन करने में मदद की।
क्रू मॉड्यूल के कई महत्वपूर्ण सब-सिस्टम की जांच
परीक्षणों में क्रू मॉड्यूल के एवियोनिक्स सिस्टम और इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम सहित कई महत्वपूर्ण सब-सिस्टम की मजबूती का आकलन किया गया। इनमें थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम भी शामिल था, जिसके अंतर्गत पीछे के हिस्से और शंक्वाकार हीट शील्ड आते हैं। इसके अलावा, क्रू मॉड्यूल डिप्लॉयबल अम्बिलिकल शील्ड और मॉड्यूल को सीधा रखने वाली अपराइटिंग सिस्टम से जुड़े पहलुओं की भी जांच की गई।
थर्मल और आर्द्रता नियंत्रण प्रणाली से जुड़े उपकरणों का परीक्षण
परीक्षणों में थर्मल और आर्द्रता नियंत्रण प्रणाली से जुड़े पाइरोटेक्निक उपकरण भी शामिल थे। इन परीक्षणों से संबंधित प्रणालियों की मजबूती और झटके सहने की क्षमता का आकलन किया गया। ISRO के अनुसार, इन सभी परीक्षणों ने सेपरेशन सिस्टम के डिजाइन की उपयुक्तता प्रमाणित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2026 में G1 मिशन लॉन्च करने का लक्ष्य
सेपरेशन सिस्टम के परीक्षण सफल होने से गगनयान के पहले बिना चालक दल वाले मिशन G1 के लिए तैयार की गई प्रणाली की कार्यप्रणाली पर भरोसा बढ़ा है। इस मिशन को 2026 में लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है। परीक्षणों की सफलता गगनयान कार्यक्रम के तहत क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल के अलग होने से जुड़ी तकनीकी तैयारियों में एक महत्वपूर्ण कदम है। (Source: ANI)
यह भी पढ़ें: रातभर हिरासत के बाद AISA अध्यक्ष नेहा बोरा रिहा, बोलीं- आम नागरिकों से खूंखार अपराधियों जैसा बर्ताव