भोपाल। मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति और अनुसूचित ज

सांसदों की सख्त पूछताछ, उत्तर देने में असमर्थ रहे अधिकारी

सांसदों की सख्त पूछताछ, उत्तर देने में असमर्थ रहे अधिकारी

एससी-एसटी कल्याण पर जवाब नहीं दे पाए डीजीपी

प्राइम न्यूज नेटवर्क

 भोपाल। मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के दौरान संसदीय समिति ने राज्य पुलिस प्रशासन से कई तीखे सवाल पूछे। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि डीजीपी स्तर के अधिकारी समिति के प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर देने में विफल रहे। समिति के सदस्यों ने नाराजगी जाहिर की और कहा कि इतनी बड़ी संख्या में अफसर होने के बावजूद विभाग ठोस जवाब नहीं दे पा रहा है। समिति ने पूछा कि प्रदेश में एससी-एसटी समुदाय के कितने अधिकारी और कर्मचारी कार्यरत हैं। सरकारी तंत्र में इनकी प्रतिनिधित्व  क्या है। इस पर डीजीपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी कोई ठोस उत्तर नहीं दे सके। साथ ही कोई आंकड़ा पेश नहीं कर पाए। समिति ने कहा कि जब डेटा तैयार नहीं है, तो कल्याण योजनाओं की सफलता का आकलन कैसे किया जाएगा..।

सदस्यों ने यह भी पूछा, जब राज्य में 1 लाख से अधिक लोग आउटसोर्सिंग से काम कर रहे हैं, तो उनमें एससी-एसटी वर्ग के लोगों की हिस्सेदारी कितनी है? इस पर भी कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया गया। समिति ने अफसरों की तैयारी पर असंतोष जताते हुए कहा, यदि प्रशासन के पास बुनियादी जानकारी नहीं है, तो समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के प्रयास अधूरे रहेंगे। बैठक के समिति ने सख्त रुप से कहा कि यदि अगली बैठक में भी ठोस जवाब नहीं मिले, तो मुख्य सचिव और डीजीपी को दिल्ली बुलाया जाएगा। सदस्यों ने सवाल उठाया कि जब राज्य स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी ही जवाबदेह नहीं हैं, तो उन्हें विशेषाधिकारी बनाकर बैठाने का औचित्य क्या है? समिति ने हाल ही की सामाजिक घटनाओं, विशेषकर ‘थूक कांड’जैसी घटनाओं पर कार्रवाई को लेकर भी असंतोष जताया। सांसदों ने पूछा कि ऐसी घटनाओं पर त्वरित और उदाहरणीय कार्रवाई क्यों नहीं हुई? कहा, यदि इस तरह के मामलों में पुलिस तत्परता नहीं दिखाएगी, तो सामाजिक न्याय के प्रयास कमजोर पड़ जाएंगे। संसदीय समिति ने स्पष्ट किया कि आगामी बैठक में यदि सभी बिंदुओं पर डेटा और प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई, तो केंद्र सरकार को सिफारिश भेजी जाएगी। समिति का कहना है कि एससी-एसटी कल्याण योजनाओं का सही क्रियान्वयन तभी संभव है जब अधिकारी गंभीरता से काम करें और जवाबदेही तय हो।

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