JNUTA ने JNU की सभी मौजूदा भर्तियों पर रोक और फरवर

JNU टीचर्स एसोसिएशन ने सभी भर्तियां रोकने और 2022 से हुई नियुक्तियों की जांच की मांग की

JNU Recruitment Row: JNUTA Seeks Probe Into Appointments Since 2022

नई दिल्ली (भारत)। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। JNU टीचर्स एसोसिएशन (JNUTA) ने यूनिवर्सिटी में चल रही सभी टीचिंग और नॉन-टीचिंग भर्तियों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। एसोसिएशन ने कुलपति शांतिश्री धूलिपुडी पंडित के कार्यकाल में नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं और प्रक्रिया के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए हैं। JNUTA ने फरवरी 2022 से हुई सभी फैकल्टी नियुक्तियों की स्वतंत्र जांच की मांग के साथ ही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को खत्म कर JNUEE को दोबारा शुरू करने की भी मांग उठाई है।

रिपोर्ट के बाद भी भर्ती जारी रखने पर JNUTA ने जताया विरोध

JNU टीचर्स एसोसिएशन (JNUTA) ने कहा कि 'द रिपोर्टर्स कलेक्टिव' (TRC) की जांच में प्रक्रिया के उल्लंघन के आरोपों के बावजूद, JNU ने 14 अगस्त को विज्ञापन संख्या RC/75/2026 के तहत भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी थी। टीचर्स एसोसिएशन ने, चल रही भर्ती प्रक्रिया के प्रति अपने विरोध को "कड़ा" और "स्पष्ट" बताया और सभी भर्ती गतिविधियों को तुरंत रोकने की मांग की।

UGC नियमों की अनदेखी और एक्सपर्ट पैनल में हेरफेर का आरोप

JNUTA ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नियमों और कानूनी ढांचे का उल्लंघन किया है, साथ ही स्थापित एकेडमिक नियमों और मानदंडों की अनदेखी की है। एसोसिएशन द्वारा लगाए गए आरोपों में यह दावा भी शामिल है कि एक्सपर्ट पैनल में हेरफेर की गई, डीन और चेयरपर्सन की नियुक्तियाँ सीनियरिटी के आधार पर रोटेशन से नहीं की गईं, और यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल में चुने गए टीचर प्रतिनिधियों की आवाज दबाने की कोशिश की गई।

2022 के बाद की हर नियुक्ति पर सवाल, JNUTA ने VC के जवाब की आलोचना की

JNUTA ने आरोप लगाया, "2022 के बाद से की गई हर एक नियुक्ति पर सवालिया निशान है और वह संदिग्ध है।" एसोसिएशन ने आरोपों पर वाइस-चांसलर की प्रतिक्रिया की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि आरोपों को "प्रोपगैंडा" बताना और आलोचना को "वामपंथी झुकाव वाले JNUTA सदस्यों" से जोड़ना, TRC की जांच में उठाए गए प्रक्रिया से जुड़े खास मुद्दों का समाधान नहीं करता है।

शॉर्टलिस्टिंग और चयन में अनियमितताओं का JNUTA ने लगाया आरोप

JNUTA ने उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग और चयन में भी अनियमितताओं का आरोप लगाया। एसोसिएशन के अनुसार, जिन उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्टिंग कमेटी ने शुरू में अयोग्य माना था, उन्हें बाद में शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों की सूची में शामिल कर लिया गया और अंततः चुन लिया गया। टीचर्स एसोसिएशन ने वाइस-चांसलर और IQAC डायरेक्टर प्रोफेसर पीआर कुमारस्वामी से जुड़े हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) के बारे में भी आरोप लगाए।

400 से ज्यादा इंटरव्यू और 200 से ज्यादा नियुक्तियों पर उठाए सवाल

JNUTA ने कहा कि भर्ती की गति - जिसमें 400 से ज्यादा इंटरव्यू और 200 से ज्यादा नियुक्तियाँ शामिल हैं - का इस्तेमाल कानूनी प्रक्रियाओं के कथित उल्लंघनों को सही ठहराने या छिपाने के लिए नहीं किया जा सकता है। एसोसिएशन ने फैकल्टी के प्रमोशन को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि कई टीचर एक दशक से ज्यादा समय से प्रमोशन का इंतज़ार कर रहे हैं। आरोप है कि जिन फैकल्टी सदस्यों ने प्रशासन से सवाल किए, उनके करियर में तरक्की रुक गई।

सभी भर्तियां रोकने और VC व IQAC डायरेक्टर को हटाने की मांग

JNUTA ने भर्ती प्रक्रिया को "काबिल एकेडमिक्स के साथ किया गया सरासर धोखा" बताया और विज्ञापन संख्या RC/75/2026 के साथ-साथ टीचिंग और नॉन-टीचिंग पदों पर चल रही सभी भर्तियों को तुरंत और पूरी तरह से रोकने की मांग की। एसोसिएशन ने कहा कि वह शिक्षा मंत्रालय से संपर्क करके वाइस-चांसलर की भर्ती शक्तियों को रद्द करने और वाइस-चांसलर व IQAC डायरेक्टर, दोनों को हटाने की मांग करेगी।

फरवरी 2022 से हुई नियुक्तियों की स्वतंत्र जांच की मांग

इसने फरवरी 2022 से JNU में हुई सभी फैकल्टी नियुक्तियों की एक तय समय-सीमा के भीतर विज़िटोरियल या विजिलेंस जांच की भी मांग की। एसोसिएशन ने कहा, "अगर वाइस-चांसलर को सच में भरोसा है कि उनके कार्यकाल में भर्ती से जुड़े नियमों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है, तो उन्हें पारदर्शी और स्वतंत्र जांच की JNUTA की मांग का समर्थन करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए।"

NTA को खत्म करने की मांग, परीक्षा पेपर लीक का दिया हवाला

इसी बयान में, JNUTA ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को पूरी तरह से खत्म करने की भी मांग की। उन्होंने बार-बार परीक्षा पेपर लीक होने और नाकामियों का हवाला दिया, जिससे सेंट्रलाइज्ड एंट्रेंस एग्जाम की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। टीचर्स की संस्था ने आरोप लगाया कि NTA से जुड़ी बार-बार की नाकामियों ने एंट्रेंस एग्जाम की निष्पक्षता को नुकसान पहुंचाया है और एजेंसी के तहत सेंट्रलाइज्ड टेस्टिंग को एक ढांचागत विफलता बताया।

JNUTA ने JNUEE को फिर शुरू करने की उठाई मांग

JNUTA ने मांग की कि सेंट्रलाइज्ड परीक्षा प्रणाली की जगह जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी एंट्रेंस एग्ज़ाम (JNUEE) को फिर से शुरू किया जाए। एसोसिएशन के अनुसार, यूनिवर्सिटी-लेवल पर एंट्रेंस एग्जाम फिर से शुरू करने से संस्थागत स्वायत्तता मजबूत होगी, सेंट्रल टेस्टिंग एजेंसी पर निर्भरता कम होगी और यूनिवर्सिटीज को अपनी एडमिशन प्रक्रियाओं पर ज्यादा नियंत्रण मिलेगा।

भर्ती और एडमिशन में पारदर्शी तंत्र की JNUTA ने बताई जरूरत

ये मांगें उच्च शिक्षा में परीक्षा की निष्पक्षता, भर्ती प्रक्रियाओं और संस्थागत स्वायत्तता को लेकर चल रही व्यापक बहस के बीच आई हैं। JNUTA ने कहा कि JNU में नियुक्तियों और एडमिशन को लेकर उठाई गई चिंताओं को दूर करने के लिए पारदर्शी और स्वतंत्र तंत्र जरूरी हैं। JNUTA के ये आरोप यूनिवर्सिटी की भर्ती और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर चल रहे विवाद का हिस्सा हैं। एसोसिएशन की मांगों पर शिक्षा मंत्रालय या अन्य अधिकारियों की ओर से आगे की कार्रवाई का इंतजार है। (Source: ANI)

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