सरकार ने संसद को बताया कि राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन

NBM 2.0 का असर: गांवों में बढ़ी इंटरनेट पहुंच, ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार

NBM 2.0 Boosts Rural Broadband Connectivity

नई दिल्ली: सरकार ने संसद को बताया कि राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन (NBM) 2.0 के तहत देश के ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की पहुंच लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2025-26 के दौरान ग्रामीण इंटरनेट ग्राहकों की संख्या प्रति 100 आबादी पर 45.03 से बढ़कर 48.31 हो गई है।

ब्रॉडबैंड स्पीड में भी हुआ इजाफा

लोकसभा में एक लिखित जवाब में संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने बताया कि 31 मार्च 2026 तक देश में फिक्स्ड ब्रॉडबैंड की औसत डाउनलोड स्पीड 60.85 एमबीपीएस तक पहुंच गई है। वहीं, स्कूलों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, आंगनवाड़ी केंद्रों और पंचायत कार्यालयों जैसे प्रमुख संस्थानों में ब्रॉडबैंड कनेक्शन बढ़कर 21,82,312 हो गए हैं।

NBM 2.0 का क्या है उद्देश्य?

17 जनवरी 2025 को शुरू और 1 अप्रैल 2025 से लागू राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन 2.0 का उद्देश्य देशभर में डिजिटल संचार ढांचे का विस्तार करना, डिजिटल और सामाजिक-आर्थिक अंतर को कम करना और सभी क्षेत्रों में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है।

गांवों तक पहुंचेगा ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क

सरकार के अनुसार, संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत करीब 2.65 लाख ग्राम पंचायतों और लगभग 3.8 लाख गैर-ग्राम पंचायत गांवों को मांग के आधार पर ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी दी जाएगी। इसके अलावा 1.5 करोड़ ग्रामीण फाइबर कनेक्शनों को बढ़ावा देने की भी योजना है।

भारतनेट परियोजना में तेज़ी

सरकार ने बताया कि जून 2026 तक संशोधित भारतनेट परियोजना के तहत 43,908 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा चुकी है। साथ ही 13,494 ग्राम पंचायतों का उन्नयन भी पूरा किया जा चुका है। सरकार ने कहा कि भारतनेट, मोबाइल टावर स्थापना योजनाएं, 4जी सैचुरेशन प्रोजेक्ट और डिजिटल भारत निधि से संचालित अन्य योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण, दूरस्थ, वन क्षेत्रों और अन्य दुर्गम इलाकों में ब्रॉडबैंड और दूरसंचार सुविधाओं को मजबूत करना है।

राइट ऑफ वे प्रक्रिया हुई तेज

सरकार के अनुसार, राइट ऑफ वे (RoW) आवेदनों के निपटान का औसत समय 2024-25 में 80.63 दिन था, जो 2025-26 में घटकर 35.62 दिन रह गया है। वहीं मोबाइल टावरों में सतत ऊर्जा के उपयोग का प्रतिशत 8 से बढ़कर 11.44 प्रतिशत हो गया है।

सभी राज्यों में एकीकृत डिजिटल पोर्टल

सरकार ने बताया कि अब सभी 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश राइट ऑफ वे आवेदनों के लिए केंद्रीकृत डिजिटल पोर्टल से जुड़ चुके हैं। इससे अनुमति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और एक समान हो गई है।

(एएनआई)

यह भी पढ़े: जलवायु परिवर्तन का बड़ा असर: मेंढकों के बच्चे भी बदल रहे अपनी आदतें