ममता बनर्जी की प्रधानमंत्री से मांग: जीटीए में बिना सहमति नियुक्त वार्ताकार को हटाया जाए
राज्य से परामर्श के बिना वार्ताकार की नियुक्ति
ममता बनर्जी का कहना है कि केंद्र सरकार ने सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी को जीटीए के वार्ताकार पद पर नियुक्त कर दिया, जबकि राज्य सरकार से इस बारे में कोई चर्चा नहीं की गई। मुख्यमंत्री के मुताबिक, यह कदम जीटीए नियमों के विरुद्ध है, क्योंकि जीटीए राज्य सरकार के अधीन है और नियुक्ति प्रक्रिया में राज्य से बातचीत अनिवार्य है।
ममता पहले भी भेज चुकी हैं पत्र
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस मुद्दे पर वे पहले भी केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भेज चुकी हैं। पीएमओ ने उनका पत्र गृह मंत्रालय को भेजने की जानकारी दी थी, लेकिन गृह मंत्रालय की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। न ही नियुक्त वार्ताकार को हटाया गया है।
‘संवैधानिक ढांचे में दखल’— ममता का आरोप
ममता बनर्जी का आरोप है कि राज्य की सहमति के बिना जीटीए में वार्ताकार की नियुक्ति करना, राज्य के आंतरिक मामलों में असंवैधानिक हस्तक्षेप है। उन्होंने इसे मनमाना और राजनीतिक रूप से प्रेरित निर्णय करार दिया और कहा कि ऐसा कदम केंद्र–राज्य के संघीय ढांचे को कमजोर करता है।
गोरखा समुदाय से जुड़े मुद्दों पर वार्ताकार की भूमिका
मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि जीटीए में नियुक्त वार्ताकार दार्जिलिंग और आसपास के गोरखा समुदाय से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करता है। ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर नियुक्ति से पहले राज्य सरकार से चर्चा होना आवश्यक है। लेकिन इस बार, राज्य को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया गया।
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