जस्टिस यशवंत वर्मा मामले में जांच पर जस्टिस संजय किशन कौल ने उठाए सवाल, बोले- ‘जांच सही तरीके से नहीं हुई’
नई दिल्ली (भारत)। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस संजय किशन कौल ने जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े मामले की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। ANI से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें लगा कि जांच सही तरीके से नहीं हुई, क्योंकि आग लगने के कारण का पता लगाया जाना चाहिए था। जस्टिस कौल ने इस मामले में कई सवाल और उलझनें होने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि बरामद हुए पैसे के मामले की जांच की जानी चाहिए थी।
सरकारी आवास से जला हुआ कैश मिलने के बाद शुरू हुआ विवाद
यह मामला 12 अगस्त 2025 का है, जब दिल्ली हाई कोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास से बिना हिसाब-किताब वाला और कुछ हद तक जला हुआ कैश बरामद हुआ था। मामले की आंतरिक जांच के बाद भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सिफारिश भेजी थी। इसमें जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की सिफारिश की गई थी।
जस्टिस वर्मा ने 10 अप्रैल को दिया था इस्तीफा
जस्टिस यशवंत वर्मा ने 10 अप्रैल को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने उन्हें इस मामले में दोषी ठहराया था। समिति की रिपोर्ट 12 अगस्त को संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा और राज्यसभा में पेश की गई थी। हालांकि, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों पर गतिरोध के कारण रिपोर्ट पर चर्चा नहीं हो सकी।
जस्टिस कौल बोले- आग लगने के कारण का पता लगाना जरूरी था
जस्टिस संजय किशन कौल ने ANI से बातचीत में कहा, “मुझे लगा कि जांच सही तरीके से नहीं हुई, क्योंकि किसी न किसी को तो कम से कम आग लगने का कारण पता लगाना चाहिए था।” उन्होंने इस मामले को लेकर अपनी चिंता भी जाहिर की। उनके मुताबिक, यह मामला ऐसे व्यक्ति से जुड़ा है, जिसकी कानूनी पृष्ठभूमि अच्छी रही है और जिसके खिलाफ इलाहाबाद तथा दिल्ली में पहले कोई शिकायत नहीं थी।
कमरा कुछ साल पहले ही बना था, कई सवाल थे
जस्टिस कौल ने कहा कि संबंधित कमरा कुछ साल पहले ही बना था और वह कोई बहुत पुरानी इमारत नहीं थी। उन्होंने कहा कि इस मामले में कई सवाल और उलझनें थीं। जस्टिस कौल ने यह भी स्वीकार किया कि पैसे बरामद हुए थे और इस पहलू की जांच की जानी चाहिए थी। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में संबंधित व्यक्ति की पूरी तरह बदनामी हो गई है।
संसद में महाभियोग प्रस्ताव पर आगे की कार्रवाई की तैयारी
जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 218 के तहत महाभियोग प्रस्ताव से जुड़े ज्ञापन पर पिछले साल लोकसभा के कुल 145 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थे। इस ज्ञापन पर कांग्रेस, TDP, JDU, JD(S), जन सेना पार्टी, AGP, शिवसेना (शिंदे), लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास), SKP और CPI(M) सहित विभिन्न दलों के सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला संसद के अगले सत्र में इस मुद्दे पर कोई फैसला लेने से पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ चर्चा करेंगे। जांच समिति की रिपोर्ट मानसून सत्र में पेश की गई थी, लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध के कारण इस पर आगे चर्चा नहीं हो पाई थी। (Source: ANI)
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