महंगाई को लेकर बढ़ी चिंता, परिवारों ने 10% तक पहुंचने का जताया अनुमान
नई दिल्ली [भारत]: भारतीय परिवारों को अगले एक वर्ष में मुद्रास्फीति के 10 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है, जो जुलाई में 9.4 प्रतिशत थी। यह बढ़ती कीमतों को लेकर बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है, ऐसे समय में जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि शुरू कर दी है।
एक साल की महंगाई उम्मीद 10% पर पहुंची
RBI के सितंबर 2026 के मुद्रास्फीति अनुमान सर्वेक्षण के अनुसार, अगले 12 महीनों के लिए औसत मुद्रास्फीति अनुमान 60 आधार अंक बढ़कर 10 प्रतिशत हो गया है, जबकि तीन महीने का अनुमान जुलाई में 9.2 प्रतिशत से बढ़कर 70 आधार अंक बढ़कर 9.9 प्रतिशत हो गया है। RBI ने कहा, "परिवारों का अगले तीन महीनों और एक वर्ष के लिए औसत मुद्रास्फीति अनुमान क्रमशः 70 आधार अंक और 60 आधार अंक बढ़कर 9.9 प्रतिशत और 10.0 प्रतिशत हो गया है।" ये निष्कर्ष ऐसे समय में आए हैं जब RBI की मौद्रिक नीति समिति ने मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं के बीच 7 अक्टूबर को रेपो दर में 25 आधार अंक की वृद्धि करके इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया था।
बढ़ती महंगाई से खर्च और वेतन पर असर
घरेलू मुद्रास्फीति की बढ़ती उम्मीदें महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये भविष्य में जीवन यापन की लागत को लेकर बढ़ती चिंताओं को दर्शाती हैं और उपभोक्ता खर्च तथा वेतन संबंधी उम्मीदों को प्रभावित कर सकती हैं। इसी वजह से यह मौद्रिक नीति के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक बन जाती है। सर्वेक्षण में यह भी दिखाया गया कि परिवारों की वर्तमान मुद्रास्फीति की धारणा जुलाई में 7.8 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 8.4 प्रतिशत हो गई। RBI ने कहा, "परिवारों की वर्तमान मुद्रास्फीति की औसत धारणा पिछले दौर की तुलना में 60 आधार अंक (बीपीएस) बढ़कर 8.4 प्रतिशत हो गई है।"
कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका
भविष्य में कीमतों में वृद्धि को लेकर चिंताएं भी बढ़ीं। 88.9 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने अगले वर्ष सामान्य कीमतों में वृद्धि की उम्मीद जताई, जबकि 67.4 प्रतिशत ने कीमतों में वर्तमान से अधिक तेजी से वृद्धि की आशंका व्यक्त की। अगले तीन महीनों में, 81.9 प्रतिशत ने कीमतों में वृद्धि की उम्मीद जताई, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा 80.7 प्रतिशत था।
खाद्य कीमतें भी बनीं बड़ी चिंता
खाद्य पदार्थों की कीमतें एक प्रमुख चिंता का विषय बनी रहीं। 84.9 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने अगले तीन महीनों में खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि की आशंका जताई। सर्वेक्षण में शामिल परिवारों में से 61.6 प्रतिशत ने खाद्य पदार्थों की कीमतों में वर्तमान से अधिक तेजी से वृद्धि की आशंका जताई। RBI ने बताया कि "दोनों समयावधियों के लिए सामान्य मुद्रास्फीति में वृद्धि की आशंका जताने वाले उत्तरदाताओं का अनुपात थोड़ा बढ़ गया है।"
सर्वेक्षण में करीब 6 हजार लोग शामिल
सर्वेक्षण से पता चलता है कि मौद्रिक नीति में सख्ती के बावजूद परिवारों में मुद्रास्फीति को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। हालांकि, 10 प्रतिशत का आंकड़ा परिवारों की औसत अपेक्षा को दर्शाता है और इसे RBI के आधिकारिक मुद्रास्फीति पूर्वानुमान के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। यह सर्वेक्षण 10 से 20 सितंबर के बीच 19 प्रमुख शहरों में किया गया, जिसमें 5,987 उत्तरदाताओं को शामिल किया गया।
(एएनआई)
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