अमेरिका सहित तमाम पश्चिमी देशों में माइक्रोचिप की

माइक्रोचिप" की किल्लत से आटोमोबाइल उद्योग पर संकट

माइक्रोचिप" की किल्लत से आटोमोबाइल उद्योग पर संकट

सेमीकंडक्टर की कमी से वाहन निर्माण इकाईयों में ठप्प हो सकता है उत्पादन

मुंबई। अमेरिका सहित तमाम पश्चिमी देशों में "माइक्रोचिप" की अनुपलब्धता के कारण आटोमोबाइल उद्योगों पर संकट के बादल गहराने लगे हैं। वैश्विक स्तर पर चिप संकट के कारण वाहन इंडस्ट्री में एक बार फिर उत्पादन लगभग ठप्प हो गया है। दुनिया के कई देशों वाहन यूनिट्स में उत्पादन लगभग बंद हो गया है। हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिन पिंग की दक्षिण कोरिया के बुसान में हुई बैठक के बाद चिप की आपूर्ति बहाल होने की उम्मीद जगी है।

यह संकट नीदरलैंड्स, चीन और अमेरिका के बीच छिड़े विवाद से उपजा है। इस विवाद के केंद्र में डच चिप कंपनी नेक्सपीरिया है जिसका चीन अधिग्रहण कर चुकी है। नेक्सपीरिया ने चीन से पश्चिमी देशों को चिप निर्यात बंद कर दिया है। इसके बाद अमेरिका में होंडा के कारखानों में अस्थायी रूप से उत्पादन रोक दिया गया है। उद्योग के जानकार लोगों ने चेतावनी दी है कि यह सामान्य माइक्रोचिप की कमी दुनियाभर में फैल सकती है। इससे वाहनों के लॉक सिस्टम, क्लाइमेट कंट्रोल और स्पीडोमीटर जैसे जरूरी कार उपकरणों का उत्पादन रुक सकता है। 

जापानी कंपनी होंडा के एक प्रवक्ता ने कहा, 'कार कंपनियां सेमीकंडक्टर की सप्लाई की कमी से जूझ रही हैं।' यूरोपीय ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन की महानिदेशक सिग्रिड डी व्रीस ने कहा, 'प्रोडक्शन रुकना कुछ ही दिन में दूर हो सकता है।'

आटोमोबाइल उद्योगों पर यह संकट मुख्य रूप से भू-राजनीतिक टकराव और निर्यात नियंत्रणों के विस्तार के कारण पैदा हुआ है। चीन की विंगटेक टेक्नोलॉजी ने वर्ष 2019 में नीदरलैंड्स की चिप कंपनी नेक्सपीरिया का अधिग्रहण किया था। 

अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने दिसंबर 2024 में विंगटेक टेक्नोलॉजी को बीआईएस एंटिटी लिस्ट में शामिल कर दिया और सितंबर 2025 में बीआईएस ने '50% संबद्धता नियम लागू कर दिया। BIS एंटिटी लिस्ट उन विदेशी संस्थाओं की सूची है जिनके साथ व्यापार को नियंत्रित करने के लिए अमेरिकी सरकार इन पर निर्यात प्रतिबंध लगाती है। इसके तहत विंगटेक के स्वामित्व वाली नेक्सपीरिया भी अमेरिकी निर्यात नियंत्रणों के अधीन हो गई। इससे विवाद पैदा हो गया।

सितंबर 2025 में नीदरलैंड्स सरकार ने तकनीकी सुरक्षा का हवाला देते हुए, नेक्सपीरिया पर नियंत्रण लेने के लिए एक विशेष कानून का उपयोग किया। अक्टूबर 2025: चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने जवाबी कार्रवाई करते हुए नेक्सपीरिया की चीनी इकाई को चीन निर्मित कंपोनेंट्स का निर्यात करने से रोक दिया। चूंकि नेक्सपीरिया के अधिकांश (80%) उत्पाद चीन में बनते हैं। इसलिए यह प्रतिबंध वैश्विक ऑटो आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक बड़ा संकट बन गया है।

माइक्रोचिप की अनुपलब्धता से सिर्फ आटोमोबाइल उद्योग ही नहीं मोबाइल उद्योग भी प्रभावित हो सकता है। मेमोरी चिप्स की वैश्विक कमी से स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ सकती हैं। एआई सर्वरों में इस्तेमाल होने वाली हाई-बैंडविड्द्ध मेमोरी (एचबीएम) चिप्स की आसमान छूती मांग ने सप्लाई बाधित कर दी है। इससे चिप की लागत 50% से ज्यादा बढ़ गई है। सैमसंग जैसी बड़ी कंपनियां जल्द दाम बढ़ाने की घोषणा कर सकती हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह मूल्य वृद्धि कई सालों तक जारी रह सकती है। कुछ ब्रांड्स पहले ही कीमतें एडजस्ट कर रहे हैं। सप्लाई चेन ट्रैकिंग फर्म ट्रेंडफोर्स के मुताबिक, मिड-रेंज और किफायती स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल मेमोरी चिप्स की सप्लाई घट रही है। इससे बचने के लिए ब्रांड्स ने खरीद बढ़ा दी, जिससे असंतुलन बढ़ा और रैंडम एक्सेस मेमोरी चिप के दाम 10% से अधिक बढ़ गए।