मेरठ ब्लू ड्रम केस: कोर्ट ने प्रेमी जोड़े को सुनाई फांसी की सजा, सौरभ राजपूत हत्याकांड में बड़ा फैसला
मेरठ (उत्तर प्रदेश)। मेरठ की एक जिला अदालत ने बहुचर्चित 'ब्लू ड्रम हत्याकांड' में बुधवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई है। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने दोनों दोषियों पर विभिन्न धाराओं के तहत भारी जुर्माना भी लगाया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, कोर्ट ने धारा 302 के तहत 50,000 रुपये और धारा 238A के तहत 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया है।
यह सनसनीखेज वारदात पूर्व मर्चेंट नेवी ऑफिसर सौरभ राजपूत की हत्या से जुड़ी है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
खौफनाक साजिश और क्रूरता बनी फांसी का आधार
सरकारी वकील कृष्ण कुमार दुबे ने इस फैसले को देश की न्यायिक व्यवस्था का एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया है। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने अपराध की क्रूरता और सुनियोजित साजिश को सजा का मुख्य आधार बनाया।
जांच में सामने आया कि मुस्कान ने अपनी मर्जी से प्रेम विवाह करने के बावजूद अपने ही पति सौरभ राजपूत को 3 मार्च 2025 को पहले नशीला पदार्थ दिया और फिर उसके दिल और गर्दन पर वार कर बेरहमी से हत्या कर दी। इसके बाद शातिर तरीके से सबूत मिटाने के लिए शव को तीन हिस्सों में काटकर एक नीले रंग के ड्रम में डाला गया और उसे सीमेंट व रेत से सील कर दिया गया। पुलिस ने 18 मार्च 2025 को शव बरामद किया था।
बचाव पक्ष के तर्क हुए खारिज
फैसला सुनाए जाने से पहले डिफेंस (बचाव पक्ष) की तरफ से दलीलें दी गईं कि इस मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी (Eyewitness) नहीं था और दोनों आरोपियों की अपनी बेटियां हैं। हालांकि, अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए 22 अहम गवाहों और पुख्ता वैज्ञानिक व सटीक सबूतों के आगे बचाव पक्ष के सभी तर्क खारिज हो गए। कोर्ट ने माना कि यह एक बेहद शांत और ठंडे दिमाग से रची गई सुनियोजित साजिश थी।
बेटियों की कस्टडी और अन्य अहम पहलू
एक महिला को मौत की सजा सुनाए जाने के इस दुर्लभ मामले में अदालत ने परिवार और बच्चों के भविष्य को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। कानूनी प्रावधानों के तहत, दोषी मुस्कान की बेटी 6 साल की उम्र तक अपनी नानी (यानी परिवार) के साथ रह सकती है।
अदालत की कार्यवाही करीब 16 महीनों तक चली, जिसमें कुल 126 सुनवाइयां हुईं। सुरक्षा कारणों से दोनों दोषियों को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया। मुकदमे के दौरान यह भी सामने आया कि मुस्कान के माता-पिता ने अपनी बेटी की इस सजा का लिखित रूप में विरोध नहीं किया था, जबकि मृतक सौरभ की मां रेनू और भाई बबलू शुरू से ही न्याय और फांसी की गुहार लगा रहे थे। फैसले से ठीक पहले दोनों दोषियों ने तनाव के चलते खाना-पीना छोड़ दिया था, जिन्हें सीसीटीवी की कड़ी निगरानी में रखा गया था। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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