सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारी अदालत में

अवमानना कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- न्यायिक अधिकारी अदालत में जजों पर नहीं चीख सकता

Judicial Officer Cannot Shout at Judges in Court, Says Supreme Court

नई दिल्ली (भारत)। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई भी न्यायिक अधिकारी अदालत में न्यायाधीशों पर चीख नहीं सकता। मुंबई हाई कोर्ट में चल रही अवमानना कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उच्च न्यायालय इस मामले में कार्यवाही आगे बढ़ा सकता है, हालांकि 28 सितंबर तक अंतिम फैसला नहीं सुनाया जाएगा। मामले में न्यायिक अधिकारी पर अदालत की कार्यवाही के दौरान कथित तौर पर आक्रोशपूर्ण और अनुशासनहीन व्यवहार करने का आरोप है।

याचिकाकर्ता ने अवमानना कार्यवाही पर रोक की मांग की

जब पीठ ने याचिका पर नोटिस जारी करने की बात कही, तो याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने उच्च न्यायालय में चल रही अवमानना कार्यवाही पर रोक लगाने का अनुरोध किया। इस पर पीठ ने कहा, ‘‘एक न्यायिक अधिकारी अदालत में न्यायाधीशों पर चीख नहीं सकता।’’ विकास सिंह ने कहा कि याचिकाकर्ता ने अदालत में चीखा नहीं था और अदालत के समक्ष बिना शर्त माफी भी मांगी थी। इस पर पीठ ने कहा कि एक न्यायिक अधिकारी को उच्च न्यायालय से यह कहने का कोई अधिकार नहीं है कि पदों को नहीं भरने के लिए अदालत जिम्मेदार है। पीठ ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता बताया।

सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय में फिर माफी मांगने की सलाह दी

शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वह उच्च न्यायालय में वापस जाए और वहां बिना शर्त माफी मांगे। वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि याचिकाकर्ता पहले ही उच्च न्यायालय के समक्ष माफी मांग चुका है। सिंह ने यह भी बताया कि याचिकाकर्ता का तबादला नक्सल प्रभावित क्षेत्र में कर दिया गया है, जो करीब 1,000 किलोमीटर दूर है। इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 28 सितंबर तय कर दी।

179 पदों के सृजन को लेकर शुरू हुआ था विवाद

उच्च न्यायालय में यह विवाद त्वरित अदालतों के लिए 179 पदों के सृजन का निर्देश देने का अनुरोध करने वाली अंतरिम याचिका की सुनवाई के दौरान उठा। उच्च न्यायालय ने पाया था कि राज्य के विधि एवं न्याय विभाग में सचिव और वरिष्ठ कानूनी सलाहकार रहे अधिकारी द्वारा पहले दाखिल किया गया हलफनामा संतोषजनक नहीं था। उच्च न्यायालय ने अपने एक सितंबर के आदेश में कहा था कि उसने अतिरिक्त सरकारी वकील से पूछा था कि अतिरिक्त हलफनामे में कौन-से कथन यह बताते हैं कि त्वरित अदालतों के लिए 179 नए पद सृजित किए गए हैं। इसके जवाब में अधिकारी के व्यवहार को लेकर अदालत ने आपत्ति जताई थी।

उच्च न्यायालय ने आक्रामक व्यवहार का किया था उल्लेख

उच्च न्यायालय ने कहा था कि उसके सवाल का जवाब देने के बजाय हलफनामा देने वाले अधिकारी ने आक्रामक और ऊंची आवाज में बोलना शुरू कर दिया, जो लगभग चीखने जैसा था। अदालत के मुताबिक, अधिकारी ने अन्य बातों के अलावा उच्च न्यायालय प्रशासन को दोषी ठहराया और भरी अदालत में कहा कि ‘179 पदों को नहीं भरने के लिए उच्च न्यायालय प्रशासन जिम्मेदार है।’ इसके बाद उच्च न्यायालय ने अधिकारी को नोटिस जारी करके पूछा था कि उनके खिलाफ क्यों नहीं अवमानना की कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए। उच्च न्यायालय ने मामले को 11 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था।

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