1960 और 1970 के दशक में भारत की समुद्री सीमाओं पर

के.एफ. रुस्तमजी समिति की सिफारिशों से हुई भारतीय तटरक्षक बल की नींव

K.F. Rustamji recommendations laid ICG foundation

नई दिल्ली [भारत]: 1960 और 1970 के दशक में भारत की समुद्री सीमाओं पर बड़े पैमाने पर समुद्री तस्करी और अवैध ट्रॉलर गतिविधियां देश की उभरती अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन गई थीं। इस समस्या से निपटने के लिए एक समर्पित समुद्री सुरक्षा बल की आवश्यकता महसूस की गई।

1974 में के.एफ. रुस्तमजी को सौंपी गई जिम्मेदारी

साल 1974 में श्री के.एफ. रुस्तमजी को भारत के तटों पर बढ़ती समुद्री तस्करी की समस्या से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। उनकी अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति ने समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का अध्ययन किया और एक अलग, स्वतंत्र तथा समर्पित समुद्री सशस्त्र बल के गठन की सिफारिश की।

रुस्तमजी समिति की रिपोर्ट बनी आधार

रुस्तमजी समिति की सिफारिशों ने भारतीय तटरक्षक बल के गठन की सीधी नींव रखी। समिति के ब्लूप्रिंट के आधार पर भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा, समुद्री हितों की रक्षा और समुद्र के रास्ते होने वाली तस्करी पर रोक लगाने के लिए एक स्वतंत्र बल के गठन की दिशा में कदम बढ़ाया गया।

1 फरवरी 1977 को अस्तित्व में आया अंतरिम तटरक्षक बल

भारतीय तटरक्षक बल की औपचारिक शुरुआत 1 फरवरी 1977 को अंतरिम तटरक्षक बल के रूप में हुई। इसका उद्देश्य भारत के समुद्री हितों की रक्षा करना और समुद्र के रास्ते होने वाली तस्करी तथा अन्य अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाना था।

1978 में मिला वैधानिक आधार

अगस्त 1978 में संसद द्वारा कोस्ट गार्ड अधिनियम पारित किए जाने के बाद भारतीय तटरक्षक बल को औपचारिक वैधानिक आधार मिला। इसके साथ ही संगठन को भारत के समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा और कानून प्रवर्तन से जुड़ी जिम्मेदारियों के लिए एक मजबूत कानूनी आधार प्राप्त हुआ। इस तरह, 1974 में के.एफ. रुस्तमजी समिति द्वारा तैयार किया गया ब्लूप्रिंट भारतीय तटरक्षक बल के गठन की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हुआ और आगे चलकर यह भारत की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।

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