गन्ना किसानों का प्रदर्शन तेज, हुबली में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के आवास पर बढ़ाई गई सुरक्षा
हुबली (कर्नाटक)। गन्ने के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी की मांग को लेकर किसानों द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने के आह्वान के बीच मंगलवार को हुबली में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के आवास पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। यह कदम कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी के बीच दिल्ली में हुई अहम बैठक के ठीक एक दिन बाद उठाया गया है।
मंत्री आवास के बाहर भारी पुलिस तैनात, बैरिकेडिंग मजबूत
किसान गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाने और अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करने की जिद पर अड़े हैं। किसानों के 'NH नाकेबंदी' के ऐलान को देखते हुए पुलिस प्रशासन मुस्तैद हो गया है। प्रह्लाद जोशी के हुबली स्थित आवास की ओर जाने वाली सभी सड़कों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और मजबूत बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं।
चीनी मिलों में तौल में धोखाधड़ी और अनियमितता का आरोप
कर्नाटक में यह विवाद केवल गन्ने की कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि चीनी मिलों में बड़े पैमाने पर जारी कथित अनियमितताओं से भी जुड़ा है। किसान संघों का आरोप है कि मिलों में वजन करने वाली मशीनों से छेड़छाड़ की जा रही है, फसल का वजन कम दर्ज किया जा रहा है और कटाई के बाद परिवहन (ट्रांसपोर्टेशन) के नाम पर धोखाधड़ी की जा रही है।
दिल्ली में जोशी और शिवकुमार के बीच हुई द्विपक्षीय बातचीत
इससे पहले सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के आवास पर डीके शिवकुमार ने उनसे मुलाकात की। इस दौरान वर्ष 2026-27 के आगामी चीनी सीजन के लिए गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य (FRP/SAP) और किसानों की समस्याओं पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दिल्ली स्थित मेरे आवास पर सौहार्दपूर्ण मुलाकात की। इस दौरान गन्ना किसानों द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दों—जैसे सरकार का परामर्श मूल्य (SAP), चीनी मिलों में गन्ने के वजन में धोखाधड़ी, कम वजन दर्ज करना, कांटा पर्ची में गड़बड़ी और परिवहन में धांधली पर चर्चा हुई। मैंने इन समस्याओं से केंद्र सरकार के रुख को अवगत कराया और उचित समाधान का अनुरोध किया।"
वहीं, डीके शिवकुमार ने भी 'एक्स' पर पोस्ट में कहा, "2026-27 के चीनी सीजन के लिए गन्ने की कीमत को लेकर कर्नाटक के किसानों की चिंताओं पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से बात की। हमने किसानों को उचित और लाभकारी मूल्य दिलाने और उनकी समस्याओं के समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। मैंने केंद्र सरकार से कर्नाटक के किसानों के हितों की रक्षा करने का आग्रह किया है।"
"यह सिर्फ कर्नाटक नहीं, राष्ट्रीय स्तर की समस्या है": शिवकुमार
सोमवार को न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए डीके शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि गन्ने के दाम का मुद्दा बेहद जटिल है। उन्होंने कहा, "मैं यहां गन्ने की मूल्य दरों पर चर्चा करने आया था। किसान ऊंची कीमतों की मांग कर रहे हैं, लेकिन भारी वित्तीय नुकसान के कारण चीनी मिलें उनकी मांगें पूरी करने में असमर्थ हैं। इस साल राज्य को भीषण सूखे का भी सामना करना पड़ा है। 200 से अधिक किसान मुझसे मिलने आए थे, जिसके बाद मैंने अपने मंत्रियों को भी वार्ता के लिए भेजा था।"
उन्होंने आगे कहा, "इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर फैसले की जरूरत है। यह केवल कर्नाटक की समस्या नहीं है। महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, बिहार, उत्तर प्रदेश समेत देश के सभी गन्ना उत्पादक राज्यों को मिलकर नीति बनानी होगी। व्यापक विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू की जाएगी ताकि किसानों और चीनी उद्योग—दोनों के हितों का संतुलन बनाया जा सके।" (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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