57वीं GST काउंसिल की बैठक से पहले वित्त मंत्री निर

57वीं GST काउंसिल की बैठक से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का ऐलान, 'नेक्स्ट-जेन GST' में कंप्लायंस होगा आसान

Finance Minister Nirmala Sitharaman on GST reforms

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को होने वाली 57वीं GST काउंसिल की बैठक से ठीक पहले स्पष्ट किया है कि वस्तु एवं सेवा कर (GST) सुधारों का अगला चरण करदाताओं के लिए अनुपालन (कम्प्लायंस) को और अधिक सरल बनाने पर केंद्रित होगा। उन्होंने लिंक्डइन आलेख और आधिकारिक 'एक्स' हैंडल के माध्यम से जानकारी दी कि प्रक्रिया से जुड़े ये सुधार जल्द ही काउंसिल के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।

9 वर्षों के अनुभवों पर आधारित होंगे नए सुधार

वित्त मंत्री ने बताया कि 7 अक्टूबर को GST काउंसिल के समक्ष जिन सुधारों को पेश किया जाएगा, वे पिछले नौ वर्षों के GST क्रियान्वयन और करदाताओं तथा राज्यों के मिले-जुले अनुभवों पर आधारित होंगे। 

लिंक्डइन पर अपने लेख में उन्होंने कहा, "पिछले बारह वर्षों में, हमारी सरकार ने ऐसे अनुकूल हालात तैयार करने के लिए काम किया है। साल 2017 में GST की शुरुआत से अप्रत्यक्ष कर (इनडायरेक्ट टैक्स) के लिए एक साझा राष्ट्रीय ढांचा बना। 'नेक्स्ट-जेन GST' उसी प्रयास को आगे बढ़ाता है।"

करदाताओं को राहत और अर्थव्यवस्था को रफ्तार

सीतारमण ने इस बात पर जोर दिया कि 'नेक्स्ट-जेन GST' करदाताओं को राहत देने के साथ-साथ देश की आर्थिक वृद्धि को भी गति दे रहा  है। अपने आधिकारिक 'एक्स' हैंडल के जरिए उन्होंने कहा, "नेक्स्ट-जेन GST करदाताओं को राहत देने और हमारी अर्थव्यवस्था को गति देने, दोनों ही उद्देश्यों को पूरा कर रहा है। अगला चरण रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, रिफंड, विवादों और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़े नियमों के पालन को आसान बनाने पर केंद्रित होगा।"

<blockquote lang="en" dir="ltr">Next-Gen GST is delivering on its twin objectives of relief for taxpayers and greater momentum for our economy. The next phase will focus on making compliance simpler across registration, returns, refunds, disputes and input tax credit. A simpler, more predictable and taxpayer-friendly GST will enable enterprises of every size, across every region, to grow and contribute to Hon'ble PM Shri @narendramodi’s vision of a Viksit Bharat. - Smt @nsitharaman writes on Next-Gen GST and India’s Next Phase of Growth Read the article: https://t.co/nl9Qk414Sw</p>&mdash; Nirmala Sitharaman Office (@nsitharamanoffc) <a href="https://x.com/nsitharamanoffc/status/2106936651889115394?ref_src=twsrc%5Etfw">October 5, 2026</a></blockquote> <script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>

मजबूत आर्थिक आंकड़े और टैक्स कलेक्शन

वित्त मंत्री द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, अर्थव्यवस्था में सुधार के ठोस संकेत मिले हैं:

  • टैक्सेबल सप्लाई: अक्टूबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच टैक्सेबल सप्लाई (कर-योग्य आपूर्ति) में साल-दर-साल 25.8% की वृद्धि दर्ज की गई है।
  • सकल GST संग्रह (Gross GST Collections): अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच कुल GST कलेक्शन मजबूत रहते हुए 12.46 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले 11.6% अधिक है।
  • उपभोक्ता बिक्री (B2C): सुधार के बाद की तुलना में उपभोक्ताओं को की जाने वाली बिक्री में 26.7% की तेज बढ़ोतरी देखी गई।
  • मासिक वृद्धि: जून से सितंबर के बीच हर महीने दोहरे अंकों (डबल-डिजिट) में सालाना वृद्धि दर्ज की गई। इन चार महीनों में कुल कलेक्शन में लगभग 15% की तेजी आई, जबकि रिफंड के बाद का नेट कलेक्शन 10.4% बढ़ा।

इसके अलावा, सभी 11 सेक्टर ग्रुप्स और सभी प्रमुख राज्यों में टैक्सेबल सप्लाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसे वित्त मंत्री ने भारत जैसी विविधतापूर्ण अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है।

टियर-2 और टियर-3 शहरों पर फोकस

वित्त मंत्री ने कहा कि टियर-2 और टियर-3 शहरों के व्यवसायों को स्थानीय स्तर पर निवेश और रोजगार जारी रखते हुए अपने व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करने में सक्षम होना चाहिए।

रिफंड और इनपुट टैक्स क्रेडिट पर विशेष जोर

GST सुधारों के अगले चरण में रिफंड और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) मुख्य फोकस क्षेत्र होंगे। अप्रैल से सितंबर के बीच करदाताओं को लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये का रिफंड जारी किया गया।

सीतारमण ने कहा, "सुधार के बाद के आंकड़े बताते हैं कि क्रेडिट के जरिए चुकाई गई टैक्स देनदारी का हिस्सा बढ़ा है, जबकि टैक्सेबल सप्लाई की तुलना में जमा क्रेडिट में कमी आई है। यह उन व्यवसायों के लिए उत्साहजनक है जो योग्य क्रेडिट के प्रभावी इस्तेमाल पर निर्भर हैं। एक छोटी फर्म के लिए, वर्किंग कैपिटल (कार्यशील पूंजी) यह तय करती है कि वह कितनी आसानी से इनपुट खरीद सकती है, ऑर्डर पूरा कर सकती है और अगला कदम उठा सकती है।" ​(इनपुट: ANI)

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