मोहन भागवत के 'सत्ता परिवर्तन' वाले बयान पर सियासी घमासान, अल्बानिया हिंसा से लेकर SIR तक गरमाई राजनीति
नागपुर (महाराष्ट्र)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के 'सत्ता परिवर्तन' वाले बयान और अल्बानिया की हिंसक घटनाओं को लेकर देश की सियासत गरमा गई है। नागपुर में विजयदशमी उत्सव को संबोधित करते हुए भागवत ने स्पष्ट किया कि सत्ता परिवर्तन केवल चुनाव के जरिए होता है, जिसके बाद पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।
संविधान और विरोध प्रदर्शनों की सीमा
नागपुर के रेशिमबाग मैदान में संघ के शताब्दी वर्ष समारोह को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि सामाजिक समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन होना स्वाभाविक है, लेकिन इन्हें हर हाल में संवैधानिक दायरे के भीतर ही होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शनों के पीछे कोई अन्य एजेंडा हो तो वे राजनीतिक हो जाते हैं, जिससे देशविरोधी ताकतों को फायदा उठाने का मौका मिलता है।
भागवत ने जोर देकर कहा कि समस्याओं का समाधान केवल आंदोलनों से नहीं निकाला जा सकता, बल्कि इसके लिए सामाजिक भागीदारी और आपसी संवाद का दायरा बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा, "समाज और देश को चलाने की जिम्मेदारी भी हमारी है।"
अल्बानिया हिंसा पर संजय राउत का तंज
संघ प्रमुख की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अल्बानिया की राजधानी तिराना में प्रधानमंत्री एडी रामा के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन चल रहे हैं। वहां प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट और सरकारी दफ्तरों में आग लगा दी थी।
शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस हिंसा का हवाला देते हुए लिखा कि भारत समेत दुनिया के सभी देशों को इन घटनाओं से सबक लेना चाहिए। राउत के इस बयान के बाद देश में राजनीतिक जुबानी जंग तेज हो गई।
बीजेपी और विपक्ष में छिड़ा जुबानी जंग
राउत के बयान पर पलटवार करते हुए बीजेपी नेता प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसका गठबंधन देश में अराजकता और हिंसा को बढ़ावा दे रहा है। वहीं, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने दावा किया कि फ्रांस और बांग्लादेश की तरह भारत में भी अशांति फैलाने की गहरी साजिश रची गई थी।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर और पवन खेड़ा ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग की 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ उनका विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक है। उन्होंने कहा कि इसकी तुलना विदेशी हिंसा से करना और सरकार विरोधी माहौल का आरोप लगाना पूरी तरह निराधार है। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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