कांडला फोरम 2026: भारत बनेगा दुनिया का सबसे सस्ता ग्रीन फ्यूल सप्लायर, डीपीए कांडला निभाएगा अहम भूमिका
गांधीधाम (गुजरात)। दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (DPA) द्वारा गुजरात के गांधीधाम में आयोजित 'कांडला फोरम 2026' के दौरान नए और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के निदेशक डॉ. प्रसाद चाफेकर ने बुधवार को घोषणा की कि भारत दुनिया भर में ग्रीन फ्यूल का कम लागत वाला प्रमुख सप्लायर बनने की पूरी क्षमता रखता है। वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता और आर्थिक विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के लिहाज से यह रणनीतिक संवाद वर्तमान ऊर्जा परिदृश्य में बेहद अहम माना जा रहा है।
कांडला फोरम में ग्रीन फ्यूल की संभावनाओं पर चर्चा
गांधीधाम (गुजरात) में आयोजित 'कांडला फोरम 2026' के मंच से नए और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के निदेशक डॉ. प्रसाद चाफेकर ने बुधवार को कहा कि इस तरह के मंचों पर होने वाली उच्चस्तरीय चर्चाएं दुनिया भर में ग्रीन फ्यूल के कम लागत वाले सप्लायर के तौर पर भारत की क्षमता को पूरी दुनिया के सामने साबित करने में मील का पत्थर साबित होंगी।
फोरम को संबोधित करते हुए डॉ. चाफेकर ने बताया कि इस आयोजन से प्रतिभागियों को ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन फ्यूल पर अपने विचार साझा करने का एक बेहतरीन अवसर मिला है, जिसमें कांडला पोर्ट की पहलों और भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए महत्वाकांक्षी मिशन पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन भी दिया गया।
डॉ. प्रसाद चाफेकर ने कहा, "यहां प्रतिभागियों के बीच विचारों के बहुत ही सार्थक और सकारात्मक आदान-प्रदान का सत्र रहा है। हमने कांडला पोर्ट और भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए मिशन पर एक संक्षिप्त प्रस्तुति दी। यहां की कार्यवाही पर हमें बेहद शानदार प्रतिक्रिया मिली है, और इस प्रकार की बातचीत से वैश्विक स्तर पर कम लागत वाले ग्रीन फ्यूल के विश्वसनीय सप्लायर के रूप में भारत की क्षमता को स्थापित करने में काफी बल मिलेगा।"
भारत की ऊर्जा प्रतिबद्धता और DPA की भूमिका
डॉ. चाफेकर ने स्पष्ट किया कि आज की चर्चाएं मुख्य रूप से कांडला पोर्ट की पहलों, सरकार के मिशन की आगामी कार्ययोजना, अगले चरण के कदमों और कांडला पोर्ट व मिशन से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स की उम्मीदों पर पूरी तरह केंद्रित थीं।
उन्होंने कहा, "आज आयोजित इन चर्चाओं का मुख्य केंद्रबिंदु कांडला पोर्ट की पहल, वर्तमान भविष्य में इस मिशन के तहत उठाए जाने वाले कदम और पोर्ट तथा मिशन दोनों से स्टेकहोल्डर्स की अपेक्षाएं थीं।"
गौरतलब है कि बुधवार को दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (DPA), कांडला ने "एंकरिंग मैरीटाइम डीकार्बोनाइज़ेशन" (समुद्री क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन कम करना) थीम के तहत 'कांडला फ़ोरम 2026' की मेजबानी की। इस सम्मेलन में हाइड्रोजन, क्लीन एनर्जी, शिपिंग, जहाज निर्माण, इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी और फाइनेंस सेक्टर के दिग्गज वैश्विक और भारतीय स्टेकहोल्डर्स ने एक मंच पर आकर ज्ञान के आदान-प्रदान, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और ग्रीन-एनर्जी प्रोजेक्ट्स के विकास पर गहन मंथन किया।
दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी, कांडला वर्ष 2070 तक 'नेट ज़ीरो' (कार्बन उत्सर्जन शून्य करने) के भारत के राष्ट्रीय संकल्प को तेजी से आगे बढ़ाने की दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। अपने लगातार विकसित होते ग्रीन हाइड्रोजन और क्लीन-फ्यूल इकोसिस्टम के माध्यम से DPA कांडला को ग्रीन एनर्जी, सस्टेनेबल शिपिंग और मैरीटाइम डीकार्बोनाइज़ेशन का एक प्रमुख उभरता हुआ हब बना रहा है।
हाइड्रोजन काउंसिल की CEO का बड़ा बयान
सम्मेलन में शामिल हुईं हाइड्रोजन काउंसिल की CEO इवाना जेमेलकोवा ने कांडला फोरम में अपनी भागीदारी पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि उनके संगठन में दुनिया भर की अग्रणी कंपनियां शामिल हैं।
इवाना जेमेलकोवा ने कहा, "हाइड्रोजन काउंसिल दुनिया का सबसे बड़ा और एकमात्र ऐसा संगठन है, जो दुनिया भर की उन तमाम शीर्ष कंपनियों के चीफ एग्जीक्यूटिव्स को एक साथ लाता है जो हाइड्रोजन के माध्यम से दुनिया की सबसे बड़ी ऊर्जा समस्याओं का समाधान ढूंढ रही हैं। हम आज कांडला फोरम में आकर बेहद प्रसन्न हैं, जिसमें अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, मध्य पूर्व और एशिया से जुड़ी लगभग 70 कंपनियां हमारी सदस्य के रूप में शामिल हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि यह देखना बेहद उत्साहजनक है कि भारत हाइड्रोजन से जुड़े रणनीतिक अवसरों को भली-भांति पहचान रहा है और यह ऊर्जा सुरक्षा, सस्टेनेबिलिटी तथा आर्थिक विकास के लक्ष्यों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
वैश्विक निवेशकों और दिग्गजों की बड़ी भागीदारी
यह फोरम वैश्विक उद्योग के दिग्गजों और दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी के बीच सीधे संवाद स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा है। इस दौरान निवेश को गति देने, टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप और कांडला में एक मजबूत ग्रीन फ्यूल व मैरीटाइम डीकार्बोनाइज़ेशन इकोसिस्टम विकसित करने को लेकर गंभीर चर्चाएं हुईं।
इस विशेष फोरम की परिकल्पना ग्रीन-एनर्जी वैल्यू चेन विकसित करने में सक्षम कंपनियों को पोर्ट लीडरशिप से सीधे जोड़ने और जमीनी स्तर पर ठोस सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए की गई थी। इस उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल में 62 हाइड्रोजन काउंसिल सदस्य कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले 200 से अधिक वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (Senior Executives) शामिल हुए। इनमें इलेक्ट्रोलाइज़र एवं उपकरण निर्माता, एनर्जी व इंडस्ट्रियल गैस दिग्गज, इंजीनियरिंग और EPC कंपनियां, मोबिलिटी मैन्युफैक्चरर्स, शिपिंग एवं मैरीटाइम संगठन, क्लासिफिकेशन संस्थाएं और प्रोजेक्ट फाइनेंस संस्थान प्रमुख रूप से शामिल रहे।
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