कारगिल युद्ध का निर्णायक दिन: 14 जुलाई ने ऑपरेशन विजय में भारत की जीत की नींव रखी
नई दिल्ली: भारतीय सेना ने मंगलवार को अपने सैन्य इतिहास की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को याद किया। 14 जुलाई, 1999, कारगिल युद्ध का वह निर्णायक मोड़ था, जब भारत के अडिग संकल्प ने पीछे हटते दुश्मन को विवश कर दिया और पाकिस्तान पर देश की सैन्य विजय का मार्ग प्रशस्त किया। X पर साझा किए गए एक पोस्ट में भारतीय सेना के फायर एंड फ्यूरी कोर ने कहा, "ऑपरेशन विजय: भारत ने विजय की घोषणा की, पाकिस्तान ने वापसी की घोषणा की। 14 जुलाई, 1999 तक भारतीय सेना ने असाधारण साहस, अटूट दृढ़ संकल्प और सुनियोजित अभियानों के माध्यम से द्रास, कारगिल और बटालिक क्षेत्रों में अधिकांश रणनीतिक ऊंचाइयों पर पुनः नियंत्रण प्राप्त कर लिया था।"
भारतीय सेना के सामने ध्वस्त हुई दुश्मन की रणनीति
सेना ने कहा कि "विनाशकारी तोपखाने की गोलाबारी और दृढ़ पैदल सेना के हमलों" के समर्थन से भारतीय सशस्त्र बलों के लगातार आक्रमण के आगे दुश्मन की योजनाएँ पूरी तरह धराशायी हो गईं। 14 जुलाई 1999 की घटनाओं को याद करते हुए सेना ने कहा, "14 जुलाई 1999 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए ऑपरेशन विजय की सफलता की घोषणा की और सशस्त्र बलों के शौर्य, सर्वोच्च बलिदान और अटूट संकल्प को श्रद्धांजलि अर्पित की।" सेना ने आगे कहा कि उसी दिन लगातार सैन्य असफलताओं और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दबाव के कारण पाकिस्तान ने अपनी सेनाओं की वापसी की घोषणा की।
युद्ध में जीत की पुष्टि का दिन
सेना ने यह भी कहा कि हालांकि शेष घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए सैन्य अभियान जारी रहे, लेकिन 14 जुलाई 1999 वह निर्णायक दिन था जिसने कारगिल युद्ध में भारत की जीत की पुष्टि कर दी। भारत इस दिन को गर्व और कृतज्ञता के साथ याद करता है। इसी बीच, ऑपरेशन विजय की 27वीं वर्षगांठ के अवसर पर भारतीय सेना ने कारगिल युद्ध में लड़ने वाले सैनिकों के साहस, बलिदान और पेशेवर उत्कृष्टता को श्रद्धांजलि देते हुए द्रास क्षेत्र पर नज़र रखने वाले रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान गन हिल (पॉइंट 5140) पर एक अभियान का आयोजन किया। पॉइंट 5140 ऑपरेशन विजय के सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों में से एक था, क्योंकि यह दुश्मन का प्रमुख गढ़ और निगरानी चौकी थी। द्रास क्षेत्र पर नियंत्रण बहाल करने और आसपास की ऊंचाइयों पर दुश्मन के प्रभुत्व को समाप्त करने के लिए इस पर कब्जा करना बेहद अहम था।
ऐसे तैयार हुई जीत की राह
पॉइंट 5140 की लड़ाई कारगिल युद्ध की निर्णायक लड़ाइयों में गिनी जाती है। मुख्य हमले से पहले भारतीय सेना ने 'हंप' सहित आसपास के कई महत्वपूर्ण स्थानों को सुरक्षित किया। 13-14 जून 1999 की रात 18 ग्रेनेडियर्स ने 'हंप' पर कब्जा किया, जबकि 13 जम्मू और कश्मीर राइफल्स ने बोफोर्स तोपों की सीधी गोलीबारी के समर्थन से 'रॉकी नॉब' पर कब्जा कर दुश्मन के बंकर तबाह कर दिए। इससे आगे के अभियानों का रास्ता साफ हुआ।
हर साल मनाया जाता है कारगिल विजय दिवस
भारत में हर वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। यह दिन ऑपरेशन विजय की सफल समाप्ति और भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा पाकिस्तानी घुसपैठियों से रणनीतिक ऊंचाइयों को वापस हासिल कर देश की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा की याद में मनाया जाता है।
(एएनआई)
यह भी पढ़े: जौनपुर को मिली बड़ी रेल सौगात, सिटी स्टेशन पर रुकेगी वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस