लोकसभा में राहुल गांधी पर बरसे जितेंद्र सिंह, असंसदीय भाषा पर उठाए सवाल
नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया और कहा कि देश के युवाओं के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
'क्या संसदीय नियमों की जानकारी है?'
जितेंद्र सिंह ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर सुझाव देने के बजाय राजनीति की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राहुल गांधी को संसदीय नियमों की बुनियादी जानकारी भी है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को अपमानित करने वाली भाषा का इस्तेमाल करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
राहुल गांधी से माफी की मांग
इससे पहले भाजपा सांसदों ने लोकसभा में राहुल गांधी से गृह मंत्री अमित शाह को लेकर की गई टिप्पणी पर माफी मांगने की मांग भी की। दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के मुद्दे पर जितेंद्र सिंह ने कहा कि किसी भी प्रदर्शन के दौरान गोली नहीं चलाई गई थी, बल्कि केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि गोली चलाने जैसे आदेश देने का अधिकार किसी मंत्री के पास नहीं, बल्कि मजिस्ट्रेट के पास होता है।
पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन पर भी साधा निशाना
जितेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर हुए कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को लेकर भी राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री नहीं बन पाने से निराश हैं और इसी वजह से 7, लोक कल्याण मार्ग के बाहर धरने पर बैठे। मंत्री ने दावा किया कि उन्हें समझाया गया था कि ऐसा व्यवहार उनके पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।
पेपर लीक कानून हुआ और सख्त
मंत्री के जवाब के बाद लोकसभा ने ध्वनि मत से लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पारित कर दिया। संशोधन के तहत पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के लिए सजा को और कड़ा किया गया है। अब ऐसे मामलों में न्यूनतम पांच साल और अधिकतम दस साल तक की जेल हो सकेगी। साथ ही अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया है।
सेवा प्रदाताओं और संगठित अपराध पर भी सख्ती
विधेयक के अनुसार, परीक्षा से जुड़े अपराधों में शामिल सेवा प्रदाताओं पर अधिकतम 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। साथ ही उन्हें सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन से आठ साल तक प्रतिबंधित किया जा सकेगा। संगठित पेपर लीक जैसे मामलों में न्यूनतम सजा सात साल और अधिकतम दस साल तक की होगी। वहीं अधिकतम जुर्माना बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
स्पेशल टास्क फोर्स और फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रावधान
संशोधन विधेयक में केंद्र सरकार को पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अपराधों की जांच के लिए विशेष कार्य बल (Special Task Force) बनाने का अधिकार दिया गया है। साथ ही मामलों की जांच दो महीने में पूरी करने, फास्ट ट्रैक अदालतों में सुनवाई कराने और आरोप पत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करने का प्रावधान भी किया गया है।
(एएनआई)
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